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हिमाचल में गरीबों का भी होगा पक्का मकान, 27715 परिवारों को घर देगी सुक्खू सरकार

पक्के मकान के बिना रह रहे हिमाचल प्रदेश के सबसे गरीब परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश की सुक्खू सरकार ने ऐसे अतिनिर्धन परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध करवाने का फैसला लिया है, जो वर्षों से कच्चे घरों में रहने को मजबूर हैं।

Fri, 9 Jan 2026 07:32 PMSubodh Kumar Mishra लाइव हिन्दुस्तान, शिमला
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हिमाचल में गरीबों का भी होगा पक्का मकान, 27715 परिवारों को घर देगी सुक्खू सरकार

पक्के मकान के बिना रह रहे हिमाचल प्रदेश के सबसे गरीब परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश की सुक्खू सरकार ने ऐसे अतिनिर्धन परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध करवाने का फैसला लिया है जो वर्षों से कच्चे घरों में रहने को मजबूर हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि पहले चरण में 27,715 ऐसे परिवारों को चिह्नित किया गया है। इन्हें सरकारी योजनाओं के बावजूद अब तक पक्का मकान नहीं मिल पाया।

मुख्यमंत्री ने यह बात शुक्रवार को शिमला में पंचायती राज विभाग की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। उन्होंने कहा कि सुरक्षित आवास एक जरूरत के साथ हर नागरिक का सामाजिक अधिकार है और सरकार इसे सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठा रही है।

20 वर्षों से सूची में, अब तक मकान नहीं मिला

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा कराए गए सर्वेक्षण के अनुसार, ये 27,715 परिवार पिछले करीब 20 वर्षों से आईआरडीपी सूची में शामिल हैं, लेकिन उन्हें आज तक पक्के मकान की सुविधा नहीं मिल सकी। सर्वेक्षण के पहले चरण में 50 हजार रुपए वार्षिक आय सीमा तय की गई थी और उन परिवारों को शामिल नहीं किया गया, जिनके पास पहले से पक्का मकान है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सर्वेक्षण के दूसरे चरण में दायरे को और व्यापक किया गया। इस चरण में उन परिवारों को भी शामिल किया गया, जिनके पास पहले से पक्का मकान है। लेकिन वे अत्यंत गरीबी की स्थिति में जीवन यापन कर रहे हैं। इसके बाद 35,355 अतिरिक्त परिवार अतिनिर्धन श्रेणी में जोड़े गए हैं। इस तरह अब प्रदेश में अतिनिर्धन परिवारों की कुल संख्या 63,070 हो गई है।

पात्र परिवार आईआरडीपी से बाहर नहीं रहेगा

सुक्खू ने कहा कि यह प्रक्रिया यहीं नहीं रुकेगी। तीसरे चरण में अनाथ, दिव्यांग और विधवा परिवारों को भी इस श्रेणी में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा चौथे और पांचवें चरण में भी सर्वेक्षण किया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र गरीब परिवार इस योजना से वंचित न रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया को हर चरण में और उदार बनाया जा रहा है और मापदंडों में आवश्यक छूट दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि कोई भी पात्र परिवार आईआरडीपी से बाहर नहीं रहेगा।

बैठक में मुख्यमंत्री ने पंचायती राज विभाग को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभाग में लंबे समय से खाली पड़े पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाएगा। पंचायतों में कनिष्ठ अभियंताओं के पद भी शीघ्र भरे जाएंगे, ताकि विकास कार्यों को गति मिल सके।

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गरीब परिवारों पर विशेष ध्यान

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार सामाजिक अधिकारिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। समाज के कमजोर, वंचित और उपेक्षित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई जनकल्याणकारी योजनाएं लागू की जा रही हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल मकान बनाकर देना नहीं है बल्कि गरीब परिवारों को सम्मानजनक जीवन स्तर उपलब्ध करवाना है। इसके लिए मूलभूत सुविधाएं, स्वच्छता, पेयजल और आजीविका के अवसरों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

लापरवाही या देरी को बर्दाश्त नहीं

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही या देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जनहित है और समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना ही ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की असली भावना है।

रिपोर्ट : यूके शर्मा

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