अहसानफरामोश है डेनमार्क, लेकर रहेंगे ग्रीनलैंड; ट्रंप ने यूरोप को ललकारा: दावोस भाषण की 10 बड़ी बातें
Trump Davos Speech Highlights: ट्रंप की दावोस की यह तीसरी यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी सहयोगी ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की उनकी महत्वाकांक्षा को लेकर चिंतित हैं, जबकि लातिन अमेरिका वेनेजुएला के तेल पर कब्जा करने के उनके प्रयासों से जूझ रहा है।

Trump Davos Speech Highlights: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विटजरलैंड के शहर दावोस में बुधवार को विश्व आर्थिक मंच की बैठक में अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि वह ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए बल का प्रयोग नहीं करेंगे। लगभग 70 मिनट तक दुनिया भर के नेताओं, व्यापार प्रतिनिधियों और मीडिया के सामने अपने भाषण में ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अपने जोरदार रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि अमेरिका एकमात्र राष्ट्र है, जो ग्रीनलैंड को सुरक्षित कर सकता है।
इसके साथ ही उन्होंने यूरोप, NATO और वैश्विक राजनीति पर भी तीखे शब्द कहे। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका तेजी से तरक्की कर रहा है, लेकिन यूरोप ‘‘सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है।’’ ट्रंप ने उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) में सहयोगी डेनमार्क से ग्रीनलैंड का नियंत्रण हासिल करने की इच्छा जताई है। उनकी यह महत्वाकांक्षा अमेरिका के कई करीबी सहयोगियों के साथ संबंधों को खराब करने का खतरा पैदा कर रही है। उन्होंने बार-बार दोहराया कि ग्रीनलैंड को नियंत्रित करने के लिए अमेरिका सबसे अच्छी स्थिति में है। उन्होंने इस विचार का विरोध करने के लिए यूरोप के अधिकांश देशों का उपहास किया।
ग्रीनलैंड पर अमेरिका का दावा
ट्रंप ने दोबारा जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए सबसे बेहतर सुरक्षित विकल्प है और कोई भी देश इसे अच्छी तरह सुरक्षित नहीं रख सकता, सिवाय अमेरिका के। उन्होंने इसे NATO के लिए भी फायदेमंद बताया। उन्होंने कहा, “अमेरिका ही एकमात्र राष्ट्र है जो ग्रीनलैंड को सुरक्षित कर सकता है।”
सैन्य बल का उपयोग नहीं
ग्रीनलैंड को लेकर उन्होंने तुरंत वार्ता (immediate negotiations) का आह्वान किया लेकिन स्पष्ट किया कि वह सैन्य बल का उपयोग नहीं करेंगे। ट्रंप ने कहा, “मैं बल का उपयोग नहीं करना चाहता… मैं बल का उपयोग नहीं करूंगा।”
अहसानफरामोश है डेनमार्क
उन्होंने डेनमार्क को अहसानफरामोश बताया और कहा कि उसने ग्रीनलैंड को सौंपने से इनकार कर दिया, जबकि द्वितीय विश्व युद्ध में अमेरिका ने डेनमार्क की रक्षा की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध में डेनमार्क जर्मनी के हाथों चला गया था, तब छह घंटे के युद्ध के बाद भी वह न तो खुद अपने को बचा पा रहा था और न ही ग्रीनलैंड को, तब अमेरिका आगे आया था और ग्रीनलैंड को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी।
हम कितने बेवकूफ थे...
ट्रंप ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब हमने ग्रीनलैंड को बचाया और डेनमार्क को सौंप दिया, तब हम एक शक्तिशाली थे, लेकिन अब हम उससे कहीं अधिक शक्तिशाली हैं। हालांकि,ट्रंप ने ये भी कहा कि हम कितने बेवकूफ थे कि हम डेनमार्क को बचाने की कोशिश करते रहे। हमने डेनमार्क के लिए ग्रीनलैंड में अपने मिलिट्री बेस भी बनाए, दुश्मनों को अपने गोलार्ध में पैर जमाने से रोका भी और युद्ध जीतने के बाद हमने जर्मनी और जापान से बात की और ग्रीनलैंड को वापस डेनमार्क को दिलाया लेकिन डेनमार्क कृत्घन निकला। उसे तो हमारा आभारी होना चाहिए था।
EU और NATO पर कटाक्ष
ट्रंप ने यूरोप को आड़े हाथों लिया और कहा कि यूरोप सही दिशा में नहीं जा रहा है। उन्होंने कहा कि यूरोप के कई हिस्से “पहचानने योग्य नहीं रहे। उन्होंने NATO से सवाल किया कि क्या वह अमेरिका के लिए खड़ा रहेगा, जबकि अमेरिका हमेशा से उसके लिए 100% खड़ा रहा है। उनका कहना था कि अमेरिका ने NATO को बहुत कुछ दिया लेकिन उससे उतना समर्थन नहीं मिला जितने कि उम्मीद थी।
अंतरराष्ट्रीय टिप्पणियाँ
ट्रंप ने यूक्रेन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अमेरिका और यूरोप के बीच एक बड़ा सुंदर महासागर है, इसलिए अमेरिका का इससे कोई लेना-देना नहीं है। ट्रंप की इस बात से यह संकेत मिलता है कि वह यूक्रेन पर अमेरिका की भूमिका को कम करके आंक रहे हैं।
कनाडा पर बरसे ट्रंप
ट्रंप ने कनाडा को भी चेतावनी दी कि उसे अमेरिका के प्रति अधिक “आभारी” होना चाहिए, और उल्लेख किया कि कनाडाई नेता मार्क कार्नी पहले उतने आभारी नहीं रहे। ट्रंप ने वेनेज़ुएला के मिशन का समर्थन किया और कहा कि अधिक देशों को ऐसे “कदम उठाने चाहिए।”
अमेरिकी घरेलू मुद्दों पर गिनाईं उपलब्धियाँ
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनके शासनकाल में अमेरिका में आर्थिक चमत्कार हुआ है। उन्होंने कहा कि उनके शासनकाल में हासिल उपलब्धियों ने आलोचकों को गलत साबित किया है, जिन्होंने टैरिफ और संघीय कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर छंटनी को नकारात्मक बताया था। उन्होंने 2020 चुनाव से जुड़े पुराने रुख पर भी बोलते हुए कहा कि “लोग जल्द ही अभियुक्त होंगे”।

अमेरिका दुनिया का आर्थिक इंजन
ट्रंप ने कहा कि आज की तारीख में अमेरिकी अर्थव्यवस्था इतिहास के सबसे निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। उन्होंने कहा कि अब हम दुनिया के आर्थिक इंजन हैं। अगर हम बुरी स्थिति में पहुंचे तो दुनिया की सेहत भी बिगड़ जाएगी। उन्होंने कहा कि हमने कई ऐतिहासिक ट्रेड डील की हैं। यूरोपीय नेशन, जापान, साउथ कोरिया हमारे साझेदार हैं और जो भी देश हमसे डील कर रहे हैं, उनका बाजार ऊपर जा रहा है।
ऊर्जा पर तीखी टिप्पणी
ट्रंप ने ग्रीन एनर्जी, विशेषकर विंडमिल्लों (पवन टर्बाइनों) पर कई तीखी टिप्पणियाँ कीं। उन्होंने कहा कि पवन ऊर्जा ने यूरोप को नुकसान पहुँचाया है और चीन में उनकी उपयोगिता कम रही है। हालांकि, यह तथ्यात्मक रूप से विवादित है। बता दें कि राष्ट्रपति के रूप में ट्रंप की ये तीसरी दावोस यात्रा है, जो ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी सहयोगी ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की उनकी महत्वाकांक्षा को लेकर चिंतित हैं, जबकि लातिन अमेरिका वेनेजुएला के तेल पर कब्जा करने के उनके प्रयासों से जूझ रहा है।
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