Who is Bagher Ghalibaf laid down a major condition for ceasefire before US कौन हैं बाकिर गालिबाफ? US के सामने रख दी बड़ी शर्त, इजरायल ने हाल ही में हिट लिस्ट से हटाया, Explainer Hindi News - Hindustan
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कौन हैं बाकिर गालिबाफ? US के सामने रख दी बड़ी शर्त, इजरायल ने हाल ही में हिट लिस्ट से हटाया

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस इस्लामाबाद के लिए रवाना हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने भी कड़े तेवर दिखाए हैं। वेंस ने स्पष्ट किया है कि अगर ईरान गेम खेल रहा है, तो अमेरिका उसकी शर्तों के प्रति उदार नहीं रहेगा।

Sat, 11 April 2026 06:41 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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कौन हैं बाकिर गालिबाफ? US के सामने रख दी बड़ी शर्त, इजरायल ने हाल ही में हिट लिस्ट से हटाया

Iran-US Ceasefire: पाकिस्तान की राजधानी इस समय पूरी दुनिया की कूटनीतिक नजरों का केंद्र बनी हुई है। 'इस्लामाबाद टॉक्स 2026' के नाम से होने जा रही इस बैठक में वह होने वाला है, जिसकी कल्पना कुछ समय पहले तक असंभव थी। दशकों से एक-दूसरे के जानी दुश्मन रहे अमेरिका और ईरान मेज के आमने-सामने बैठने जा रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या ईरान की संसद के अध्यक्ष और कट्टरपंथी माने जाने वाले मोहम्मद बाकिर गालिबाफ इस कठिन डगर पर चल पाएंगे? आपको बता दें कि हाल ही में इजरायल ने बाकिर को अपनी हिट लिस्ट से हटाया है, ताकि वह वार्ता में शामिल हो सकें।

शनिवार को होने वाली इस ऐतिहासिक बातचीत से ठीक पहले गालिबाफ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक बयान जारी कर पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। उन्होंने साफ कर दिया है कि ईरान केवल बातों से नहीं पिघलेगा। गालिबाफ ने दो टूक शब्दों में मांग रखी है। ईरान का कहना है कि जब तक लेबनान पर इजरायली हमले नहीं रुकते, तब तक वार्ता की मेज का कोई अर्थ नहीं है। ईरान चाहता है कि बातचीत शुरू होने से पहले उसकी रोकी गई अंतरराष्ट्रीय संपत्ति को जारी किया जाए। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस इस्लामाबाद के लिए रवाना हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने भी कड़े तेवर दिखाए हैं। वेंस ने स्पष्ट किया है कि अगर ईरान गेम खेल रहा है, तो अमेरिका उसकी शर्तों के प्रति उदार नहीं रहेगा।

कौन हैं बाकिर गालिबाफ?

ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे बाकिर गालिबाफ कोई साधारण राजनेता नहीं हैं। वह विचारधारा से कट्टरपंथी हैं लेकिन काम करने के तरीके में बेहद व्यावहारिक। 1961 में मशहद के पास जन्मे गालिबाफ की पहचान ईरान-इराक युद्ध के एक जांबाज सिपाही के तौर पर रही है। उन्होंने 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) में अपनी सेवाएं दीं, जो आज भी उनकी असली ताकत है।

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उनकी तुलना अक्सर ईरान के आधुनिकीकरण के जनक 'रजा शाह' से की जाती है। जिस तरह रजा शाह ने लोहे के हाथ से ईरान का चेहरा बदला था, गालिबाफ ने भी तेहरान के मेयर (2005-17) रहते हुए वहां की सड़कों, मेट्रो और बुनियादी ढांचे का कायाकल्प कर दिया था। उनके समर्थक उन्हें एक ऐसे 'सैनिक-प्रशासक' के रूप में देखते हैं जो युद्ध लड़ना भी जानता है और देश बनाना भी।

छह हफ्ते का भीषण युद्ध

बीते 28 फरवरी से शुरू हुआ अमेरिका-इजरायल और ईरान का युद्ध अब एक नाजुक मोड़ पर है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत सहित दुनिया के कई देशों ने इस संघर्ष को 'T20 मैच' की तरह देखा और जल्दबाजी में ईरान को विजेता घोषित कर दिया। लेकिन असलियत इसके उलट है। छह हफ्तों के भीषण हमलों ने ईरान को गहरा जख्म दिया है। कई शीर्ष नेताओं की मौत और सैन्य ठिकानों को हुए नुकसान के बाद तेहरान अब समझ चुका है कि 'शांति जीतना' युद्ध जीतने से कहीं ज्यादा जरूरी है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित दो हफ्ते का यह युद्धविराम ईरान के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को ढहने से बचाने का एक आखिरी मौका हो सकता है।

इस्लामाबाद में 'रेड जोन'

इस्लामाबाद इस समय एक किले में तब्दील हो चुका है। पूरे शहर को 'रेड जोन' घोषित कर दिया गया है। पाकिस्तान ने इस बैठक की गंभीरता को देखते हुए सभी प्रतिनिधियों और पत्रकारों के लिए 'वीजा-ऑन-अराइवल' की सुविधा दी है। लेकिन कूटनीति के गलियारों में सस्पेंस गहरा है। क्या ट्रंप प्रशासन गालिबाफ पर भरोसा करेगा? दिलचस्प बात यह है कि हालिया इजरायली हमलों में गालिबाफ को निशाना नहीं बनाया गया, जिससे यह अटकलें तेज हैं कि अमेरिका उन्हें एक विश्वसनीय वार्ताकार के रूप में देख रहा है। हालांकि, ईरान के भीतर अमेरिका का पसंदीदा कहलाना किसी गाली से कम नहीं है और गालिबाफ को इस धारणा से भी लड़ना होगा।

क्या होगा अगर डील फेल हुई?

गालिबाफ के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उन्हें अमेरिका से प्रतिबंधों में राहत दिलानी है ताकि ईरान की दम तोड़ती अर्थव्यवस्था को सांस मिल सके और दूसरी तरफ उन्हें अपने देश के भीतर उन कट्टरपंथियों को जवाब देना है जो अमेरिका को 'महान शैतान' मानते हैं। यदि गालिबाफ लेबनान में युद्धविराम और आर्थिक राहत हासिल कर लेते हैं, तो वह ईरान के सबसे कद्दावर नेता बनकर उभरेंगे। लेकिन अगर यह बातचीत विफल होती है, तो न केवल उनका करियर खत्म हो जाएगा, बल्कि मध्य पूर्व एक ऐसी आग में झुलस सकता है जिसकी लपटें पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेंगी।

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