चीन को अपना पोर्ट लीज पर देकर पछता रहा यह देश, अब PM खुद जिनपिंग से करेंगे बात; क्यों बढ़ी टेंशन
ऑस्ट्रेलियाई पीएम अल्बनीज 15 जुलाई के आसपास बीजिंग पहुंचेंगे। अल्बनीज की सबसे बड़ी चुनौती देश के महत्वपूर्ण डार्विन पोर्ट को लेकर चीन को भरोसे में लेना होगा, क्योंकि यह बंदरगाह ऑस्ट्रेलिया के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन गया है।

चीन को अपना बंदरगाह 99 साल के लिए लीज पर देकर ऑस्ट्रेलिया अब पछता रहा है। ऐसे में खुद वहां के पीएम एंथनी अल्बनीज आगामी सप्ताह अपनी दूसरी आधिकारिक यात्रा पर चीन पहुंचने वाले हैं। बताया जा रहा है कि यह दौरा सामान्य कूटनीतिक शिष्टाचार से कहीं आगे निकलने वाला है। सूत्रों के अनुसार, अल्बनीज की सबसे बड़ी चुनौती देश के महत्वपूर्ण डार्विन पोर्ट को लेकर चीन को भरोसे में लेना होगा, क्योंकि इस वक्त ऑस्ट्रेलिया के लिए यह बंदरगाह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन गया है। अल्बनीज ने इसे चुनावी मुद्दा भी बनाया था।
ऑस्ट्रेलिया को डर है कि पोर्ट पर लीज को रद्द करवाने से चीन और उसके व्यापार पर असर पड़ सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। साल 2024 में दोनों देशों में कुल व्यापार 312 बिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रहा। ऐसे में अब देखने वाली बात होगी कि क्या चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ऑस्ट्रेलियाई पीएम की बात पर गौर करते हैं या नहीं? यह भी सवाल है कि क्या पोर्ट को लेकर चीन और ऑस्ट्रेलिया में व्यापारिक तनाव देखने को मिलेगा?
यात्रा का एजेंडा क्या है?
अल्बनीज 15 जुलाई के आसपास बीजिंग पहुंचेंगे। वह चाइना इंटरनेशनल सप्लाई चेन एक्सपो में भाग लेंगे, जो 16-20 जुलाई के बीच होना है। अल्बनीज की यात्रा का उद्देश्य व्यापार और निवेश को स्थिर बनाए रखना है, लेकिन डार्विन पोर्ट पर विवाद सबसे संवेदनशील मुद्दा रहेगा।
डार्विन पोर्ट को लेकर विवाद क्यों है?
दरअसल, चीन की लैंडब्रिज ग्रुप ने 2015 में 99 साल की लीज पर ऑस्ट्रेलिया से डार्विन पोर्ट का अधिकार लिया था। यह कंपनी चीन से संचालित होती है और इसे सरकार-समर्थित माना जाता है। डार्विन पोर्ट ऑस्ट्रेलिया का सैन्य दृष्टिकोण से संवेदनशील इलाका है। अमेरिका के सैनिक भी यहां मौजूद रहते हैं। चीन के पास इतने लंबे समय तक पोर्ट का नियंत्रण होना ऑस्ट्रेलिया और उसके साझेदारों के लिए सुरक्षा जोखिम हो सकता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा
यही वजह है कि अल्बनीज ने अपने चुनाव प्रचार में इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बताते हुए पोर्ट को वापस खरीदने की बात कही थी। मामले में चीन के राजदूत शियाओ कियान ने इस प्रतिक्रिया को "राजनीतिक और अनुचित" बताया है। ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी क्षेत्र में स्थित डार्विन पोर्ट एक रणनीतिक रूप से अहम बंदरगाह है, जहां से रक्षा, व्यापार और समुद्री गतिविधियाँ संचालित होती हैं।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स के प्रोफेसर झोउ वेइहुआन का कहना है, "सुरक्षा के नाम पर लिए गए फैसले तथ्यों पर आधारित हों, न कि केवल राजनीतिक संदेह पर।" वहीं, मेलबर्न में विशेषज्ञ माइकल फेलर के मुताबिक, "अल्बनीज़ चाहेंगे कि चीन पोर्ट से डिवेस्टमेंट को स्वीकार करे, लेकिन इससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों पर कोई बड़ा असर न पड़े।"
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