केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने की गुजरात में UCC बिल पास होने की तारीफ, जानिए क्या बोले?
गुजरात विधानसभा द्वारा समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किए जाने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस कदम की सराहना की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश तुष्टीकरण से नहीं, बल्कि सबके लिए समान कानून से चलना चाहिए।

उत्तराखंड के बाद अब गुजरात समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को गुजरात सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया और इसे भारतीय जनता पार्टी के पुराने संकल्पों में से एक बताया। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री ने कहा देश को तुष्टीकरण के आधार पर नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान कानूनों के आधार पर चलाया जाना चाहिए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर शेयर की अपनी पोस्ट में शाह ने कहा कि देश में हर नागरिक के लिए एक समान कानून हो, यह भारतीय जनता पार्टी का स्थापना के समय से ही संकल्प रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा शासित राज्य सरकारें इस दिशा में लगातार आगे बढ़ रही हैं।
शाह बोले- देश तुष्टीकरण से नहीं चलता
शाह ने लिखा, 'मुझे हर्ष है कि उत्तराखंड के बाद अब गुजरात ने भी UCC (यूनिफॉर्म सिविल कोड) विधेयक पारित करने का ऐतिहासिक कार्य कर अपनी प्रतिबद्धता दर्शाई है। इसके लिए मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई पटेल और इस बिल को समर्थन देने वाले सभी विधायकों को बधाई देता हूं।' आगे उन्होंने लिखा, 'देश तुष्टीकरण के आधार पर नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान कानून से चले, यह हमारी प्राथमिकता भी है और संकल्प भी है।'
मंगलवार को राज्य विधानसभा में पास हुआ UCC बिल
इससे पहले मंगलवार को गुजरात विधानसभा ने UCC बिल पास किया था। इस बिल का मकसद शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों को नियंत्रित करने के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है, चाहे धर्म कोई भी हो। यह विधेयक राज्य विधानसभा में लगभग सात घंटे से ज़्यादा देर तक हुई लंबी बहस के बाद पारित हुआ था।
दो शादियों व बहुविवाह पर भी रोक लगाता है बिल
इस बिल में प्रावधान है कि अगर शादी जबरदस्ती, दबाव या धोखे से की जाती है, तो सात साल तक की जेल हो सकती है। साथ ही, यह दो शादियां और बहुविवाह पर भी रोक लगाता है। यह शादियों और लिव-इन संबंधों का रजिस्ट्रेशन करवाना भी अनिवार्य बनाता है। हालांकि इस विधेयक में आदिवासियों को कई तरह की छूट दी गई हैं।
भाजपा ने इसे समानता सुनिश्चित करने वाला बिल बताया
राज्य की सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने इस बिल की सराहना करते हुए इसे समानता सुनिश्चित करने वाला एक ऐतिहासिक सुधार बताया है, जबकि कांग्रेस ने इसका ज़ोरदार विरोध करते हुए कहा कि यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और मुस्लिम विरोधी है। विपक्षी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के विरोध के बाद भी यह बिल बहुमत से ध्वनि मत से पास हो गया। विपक्षी दलों ने इस बिल को राज्य विधानसभा की प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की है।
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