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हिमाचल में सेवा विस्तार और पुनर्नियुक्ति पर रोक; नए चेहरों को मौका, सुक्खू सरकार का फैसला

हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों के सेवा विस्तार और पुनर्नियुक्ति पर पूर्ण रोक लगा दी है। अब किसी भी विभाग का ऐसा प्रस्ताव स्वीकार नहीं होगा और कार्यरत कर्मी अवधि पूरी होते ही रिटायर हो जाएंगे।

Tue, 7 April 2026 06:21 PMKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, शिमला
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हिमाचल में सेवा विस्तार और पुनर्नियुक्ति पर रोक; नए चेहरों को मौका, सुक्खू सरकार का फैसला

हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा और सख्त फैसला लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब प्रदेश में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को सेवा विस्तार, पुनर्नियुक्ति या दोबारा अनुबंध पर रखने के प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए जाएंगे। सरकार के इस फैसले को वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

सरकार को नहीं भेजा जाएगा प्रस्ताव

इस संबंध में मुख्य सचिव की ओर से सभी प्रशासनिक सचिवों को निर्देश जारी किए गए हैं। जारी आदेश में कहा गया है कि अब से किसी भी विभाग की ओर से किसी अधिकारी या कर्मचारी को सेवा विस्तार, पुनर्नियुक्ति या पुनः नियुक्त करने से जुड़ा कोई प्रस्ताव सरकार को नहीं भेजा जाएगा।

सभी विभागों को निर्देश

साथ ही स्पष्ट किया गया है कि यदि ऐसे प्रस्ताव भेजे भी जाते हैं, तो उन्हें किसी भी स्तर पर विचार के लिए स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी विभागों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है और इसे अत्यंत जरूरी श्रेणी में रखा गया है।

आगे नहीं दिया जाएगा अतिरिक्त विस्तार

कार्मिक विभाग की ओर से जारी इन निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो अधिकारी या कर्मचारी पहले से सेवा विस्तार, पुनर्नियुक्ति या पुनः नियुक्ति पर कार्यरत हैं, वे अपनी तय अवधि पूरी होने तक ही सेवा में रहेंगे। उनकी अवधि समाप्त होते ही उन्हें स्वतः सेवानिवृत्त माना जाएगा और आगे कोई अतिरिक्त विस्तार नहीं दिया जाएगा।

कड़े फैसले ले रही सरकार

सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब प्रदेश की वित्तीय स्थिति को संतुलित करने के लिए मौजूदा वित्त वर्ष में कई कड़े फैसले लिए जा रहे हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खु द्वारा पेश किए गए राज्य के बजट में भी खर्चों पर नियंत्रण को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई थीं।

मंत्रियों के वेतन पर भी लिया था फैसला

बजट में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन का 50 प्रतिशत से लेकर 3 प्रतिशत तक हिस्सा अगले छह महीनों के लिए स्थगित करने का फैसला लिया गया था। इसे सरकार की वित्तीय अनुशासन की दिशा में एक बड़ी पहल माना गया था।

राज्य की वित्तीय स्थिति पर असर

दरअसल, केंद्र सरकार की ओर से आरडीजी (रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट) समाप्त किए जाने के बाद राज्य की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ा है।

खर्चों में संतुलन के लिए लेने पड़ रहे कड़े फैसले

सरकार का कहना है कि इसी वजह से संसाधनों के बेहतर उपयोग और खर्चों में संतुलन बनाए रखने के लिए कई कठिन लेकिन जरूरी फैसले लेने पड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री पहले ही संकेत दे चुके हैं कि आने वाले समय में भी सरकार वित्तीय सुधार के लिए और कड़े कदम उठा सकती है।

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प्रशासनिक ढांचे में आएगी पारदर्शिता

सरकार का तर्क है कि सेवा विस्तार और पुनर्नियुक्ति की प्रक्रिया को सीमित करने से एक ओर जहां प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता आएगी, वहीं नई पीढ़ी के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अवसर भी बढ़ेंगे। साथ ही इससे सरकारी खर्चों को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।

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मुख्यमंत्री सुक्खु पहले ही कह चुके हैं कि प्रदेश को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार चरणबद्ध तरीके से कई फैसले ले रही है। उनका कहना है कि कठिन फैसले अल्पकाल में चुनौतीपूर्ण जरूर होते हैं, लेकिन लंबे समय में प्रदेश के हित में साबित होंगे।

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रिपोर्ट- यूके शर्मा

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