मुंबई के मेयर ने गुजरात के मुख्यमंत्री से मांगे एशियाई शेर, चिट्ठी लिखकर लगाई गुहार
अधिकारियों ने यह जानकारी दी। तावड़े ने 25 फरवरी को लिखे पत्र में गुजरात सरकार से मुंबई के बायकुला क्षेत्र स्थित वीरमाता जीजाबाई भोसले वनस्पति उद्यान और चिड़ियाघर में दो नर और दो मादा शेरों के स्थानांतरण की सुविधा प्रदान करने का आग्रह किया।

मुंबई की महापौर रितु तावड़े ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को पत्र लिखकर उनकी सरकार से सेवाभाव के तौर पर शहर के चिड़ियाघर के लिए एशियाई शेरों के दो जोड़े उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। तावड़े ने 25 फरवरी को लिखे पत्र में गुजरात सरकार से मुंबई के बायकुला क्षेत्र स्थित वीरमाता जीजाबाई भोसले वनस्पति उद्यान और चिड़ियाघर में दो नर और दो मादा शेरों के स्थानांतरण की सुविधा प्रदान करने का आग्रह किया।
मुंबई के मेयर ने लिखी चिट्ठी
यह चिड़ियाघर रानीबाग के नाम से प्रसिद्ध है। पत्र के अनुसार, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने चिड़ियाघर के आधुनिकीकरण परियोजना का पहला चरण पूरा कर लिया है जिसमें हम्बोल्ट पेंगुइन प्रदर्शनी, आंतरिक उद्यान, टिकट कार्यालय, पशु अस्पताल, संगरोध क्षेत्र और अन्य नागरिक सुविधाएं शामिल हैं। परियोजना के दूसरे चरण के तहत एशियाई शेरों, बाघों, भालू, लकड़बग्घे, तेंदुओं, चित्तीदार हिरणों और पक्षियों सहित कई जानवरों के लिए नए बाड़े तथा आवास बनाए गए हैं।
मेयर ने कहा कि शेरों के बाड़े को विशेष रूप से गुजरात के गिर वन राष्ट्रीय उद्यान के पास स्थित मालधारी बस्तियों की तर्ज पर तैयार किया गया है और इसमें गुफाएं, पानी की सुविधाएं, विश्राम आश्रय, मचान समेत आगंतुकों के लिए कई सुविधाएं हैं। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के दिशानिर्देशों के अनुसार, चिड़ियाघर ने पहले जूनागढ़ के सक्करबाग चिड़ियाघर से विनिमय के आधार पर एशियाई शेर प्राप्त करने का प्रस्ताव दिया था।
एशियाटिक शेर के बारे में जानिए
एशियाटिक शेर शेरों की एक दुर्लभ प्रजाति है, जो मुख्य रूप से भारत के गुजरात राज्य के गिर राष्ट्रीय उद्यान और उसके आसपास के जंगलों में पाई जाती है। यह अफ्रीकी शेर से थोड़ा छोटा होता है और इसकी सबसे बड़ी पहचान पेट के नीचे लटकती त्वचा की तह (belly fold) है। ये झुंड में रहता है, लेकिन इसके झुंड अफ्रीकी शेरों की तुलना में छोटे होते हैं। यह मुख्य रूप से हिरण, नीलगाय और जंगली सूअर जैसे जानवरों का शिकार करता है। कभी समय था जब यह प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई थी, लेकिन संरक्षण प्रयासों की वजह से इसकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है।
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