100 दिन पहले दिमाग में लगाया गया था ‘चिप’, अब सोचकर कंप्यूटर चला सकता है ये इंसान Neuralink Human Trial Update First Brain Chip Patient Shares His 100 Day Experience, Gadgets Hindi News - Hindustan
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100 दिन पहले दिमाग में लगाया गया था ‘चिप’, अब सोचकर कंप्यूटर चला सकता है ये इंसान

Neuralink के पहले ह्यूमन मरीज ने 100 दिनों बाद अपना अनुभव शेयर किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि अब वे सिर्फ सोचकर कंप्यूटर चला सकते हैं। हालांकि, अभी इसमें कई सुधार और बदलाव होने बाकी हैं। 

Tue, 24 March 2026 11:31 AMPranesh Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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100 दिन पहले दिमाग में लगाया गया था ‘चिप’, अब सोचकर कंप्यूटर चला सकता है ये इंसान

अब तक जो नजारे किसी साइंस-फिक्शन फिल्म की कल्पना में देखने को मिल रहे थे, वे हकीकत बन रहे हैं और इंसानी दिमाग सीधे कंप्यूटर से जुड़ रहा है। इंसानी दिमाग और मशीन के बीच सीधा कनेक्शन बनाने का दावा करने वाली एलन मस्क की कंपनी Neuralink ने जब अपने पहले ह्यूमन ट्रायल की शुरुआत की, तो पूरी दुनिया की नजरें इस पर टिक गईं। अब इस प्रयोग के 100 दिन पूरे होने के बाद, इसके पहले मरीज Noland Arbaugh ने अपना अनुभव शेयर किया है।

नोलैंड आर्बॉ एक गंभीर दुर्घटना के बाद गर्दन के नीचे से पूरी तरह पैरालाइज्ड हो चुके थे, उनके दिमाग में न्यूरालिंक चिप फिट हुए 100 दिन बीत चुके हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 100 दिनों में उनकी जिंदगी में ऐसा बदलाव आया है, जिसे शब्दों में पूरी तरह बता पाना मुश्किल है। उनका कहना है कि अब वे इस चिप के बिना अपनी जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर सकते। इसकी मदद से वे कई काम आसानी से कर पा रहे हैं।

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केवल सोचकर चला सकते हैं कंप्यूटर

चिप की मदद से नोलैंड अब सिर्फ सोचकर कंप्यूटर का कर्सर मूव कर सकते हैं, टाइप कर सकते हैं और इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकते हैं। खास बात यह है कि उन्होंने ऑनलाइन गेम्स खेलकर भी दिखाया, जिससे यह साबित होता है कि यह टेक केवल बेसिक कम्युनिकेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि मनोरंजन और डिजिटल इंटरैक्शन भी संभव हो सकता है। यह सब कुछ उनके दिमाग से निकलने वाले न्यूरल सिग्नल्स को रीड करते हुए संभव हो रहा है, जिन्हें चिप डिजिटल कमांड में बदल देती है।

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शुरुआत में सामने आईं कई दिक्कतें

हालांकि, इस पूरी कहानी में सिर्फ सकारात्मक पहलू ही नहीं हैं। टेक अभी शुरुआती दौर में है और इसमें कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। शुरुआती दिनों में चिप के कुछ इलेक्ट्रोड ढीले पड़ गए थे, जिससे सिस्टम के काम करने की क्षमता पर असर पड़ा। हालांकि, कंपनी ने सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए इस दिक्कत को काफी हद तक ठीक कर लिया। इसके बावजूद, यह साफ है कि इस चिप को पूरी तरह भरोसेमंद बनने में अभी वक्त लगेगा।

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सीधे मशीनों से जुड़ जाएगा इंसान

फिर भी, इन 100 दिनों के अनुभव ने यह साबित कर दिया है कि भविष्य अब कल्पना नहीं, बल्कि हकीकत बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। Neuralink का यह प्रयोग ना केवल मेडिकल साइंस में क्रांति ला सकता है, बल्कि यह इंसान और मशीन के रिश्ते को भी पूरी तरह बदल सकता है। आने वाले समय में यह तकनीक उन लाखों लोगों के लिए उम्मीद ला सकती है, जो पैरालिसिस या अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जूझ रहे हैं।

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