अमेरिका-इजरायल मिलकर भी नहीं तोड़ पा रहे ईरान का मनोबल, कहां फंसे हैं डोनाल्ड ट्रंप?
ईरान ने रणनीतिक रूप से अमेरिकी बेस को निशाना बनाकर, उनके फ्यूल विमानों पर हमला करके और स्टेट ऑफ होर्मुज को बंद करके अपने नागरिकों को संदेश देने का प्रयास किया है कि वह झुका नहीं है।

Iran War Updates: ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका के हमले रणनीतिक रूप से अलग-अलग मकसद को साधने के लिए किए जा रहे हैं। एक तरफ ईरान की क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। दूसरी तरफ ईरान जिन ठिकानों का इस्तेमाल इजरायल के खिलाफ करता है उन्हें भी निशाना बनाकर हमेशा के लिए खत्म करने की कोशिश हो रही है। विशेषज्ञों की माने तो ईरान का मनोबल तोड़ना अमेरिका-इजरायल के लिए बड़ी चुनौती है।
लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी का कहना है कि अगले एक हफ्ते काफी निर्णायक होने वाले हैं। ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर, रिफाइनरी, मिसाइल निर्माण के स्थानों, लांचिंग पैड को निशाना बनाने के बाद भी अमेरिका और इजरायल ईरान का मनोबल नहीं तोड़ पाए। लेफ्टिनेंट जनरल का कहना है, इजरायल का इस समय खास मकसद तेहरान में बड़े हमलों के साथ लेबनान को पूरी तरह ध्वस्त करना है।
ट्रंप के लिए पीछे हटने का मौका नहीं
कुलकर्णी के मुताबिक, इजरायल मौजूदा युद्ध को अभी नहीं तो कभी नहीं के रूप में देख रहा है। लिहाजा वे अपने लिए हर खतरे को पूरी तरह खत्म कर देना चाहता है। अमेरिका के लिए अब पीछे हटने का मौका नहीं है। लिहाजा अगले एक हफ्ते में वह ईरान की बची खुची सामरिक ताकत खत्म करने के लिहाज से अपने घातक हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है और वह चाहेगा कि ईरान का मनोबल खत्म किया जाए।
मोजतबा अपने लोगों को एकजुट रखने में जुटे
ईरान ने रणनीतिक रूप से अमेरिकी बेस को निशाना बनाकर, उनके फ्यूल विमानों पर हमला करके और स्टेट ऑफ होर्मुज को बंद करके अपने नागरिकों को संदेश देने का प्रयास किया है कि वह झुका नहीं है। यह उसी मनोबल को बनाये रखने का प्रयास है जो अमेरिका और इजरायल अपने हमलों से तोड़ना चाहते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान का एयर डिफेंस खत्म हो चुका है। मिसाइल क्षमता को भी बहुत चोट पहुंची है। अमेरिका ने दस हजार टारगेट को अब तक निशाना बनाया है। अमेरिकी हमले तेहरान में इजरायल से ज्यादा घातक हैं। तेहरान में करीब 25 हजार घर ध्वस्त हो चुके हैं। वहां करीब 20-25 फीसदी लोग पलायन कर चुके हैं। अमेरिकी मदर बम का इस्तेमाल ईरान की मिसाइल फैक्ट्री पर हुए हैं जिससे आसपास के पूरे इलाकों को नुकसान पहुंचे और उनकी निर्माण क्षमता को पूरी तरह खत्म किया जाए। अमेरिका और इजरायल ईरान की ऊर्जा पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं। संजय कुलकर्णी ने कहा, अब अमेरिका का निशाना स्टेट ऑफ होर्मुज पर आधिपत्य के लिए खर्ग आइलैंड पर कब्जा करने के लिए होगा।
युद्धविराम वार्ता शुरू करने के पक्ष में नहीं है अमेरिका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने मध्य- पूर्व के देशों द्वारा ईरान युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक वार्ता शुरू करने की कोशिशों को ठुकरा दिया है। मामले से जुड़े तीन सूत्रों ने ये जानकारी दी। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि ट्रंप ने वार्ता शुरू करने के प्रयासों को खारिज कर दिया है। ट्रंप का पूरा ध्यान तेहरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए युद्ध जारी रखने पर है। सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी अधिकारी ट्रंप को जल्दी युद्ध खत्म करने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि पेट्रोल की बढ़ती कीमतें ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को सियासी नुकसान पहुंचा सकती हैं, खासकर जब अमेरिका में मध्यावधि चुनाव नजदीक हैं।
ईरानी हमलों को रोकेगा किफायती ‘मेरोप्स ड्रोन’
यूक्रेन के लिए तैयार किए गए किफायती मेरोप्स ड्रोन को अब अमेरिका मध्यपूर्व में इस्तेमाल करने वाला है। ईरान के शाहेद ड्रोन का ये सामना करेंगे। एक ड्रोन की कीमत लगभग 14-15 हजार डॉलर है। ये दुश्मन के ड्रोन को हवा में ही मार गिराते हैं। यूक्रेन में इनका बखूबी इस्तेमाल किया गया है।
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