हिमाचल बजट सत्र की हंगामेदार शुरुआत, राज्यपाल ने 2 मिनट में खत्म किया अभिभाषण, क्या विवाद
हिमाचल प्रदेश में बजट सत्र की शुरुआत हंगामेदार रही। राज्यपाल ने महज दो मिनट के अंदर अभिभाषण खत्म किया। सरकार द्वारा तैयार अभिभाषण के कुछ हिस्सों में केंद्र सरकार और कुछ संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज पर टिप्पणी की गई थी। जिस पर राज्यपाल ने आपत्ति जताई।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत तीखे टकराव के साथ हुई। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल और राज्य सरकार के बीच रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (आरडीजी) को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए। दुर्लभ घटनाक्रम के तहत राज्यपाल ने अपना अभिभाषण महज 2 मिनट 1 सेकंड में समाप्त कर दिया, जबकि सामान्यतः अभिभाषण सरकार की नीतियों और योजनाओं का विस्तृत खाका पेश करता है।
बताया जा रहा है कि सरकार द्वारा तैयार अभिभाषण के कुछ हिस्सों में केंद्र सरकार और कुछ संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज पर टिप्पणी की गई थी। राज्यपाल ने इन अंशों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि दस्तावेज के पृष्ठ 1 से 16 तक की सामग्री “संस्थागत ढांचे” के प्रतिकूल है।
उन्होंने कहा कि वे संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियां नहीं पढ़ सकते। इसके बाद उन्होंने केवल शुरुआती दो पैराग्राफ और अंतिम हिस्सा पढ़ा, जबकि पैरा 3 से 16 में आरडीजी और राज्य की वित्तीय स्थिति का जिक्र था, छोड़ दिए। सदन से बाहर निकलते समय उन्होंने विधायकों से शेष पाठ स्वयं पढ़ने को कहा, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई।
क्या है आरडीजी और क्यों बढ़ा विवाद?
रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (आरडीजी) संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत दी जाने वाली वह अनुदान राशि है, जो राज्य की आय और आवश्यक खर्च के बीच अंतर को पाटने के लिए दी जाती है। हिमाचल प्रदेश के लिए यह अनुदान वित्तीय सहारे की तरह रहा है। लेकिन 16वें वित्त आयोग द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 से आरडीजी बंद करने के निर्णय ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर संकट खड़ा कर दिया है।
मुख्यमंत्री सुक्खू का बयान
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्यपाल के कदम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले भी राज्यपालों ने अभिभाषण के हिस्से नहीं पढ़े हैं। हालांकि, उन्होंने वित्तीय मुद्दे पर सख्त रुख बरकरार रखा। उन्होंने कहा, “यह सरकार का नहीं, राज्य के अधिकार का प्रश्न है। आरडीजी हमारा अधिकार है, राज्य के हक को नुकसान न पहुंचाया जाए।”
वेतन और डीए पर असर
राज्य पहले ही संशोधित वेतन एरियर के करीब 8,500 करोड़ रुपये और महंगाई भत्ता (DA) के 5,000 करोड़ रुपये के भुगतान को लेकर दबाव में है। आरडीजी बंद होने की स्थिति में इन भुगतानों पर अनिश्चितकालीन रोक लग सकती है। बजट सत्र की यह असाधारण शुरुआत संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में विधानसभा में आरडीजी का मुद्दा केंद्र में रहेगा और राज्यपाल-सरकार टकराव की गूंज सियासी बहस को और तीखा करेगी।
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