पेट में दर्द हुआ तो 16 साल की लड़की निकली गर्भवती, शिमला में नाबालिग लड़के पर रेप करने का आरोप
Shimla rape case: दुष्कर्म की शिकार पीड़िता जब गर्भवती निकली, तो इस घटनाक्रम का खुलासा हुआ। पीड़िता के गर्भवती पाए जाने के बाद परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने एक युवक के खिलाफ मामला दर्ज किया है। चौंकाने वाली बात ये है कि इस घिनौनी वारदात को अंजाम देने वाला आरोपित भी नाबालिग है।

Shimla rape case: शिमला जिले के रामपुर उपमण्डल में एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। दुष्कर्म की शिकार पीड़िता जब गर्भवती निकली, तो इस घटनाक्रम का खुलासा हुआ। पीड़िता के गर्भवती पाए जाने के बाद परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने एक युवक के खिलाफ मामला दर्ज किया है। चौंकाने वाली बात ये है कि इस घिनौनी वारदात को अंजाम देने वाला आरोपित भी नाबालिग है।
लड़के ने नाबालिग लड़की का बहलाकर किया रेप
पीड़िता के पिता ने थाना रामपुर में आरोपी युवक के विरुद्ध शिकायत दी है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि एक लड़के ने उनकी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर उसके साथ गलत काम किया और उसे गर्भवती बना दिया। इस पर पुलिस ने रामपुर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 65(1) और पोक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत एफआईआर दर्ज की है।
लड़की के पेट में दर्द हुआ, तो पता चला कि वो गर्भवती है
मामले के अनुसार पीड़िता अपनी बड़ी बहन के साथ किराए के कमरे में रह रही थी। आरोपित भी अलग से किराए के कमरे में रहता था। दोनों के बीच बातचीत थी और आरोपित का पीड़िता से मिलना-जुलना होता था। इसी का फायदा उठाकर आरोपित ने बहला-फुसला कर पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। मंगलवार की सुबह जब लड़की को पेट में तेज दर्द होने लगा, तब परिजन उसे इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि लड़की नौ महीने की गर्भवती है। इसके बाद परिजनों के होश उड़ गए और पुलिस में मामला दर्ज करवाया गया।
पीड़िता और आरोपित दोनों नाबालिग हैं
पुलिस के मुताबिक आरोपित के विरुद्ध जुविनाइल जस्टिस एक्ट (किशोर न्याय अधिनियम, 2015 जेजे एक्ट) के तहत कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। चूंकि पीड़िता व आरोपित दोनों नाबालिग हैं और मामला बाल यौन शोषण से जुड़ा है, इसलिए पुलिस पीड़िता की सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखते हुए ज्यादा जानकारी सार्वजनिक करने से बच रही है। बहरहाल, इस पूरे मामले में पुलिस द्वारा कानून के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है।
पोक्सो एक्ट क्या कहता है?
यह कानून बच्चों (18 वर्ष से कम) को यौन अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया है। इसमें छेड़छाड़, उत्पीड़न, अश्लील सामग्री और बलात्कार जैसे अपराधों के लिए सख्त सजा का प्रावधान है। साथ ही बच्चों के लिए संवेदनशील जांच और ट्रायल प्रक्रिया सुनिश्चित की गई है।
जुविनाइल जस्टिस एक्ट क्या कहता है?
यह कानून अपराध करने वाले नाबालिगों और देखरेख व संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों के लिए है। इसमें सुधारात्मक न्याय पर जोर दिया गया है, सजा के बजाय पुनर्वास की व्यवस्था की जाती है। गंभीर अपराधों में 16-18 आयु वर्ग के लिए विशेष प्रावधान भी शामिल हैं।
रिपोर्ट :यूके शर्मा
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