Artemis II Circles the Earth and Sets Course for the Moon When Will It Return Breathtaking सांसें थामने वाला पल, धरती का चक्कर लगा चांद की ओर चल पड़ा आर्टेमिस-2; कब होगी वापसी, International Hindi News - Hindustan
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सांसें थामने वाला पल, धरती का चक्कर लगा चांद की ओर चल पड़ा आर्टेमिस-2; कब होगी वापसी

पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लागने के बाद नासा का मनवयुक्त यान अब चांद की ओर रवना हो चुका है। यह अभियान कुल 10 दिन का है। आधी शताब्दी के बाद NASA ने मानवयुक्त मिशन लॉन्च किया है। 

Fri, 3 April 2026 12:02 PMAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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सांसें थामने वाला पल, धरती का चक्कर लगा चांद की ओर चल पड़ा आर्टेमिस-2; कब होगी वापसी

1960 और 70 के दशक के बाद पहली बार अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने चंद्रमा की ओर कदम बढ़ाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पृथ्वी की दो परिक्रमा लगाने के बाद आर्टेमिस - 2 चांद की ओर रवाना हो चुका है। करीब आधी शताब्दी बीतने के बाद अमेरिका ने यह मानवयुक्त चंद्र अभियान लॉन्च किया है। बता दें कि यह अभियान कुल 10 दिनों का है। इसमें कोई भी अंतरिक्षयात्री चांद पर कदम नहीं रखेगा बल्कि चांद के करीब चक्कर लगाने के बाद वापसी होगी।

यह मिशन दो साल में चांद पर उतरने की अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी 'नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन' (नासा) की कोशिश की शुरुआत है। अमेरिका के तीन और कनाडा के एक अंतरिक्ष यात्री को लेकर 32 मंजिला रॉकेट नासा के केनेडी स्पेस सेंटर से रवाना हुआ जहां इस नए युग की शुरुआत देखने के लिए दसियों हजार लोग एकत्र हुए थे। आसपास की सड़कें और समुद्र तट भी लोगों से खचाखच भर गए जिससे 1960 और 70 के दशक के अपोलो चंद्र अभियानों की याद ताजा हो गई। यह चांद पर स्थायी मौजूदगी स्थापित करने की दिशा में नासा का अब तक का सबसे बड़ा कदम है।

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आर्टेमिस 2 ने फ्लोरिडा के उसी प्रक्षेपण स्थल से उड़ान भरी जहां से बहुत पहले अपोलो के अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर भेजा गया था। उनमें से जो चंद लोग अब भी जीवित हैं, उन्होंने भी स्पेस लॉन्च सिस्टम (एसएलएस) रॉकेट से उड़ान भर रही नयी पीढ़ी का उत्साह बढ़ाया। आर्टेमिस 2 के कमांडर रीड वाइजमैन ने ''चलो चांद पर चलते हैं!'' के घोष के साथ अंतरिक्ष की ओर इस अभियान की अगुवाई की और उनके साथ पायलट विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसेन थे। यह चंद्रमा के लिए रवाना हुआ अब तक का सबसे विविध दल है जिसके तहत पहली बार कोई महिला, गैर-श्वेत समुदाय का कोई व्यक्ति और कोई गैर-अमेरिकी नागरिक नासा के नए ओरियन कैप्सूल में सवार हुए।

चालू हो गया मेन इंजन

अंतरिक्ष यात्रियों ने अपने परिवारों को अलविदा कहते समय हाथों से दिल का आकार बनाया और प्रक्षेपण स्थल तक जाने के लिए एस्ट्रोवैन में सवार हुए, जहां उनका अंतरिक्षयान उनका इंतजार कर रहा था। अंतरिक्ष यात्री अपनी 10 दिवसीय परीक्षण उड़ान के पहले 25 घंटे पृथ्वी के करीब रहने के बाद मुख्य इंजन चालू कर दिया गया और फिर चांद का सफर शुरू हो गया। यह यान 10 अप्रैल को प्रशांत महासागर में वापसी करेगा।

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आर्टेमिस 1 में नहीं था कोई इंसान

अंतरिक्षयात्री न तो चंद्रमा पर रुकेंगे और न ही उसकी परिक्रमा करेंगे, जैसा कि अपोलो 8 के पहले चंद्रयात्रियों ने 1968 की क्रिसमस की पूर्व संध्या पर किया था। उनका कैप्सूल चंद्रमा के पास से गुजरेगा और उससे 6,400 किलोमीटर आगे बढ़ने के बाद यू-टर्न लेकर सीधे प्रशांत महासागर में उतरेगा। इसी के साथ वे सबसे दूर तक जाने वाले इंसान बन जाएंगे। आर्टेमिस 1 के प्रक्षेपण के बाद से तीन साल से अधिक समय बीत चुका है। उस समय आर्टेमिस 1 कैप्सूल में कोई भी मनुष्य सवार नहीं था। उसमें जीवन रक्षक उपकरण और पानी की व्यवस्था करने वाला यंत्र एवं शौचालय जैसी अन्य आवश्यक सुविधाएं मौजूद नहीं थीं। ये प्रणालियां आर्टेमिस 2 के जरिए अंतरिक्ष में पहली बार इस्तेमाल हो रही हैं, जिससे जोखिम बढ़ गया है। यही वजह है कि नासा वाइजमैन और उनके दल को चांद की ओर चार दिन की यात्रा और चार दिन की वापसी यात्रा पर भेजने से पहले पूरा एक दिन इंतजार कर रहा है।

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