हिमाचल में 31 मई से पहले होंगे पंचायत चुनाव, रोस्टर में बदलाव के प्रावधान पर हंगामा
हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनाव 31 मई तक कराने की घोषणा हुई है। सीएम सुक्खू ने बताया कि रोस्टर में विसंगतियां दूर करने के लिए उपायुक्तों को 5 फीसदी बदलाव की शक्ति दी गई है।

हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव 31 मई से पहले करवाए जाएंगे। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को विधानसभा में यह घोषणा करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य तय समय सीमा के भीतर चुनाव करवाने का है। उन्होंने कहा कि यदि कोई कानूनी अड़चन सामने आती है तो स्थिति अलग हो सकती है, लेकिन सरकार की पूरी कोशिश 31 मई तक चुनाव कराने की है।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पंचायत चुनावों में आरक्षण रोस्टर में 5 प्रतिशत तक बदलाव करने की शक्तियां उपायुक्तों को जनहित में दी गई हैं। उन्होंने कहा कि संविधान और पंचायती राज अधिनियम सरकार को यह अधिकार देते हैं और 73वें संविधान संशोधन के तहत भी सरकार को रोस्टर लागू करने की शक्ति प्राप्त है।
रोस्टर बदलाव को बताया जरूरी
मुख्यमंत्री ने सदन में बताया कि वर्ष 2010 में ओबीसी वर्ग के लिए जो आरक्षण लागू किया गया था, वह वर्ष 1990–95 के सर्वेक्षण और उस समय की जनगणना के आधार पर था। उन्होंने कहा कि कई पंचायतों में ओबीसी आरक्षण तो लागू है, लेकिन वहां ओबीसी की आबादी ही नहीं है। इससे अन्य वर्ग प्रभावित हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार ऐसी स्थितियों को सुधारने के लिए उपायुक्तों को 5 प्रतिशत तक रोस्टर में बदलाव की शक्ति दी गई है जिससे सभी वर्गों के साथ न्याय हो सके। उन्होंने कहा कि सरकार वर्षों से चली आ रही व्यवस्था में सुधार करना चाहती है और यह कदम उसी दिशा में उठाया गया है।
चुनाव सर्दियों या अप्रैल में कराने को बताया अव्यावहारिक
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सर्दियों के मौसम में पंचायत चुनाव करवाना ठीक नहीं होता, क्योंकि उस समय मौसम प्रतिकूल रहता है और स्कूलों के अध्यापकों की चुनाव ड्यूटी लगने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि अप्रैल में भी चुनाव कराना व्यावहारिक नहीं था। सरकार मई महीने में चुनाव करवाना चाहती थी और सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी दिशा में सुझाव दिया था।
उन्होंने यह भी कहा कि जहां किसी पंचायत में विशेष वर्ग की आबादी नहीं होगी, वहां उपायुक्त रोस्टर में बदलाव कर सकेंगे। चुनाव वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर ही करवाए जा रहे हैं।
रोस्टर बदलाव के अधिकार पर हंगामा
उधर, पंचायत चुनाव प्रक्रिया के तहत उपायुक्तों को रोस्टर में 5 प्रतिशत बदलाव की शक्ति देने के फैसले को लेकर विधानसभा में विपक्ष ने जोरदार विरोध किया। भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने इस मुद्दे पर नियम 67 के तहत काम रोको प्रस्ताव दिया। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि प्रस्ताव पर प्रश्नकाल के बाद निर्णय लिया जाएगा कि इसे स्वीकार करना है या नहीं।
इस पर विपक्षी विधायक सहमत नहीं हुए और प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार करने की मांग करते हुए सदन में हंगामा करने लगे। स्थिति को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही साढ़े 11 बजे तक स्थगित कर दी।
सरकार ने जनहित में बताया फैसला, विपक्ष का वॉकआउट
बाद में सदन की कार्यवाही शुरू होने पर रणधीर शर्मा को बोलने का मौका दिया गया। इसके बाद राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर और अंत में मुख्यमंत्री ने सरकार का पक्ष रखा। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है और यह फैसला जनहित में लिया गया है, इसलिए नियम 67 के तहत स्थगन प्रस्ताव स्वीकार करना जरूरी नहीं है क्योंकि ऐसी कोई आपात स्थिति नहीं है जिसमें सदन का पूरा काम रोका जाए।
इस फैसले से नाराज होकर विपक्षी भाजपा विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। उनके वॉकआउट के कारण प्रश्नकाल में सवाल नहीं हो सके और बाद की चर्चा में भी विपक्ष शामिल नहीं हुआ। इसके चलते सदन की कार्यवाही दोपहर करीब साढ़े 12 बजे ही समाप्त करनी पड़ी। इस दौरान सरकार ने कुछ विधेयक सदन में पेश किए और एक विधेयक बिना चर्चा के ही पारित कर दिया गया।
रिपोर्ट- यूके शर्मा
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