Iran Hand on the World Achilles Heel What Happens If Bab-el-Mandeb Is Blocked After Hormuz दुनिया की ‘दुखती रग’ पर ईरान का हाथ, होर्मुज के बाद बाब-अल-मंदाब भी बंद हुआ तो क्या होगा?, Explainer Hindi News - Hindustan
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दुनिया की ‘दुखती रग’ पर ईरान का हाथ, होर्मुज के बाद बाब-अल-मंदाब भी बंद हुआ तो क्या होगा?

Bab-el-Mandeb: सऊदी अरब अपनी पाइपलाइन के जरिए यानबू बंदरगाह तक केवल 50 लाख बैरल प्रतिदिन तेल भेज सकता है, जबकि होर्मुज से वह प्रतिदिन 70 लाख बैरल से ज्यादा तेल भेजता था। यानी वैकल्पिक रास्ता भी पूरी जरूरत को पूरा नहीं कर सकता।

Fri, 27 March 2026 10:14 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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दुनिया की ‘दुखती रग’ पर ईरान का हाथ, होर्मुज के बाद बाब-अल-मंदाब भी बंद हुआ तो क्या होगा?

पिछले चार हफ्तों से दुनिया की नजरें फारस की खाड़ी के एक संकरे समुद्री रास्ते होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर टिकी हैं। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग को लगभग ठप कर दिया है। लेकिन अब संकट और गहरा गया है। खबर आ रही है कि अरब प्रायद्वीप के दूसरी तरफ स्थित एक और रणनीतिक जलमार्ग बाब-अल-मंदाब (Bab al-Mandab) भी युद्ध की लपटों की जद में है। इसे आंसुओं का द्वार (Gate of Tears) भी कहा जाता है। अगर होर्मुज के बाद यह रास्ता भी बंद होता है तो दुनिया एक ऐसे ऊर्जा संकट में फंस सकती है जिसे इतिहास में कभी नहीं देखा गया।

क्यों यह दुनिया के लिए जीवनरेखा है?

होर्मुज जलडमरूमध्य केवल 33 किलोमीटर चौड़ा एक रास्ता है, लेकिन यहां से दुनिया के कुल कच्चे तेल का पांचवां हिस्सा गुजरता है। मार्च की शुरुआत में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सैन्य टकराव के बाद ईरान ने इस रास्ते को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया है। वर्तमान स्थिति यह है कि ईरान केवल अपने मित्र देशों या भारत जैसे तटस्थ देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दे रहा है। इसके बदले में भारी पैसेज फीस वसूल रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, यह वैश्विक तेल बाजार के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी आपूर्ति बाधा है।

क्या है बाब-अल-मंदाब का संकट?

जब होर्मुज बंद हुआ, तो सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के पास एक ही विकल्प बचा था। लाल सागर (Red Sea) के रास्ते व्यापार करना। इसके लिए तेल को पाइपलाइनों के जरिए सऊदी के पश्चिमी तट पर स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुंचाया जाता है और वहां से 'बाब-अल-मंदाब' के जरिए दुनिया के बाकी हिस्सों में भेजा जाता है।

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लेकिन अब ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने धमकी दी है कि वे भी इस युद्ध में पूरी सैन्य ताकत के साथ कूदने को तैयार हैं। ईरान की समाचार एजेंसी तस्नीम ने भी चेतावनी दी है कि वे मंदाब मार्ग के लिए एक विश्वसनीय खतरा पैदा करने में सक्षम हैं। यदि हूती विद्रोही इस रास्ते को निशाना बनाते हैं, तो सऊदी अरब का एकमात्र वैकल्पिक मार्ग भी असुरक्षित हो जाएगा। आपको बता दें कि दोनों रास्ते रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनकी कार्यप्रणाली अलग है।

होर्मुज: यह खाड़ी देशों (सऊदी, कुवैत, यूएई, इराक) के लिए प्राथमिक निर्यात मार्ग है। इसके बंद होने का मतलब है कि दुनिया का मुख्य 'ऑयल पंप' रुक गया है।

बाब-अल-मंदाब: यह लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है। उत्तर में स्वेज नहर के जरिए यूरोप को तेल जाता है, जबकि दक्षिण में भारत और एशिया के अन्य देशों को।

पाइपलाइन की सीमा

सऊदी अरब अपनी पाइपलाइन के जरिए यानबू बंदरगाह तक केवल 50 लाख बैरल प्रतिदिन तेल भेज सकता है, जबकि होर्मुज से वह प्रतिदिन 70 लाख बैरल से ज्यादा तेल भेजता था। यानी वैकल्पिक रास्ता भी पूरी जरूरत को पूरा नहीं कर सकता।

कच्चे तेल की कीमतों पर असर

इस युद्ध और समुद्री रास्तों की घेराबंदी का असर सीधा आपकी जेब पर पड़ रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें $120 प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में 40% अधिक है। यदि बाब-अल-मंदाब भी बंद हो जाता है, तो शिपिंग कंपनियों को पूरे अफ्रीका महाद्वीप का चक्कर लगाकर Cape of Good Hope के रास्ते सामान पहुंचाना होगा। इससे माल ढुलाई का समय और लागत कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे वैश्विक महंगाई चरम पर पहुंच सकती है।

हूती विद्रोही यमन के उस हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं जो बाब-अल-मंदाब के ठीक सामने है। इससे पहले भी 2023-24 में उन्होंने इजरायल-गाजा संघर्ष के दौरान इस रास्ते को ड्रोन और मिसाइलों से बाधित करने की कोशिश की थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने हूतियों को अभी तक रिजर्व में रखा हुआ है। यह ईरान की रणनीतिक धैर्य की नीति का हिस्सा हो सकता है। यदि अमेरिका या इजरायल ईरान पर हमले तेज करते हैं, तो ईरान हूतियों के जरिए लाल सागर को पूरी तरह ब्लॉक करवा सकता है, जिससे पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी।

भारत और दुनिया के लिए इसके मायने?

भारत जैसे देश अपनी तेल जरूरतों के लिए भारी मात्रा में आयात पर निर्भर हैं। उनके लिए यह स्थिति भयावह है। नवी मुंबई जैसे शहरों के पेट्रोल पंपों पर कतारें लगनी शुरू हो गई हैं। अगर दोनों रास्ते बंद होते हैं, तो न केवल तेल बल्कि अनाज और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी बाधित होगी क्योंकि समुद्री बीमा की दरें 4 से 5 गुना बढ़ चुकी हैं।

फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच बातचीत के संकेत तो मिले थे, लेकिन धमकियों का दौर भी जारी है। पाकिस्तान और तुर्की जैसे देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जब तक होर्मुज और बाब-अल-मंदाब सुरक्षित नहीं होते, तब तक वैश्विक बाजार में शांति नहीं लौटेगी। एक विशेषज्ञ ने कहा, "शिपिंग एक ऐसा उद्योग है जहां लोग अराजकता में भी पैसा कमाते हैं, लेकिन इसका खामियाजा अंततः आम उपभोक्ता को ही भुगतना पड़ता है।"

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