iran power structure and new leadership after khamenei death irgc full list here सब बड़े नेता मर गए, फिर भी नहीं टूटा ईरान; अब कौन ले रहा है युद्ध के फैसले? पूरी लिस्ट, Explainer Hindi News - Hindustan
More

सब बड़े नेता मर गए, फिर भी नहीं टूटा ईरान; अब कौन ले रहा है युद्ध के फैसले? पूरी लिस्ट

अमेरिका और इजरायल के हमलों में अली खामेनेई और टॉप कमांडरों की मौत के बाद ईरान में सत्ता किसके हाथ में है? जानें ईरान की नई लीडरशिप, मोजतबा खामेनेई और IRGC की भूमिका के बारे में विस्तृत रिपोर्ट।

Fri, 27 March 2026 09:56 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, तेहरान
share
सब बड़े नेता मर गए, फिर भी नहीं टूटा ईरान; अब कौन ले रहा है युद्ध के फैसले? पूरी लिस्ट

ईरान के वयोवृद्ध सुप्रीम लीडर और कई अन्य शीर्ष अधिकारी तथा रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कमांडर अमेरिकी-इजरायली हमलों में मारे जा चुके हैं। इसके बावजूद, 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में ईरान के शासक वर्ग ने रणनीति बनाने और युद्ध संचालन की अपनी क्षमता को बरकरार रखा है। 1979 की क्रांति से जन्मे इस इस्लामिक गणराज्य ने एक बेहद जटिल सत्ता संरचना का निर्माण किया था। यह ढांचा केवल कुछ व्यक्तियों पर निर्भर रहने के बजाय कई स्तरीय संस्थाओं से मिलकर बना है, जो इस धर्मतंत्रीय (थियोक्रेटिक) व्यवस्था के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए काम करता है। कमजोर होने के बावजूद इस लचीली व्यवस्था में अब सत्ता और प्रभाव किसके पास है, आइए विस्तार से समझते हैं।

क्या सुप्रीम लीडर वास्तव में इनचार्ज हैं?

ईरान के वयोवृद्ध सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई इस युद्ध के शुरुआती हमलों में मारे गए थे। 1989 से इस पद पर काबिज खामेनेई को पूरी व्यवस्था में निर्विवाद सत्ता प्राप्त थी और सभी प्रमुख मुद्दों पर अंतिम फैसला उन्हीं का होता था। ईरान की आधिकारिक विचारधारा 'विलायत-ए-फकीह' (इस्लामिक न्यायविद का शासन) के तहत, सर्वोच्च नेता एक विद्वान मौलवी होता है जो शिया इस्लाम के 12वें इमाम (जो नौवीं शताब्दी में गायब हो गए थे) की ओर से लौकिक सत्ता का संचालन करता है।

नया नेतृत्व कौन देख रहा?

खामेनेई के बेटे मोजतबा को यह भूमिका और इससे जुड़ी व्यापक औपचारिक शक्तियां विरासत में मिली हैं, लेकिन उनके पास अपने पिता जैसा स्वत: प्राप्त अधिकार नहीं है। चूंकि वह रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की पसंद हैं इसलिए वे इस कट्टरपंथी सैन्य कोर के प्रति जवाबदेह भी हो सकते हैं। मोजतबा इन हमलों में घायल हो गए थे और स्टेट टीवी पर उन्हें मौजूदा संघर्ष का जानबाज (घायल दिग्गज) कहा गया है। अपनी नियुक्ति के तीन सप्ताह से अधिक समय बाद भी वह किसी तस्वीर या वीडियो में नजर नहीं आए हैं। उन्होंने केवल दो लिखित बयान जारी किए हैं, जिससे उनकी स्थिति को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) की क्या भूमिका है?

गार्ड्स का प्रभाव दशकों से बढ़ रहा है, लेकिन युद्ध के बीच अली खामेनेई की मौत और मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति के बाद उन्होंने रणनीतिक निर्णय लेने में और भी अधिक केंद्रीय भूमिका निभाना शुरू कर दिया है। गार्ड्स ने शीर्ष नेतृत्व के खत्म होने की स्थिति से निपटने के लिए पहले से ही 'मोजेक' (टुकड़ों में बंटा हुआ) संगठनात्मक ढांचा तैयार किया है। इसमें प्रत्येक कमांडर के लिए पहले से ही विकल्प (रिप्लेसमेंट) तय होते हैं और प्रत्येक इकाई निर्धारित योजनाओं के अनुसार स्वतंत्र रूप से काम करने में सक्षम है। शुरुआती हमलों में और पिछले साल के हमलों में कई शीर्ष कमांडरों के मारे जाने के बावजूद, उनकी जगह अनुभवी लोगों ने ले ली है जो अब तक एक जटिल युद्ध को संभालने में सक्षम साबित हुए हैं।

राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका क्या है?

ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में मौलवियों के शासन के साथ-साथ एक निर्वाचित राष्ट्रपति और संसद भी शामिल है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के साथ इस्लामिक गणराज्य को चलाने में इन सभी की महत्वपूर्ण भूमिका है। दिवंगत खामेनेई के मुख्य सलाहकार अली लारीजानी की हत्या शासकों के लिए एक बड़ा झटका थी। उनके पास ईरान के विभिन्न सत्ता केंद्रों के बीच काम करने की क्षमता और बाहरी दुनिया के साथ बातचीत करने का जबरदस्त कौशल था। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के नौसेना प्रमुख अलीरेजा तांगसिरी 2018 से कमांडर थे। अब उनकी भी मौत हो चुकी है। बताया जाता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने में उनकी अहम भूमिका थी। अब बचे हुए प्रमुख राजनीतिक चेहरे पहले मारे गए नेताओं की तुलना में अधिक कट्टरपंथी हो सकते हैं।

अब बचे हुए प्रमुख नाम कौन से हैं?

अहमद वाहिदी (रिवोल्यूशनरी गार्ड्स प्रमुख): अपने दो पूर्ववर्तियों के मारे जाने के बाद इन्हें नियुक्त किया गया है। गार्ड्स में सालों से प्रभावशाली रहे वाहिदी ने ईरान-इराक युद्ध लड़ा, कुद्स फोर्स चलाई, रक्षा मंत्री रहे और आंतरिक असंतोष को कुचलने में मदद की।

इस्माइल कानी (कुद्स फोर्स प्रमुख): 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में कासिम सुलेमानी की मौत के बाद से यह गोपनीय शख्सियत पूरे क्षेत्र में ईरान के प्रॉक्सी और सहयोगियों के साथ संबंधों का प्रबंधन कर रही है।

मोहम्मद बागेर गालिबफ (संसद अध्यक्ष): एक पूर्व रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कमांडर, तेहरान के मेयर और पूर्व राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार गालिबफ संभवतः अभी जीवित सबसे बड़े राजनीतिक दिग्गज हैं। वे हाल के हफ्तों में काफी मुखर रहे हैं और कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका के साथ बातचीत भी कर रहे हैं।

अयातुल्ला गुलामहुसैन मोहसिनी-एजेई (न्यायपालिका प्रमुख): 2009 में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के घातक दमन में अपनी भूमिका के लिए प्रतिबंधित यह पूर्व खुफिया प्रमुख व्यापक रूप से एक कट्टरपंथी माना जाता है।

मसूद पेजेशकियन (राष्ट्रपति): हालांकि ईरान में राष्ट्रपति पद का महत्व पहले से कम हुआ है, लेकिन पेजेशकियन ईरान में सीधे तौर पर निर्वाचित सबसे वरिष्ठ व्यक्ति हैं। हालांकि, हाल ही में गार्ड्स के गुस्से का शिकार होने के बाद उन्हें अपनी टिप्पणियों को वापस लेना पड़ा था, जो उनके सीमित प्रभाव को दर्शाता है। पेजेशकियन ने खाड़ी देशों पर ईरानी हमलों के लिए माफी मांगी थी जिससे रिवोल्यूशनरी गार्ड्स नाराज हो गए थे।

सईद जलीली (पूर्व सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख): ईरान-इराक युद्ध के घायल दिग्गज और ईरानी राजनीति के सबसे कट्टरपंथी चेहरों में से एक। वह 2024 के राष्ट्रपति पद के चुनाव हार गए थे।

अयातुल्ला अलीरेजा अराफी (गार्जियन काउंसिल के सदस्य): यह वरिष्ठ मौलवी गार्जियन काउंसिल (जो चुनाव के उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करती है) का प्रमुख सदस्य है। उन्हें इतना भरोसेमंद माना जाता है कि खामेनेई की मौत के बाद ईरान को चलाने वाली तीन सदस्यीय अंतरिम परिषद में उन्हें चुना गया था।

अब्बास अराघची (विदेश मंत्री): इस वयोवृद्ध राजनयिक ने पश्चिमी दुश्मनों, रूस और चीन (जिनके तेहरान के साथ बेहतर संबंध हैं) और अरब पड़ोसियों के साथ कई अहम वार्ताएं की हैं।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:ईरान संग चुपचाप बड़ा खेल कर रहा चीन, अमेरिकी दावे से हलचल; जंग के बीच ऐसा क्या
ये भी पढ़ें:ईरान के नए सुप्रीम लीडर गे हैं, खुफिया एजेंसी ने बताया; ट्रंप का सनसनीखेज दावा
ये भी पढ़ें:US के एक फैसले से महासंग्राम के आसार, ईरान में 10 लाख नए सैनिक कर रहे इंतजार

बता दें कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ संयुक्त हमले शुरू किए, जिसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की और युद्ध पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल गया। होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व की ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मार्ग है।

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।