हिमाचल प्रदेश में कुदरत की दोहरी मार, बर्फबारी के बाद भूकंप के झटके; मंडी में कांपी धरती
हिमाचल प्रदेश में हुई भारी बर्फबारी के बीच शनिवार को भूकंप के हल्के झटकों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी। दोपहर बाद मंडी जिले में भूकंप महसूस किया गया, जिससे कुछ समय के लिए लोगों में दहशत का माहौल बन गया। भूकंप की तीव्रता कम होने से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।

हिमाचल प्रदेश में हुई भारी बर्फबारी के बीच शनिवार को भूकंप के हल्के झटकों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी। दोपहर बाद मंडी जिले में भूकंप महसूस किया गया, जिससे कुछ समय के लिए लोगों में दहशत का माहौल बन गया। हालांकि भूकंप की तीव्रता कम होने के कारण किसी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है।
नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.6 मापी गई। भूकंप का केंद्र मंडी जिले में 31.50 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 77.01 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था। भूकंप के झटके दोपहर 3 बजकर 49 मिनट पर आए और कुछ सेकंड तक महसूस किए गए। मंडी के अलावा आसपास के क्षेत्रों में भी भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। हालांकि प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि कहीं से भी किसी तरह के नुकसान की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है।
हिमाचल प्रदेश में समय-समय पर भूकंप के हल्के झटके महसूस होते रहते हैं। मंडी सहित कई जिलों में पहले भी ऐसे झटके दर्ज किए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। भूकंप विशेषज्ञों के अनुसार हिमाचल प्रदेश भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र में आता है। राज्य का बड़ा हिस्सा पहले जोन-4 और जोन-5 में रखा गया था, जिन्हें उच्च और अत्यधिक जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है। इसी वजह से यहां छोटे-बड़े भूकंप आते रहते हैं।
हाल ही में भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने भूकंप खतरे का नया राष्ट्रीय मानचित्र जारी किया है। इस नए मानचित्र में हिमाचल प्रदेश को उच्चतम भूकंपीय श्रेणी में शामिल किया गया है। नए मानचित्र के अनुसार पूरे राज्य को अब समान रूप से सर्वाधिक जोखिम वाले क्षेत्र में माना गया है। इससे पहले राज्य को जोन-4 और जोन-5 में विभाजित किया गया था, लेकिन नए वैज्ञानिक आकलन के बाद यह भेद समाप्त कर दिया गया है।
पहले के मानचित्र में कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर, मंडी, कुल्लू और किन्नौर के कुछ हिस्सों को जोन-5 में रखा गया था, जबकि शिमला, सोलन, सिरमौर, बिलासपुर, ऊना, लाहौल-स्पीति और किन्नौर के कुछ हिस्से जोन-4 में आते थे। अब पूरे प्रदेश को समान रूप से अधिक जोखिम वाला क्षेत्र माना जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश में भूकंप का खतरा नया नहीं है। वर्ष 1905 में कांगड़ा और चंबा जिलों में आए विनाशकारी भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी, जिसमें दस हजार से अधिक लोगों की जान गई थी। इसके बाद भी प्रदेश में कई छोटे और मध्यम स्तर के भूकंप आ चुके हैं।
रिपोर्ट : यूके शर्मा
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