कैसे खुलेगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज? अब दुनिया के सामने ये 3 विकल्प; युद्ध खत्म भी हुआ तो भी क्यों नहीं खुलेगा रास्ता
2025 में इस रास्ते से हर दिन लगभग दो करोड़ बैरल कच्चे तेल और तेल उत्पादों की आवाजाही हुई। यह वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत है। भारत के लिए भी यह रास्ता बेहद अहम है।

ईरान और अमेरिका के बीच छिड़े युद्ध के बीच दुनिया के सबसे प्रमुख जलमार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जंग का अखाड़ा बन गया है। दुनिया के लिए तेल आपूर्ति का लाइफलाइन माने जाने वाला यह रास्ता प्रभावी रूप से बंद है जिससे कई देशों में ईंधन संकट पैदा हो गया है। अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से इस रास्ते को फिर से खोलने की मांग की है, और धमकी दी है कि ऐसा ना करने पर अमेरिका सैन्य हमले और तेज कर सकता है। हालांकि ईरान झुकता नजर नहीं आ रहा है। अब सवाल यह हैं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का भविष्य क्या होगा और इसे कैसे फिर से खोला जा सकता है। इसके तीन संभावित कानूनी, भू-राजनीतिक और सैन्य परिदृश्य सामने आते हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के उत्तर में ईरान तो वहीं दक्षिण में ओमान है। इस पर काफी हद तक ईरान का ही कंट्रोल है। वहीं युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने इस रास्ते पर अपनी पकड़ और मजबूत करने की कोशिश की है। इसकी चौड़ाई मात्र 29 समुद्री मील (लगभग 53 किलोमीटर) है और इसमें आने-जाने वाले जहाजों के लिए करीब दो-दो मील चौड़े अलग-अलग चैनल हैं, साथ ही दो मील का एक बफर क्षेत्र भी है। यह पूरा क्षेत्र ईरानी जलक्षेत्र में आता है।
बता दें कि हालांकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह से नौवहन के लिए बंद नहीं हुआ है, लेकिन इसमें भारी रुकावट आई है और जहाजों की आवाजाही लगभग नहीं के बराबर हो गई है। यह जलमार्ग आर्थिक और रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। फारस की खाड़ी से बाहर निकलने का यही एकमात्र रास्ता है और पूरा समुद्री यातायात इसी रास्ते से गुजरता है। 2025 में इस रास्ते से हर दिन लगभग दो करोड़ बैरल कच्चे तेल और तेल उत्पादों की आवाजाही हुई, जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत है और यूरोप, एशिया और ऑस्ट्रेलिया सहित कई बाजारों तक पहुंचा। अब इसे खोलने के लिए 3 विकल्प हैं-
पहला परिदृश्य: युद्धविराम
पहला विकल्प युद्धविराम है। लेकिन यह तब हो सकता है जब ईरान, ट्रंप की मांग मानते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने पर सहमत हो जाए, भले ही यह स्थायी युद्धविराम तक पहुंचने के लिए एक अस्थायी कदम ही क्यों न हो। ऐसा होने पर रस्ते पर मुख्य नियंत्रण ईरान का ही रहेगा। हालांकि शत्रुता समाप्त हो सकती है, लेकिन इस बात की पूरी संभावना है कि ईरान वहां से गुजरने वाले विदेशी जहाजों पर शुल्क लगाने की कोशिश करे।
हाल के हफ्तों में ऐसी खबरें सामने आई हैं कि कुछ जहाजों से जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकलने के लिए शुल्क वसूला गया है। इसे युद्धकालीन अस्थायी उपाय के रूप में देखा जा सकता है, जिसे ईरान ने संकट में फंसी शिपिंग कंपनियों से हासिल किया होगा। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत शांति काल में किसी अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाना प्रतिबंधित है, लेकिन पूरी संभावना है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान इन नियमों को ज्यादा महत्व नहीं दे रहा।
संभावना यह भी है कि भविष्य में किसी भी व्यवस्था के तहत ईरान इस तरह का शुल्क तंत्र जारी रखने की कोशिश करे। शुरुआत में इसका बोझ अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग पर पड़ेगा, जो जहाजों की आवाजाही बनाए रखने के लिए अनिच्छा के बावजूद भुगतान कर सकता है। इन अतिरिक्त लागतों को बाद में बाजार में समायोजित किया जाएगा, जिससे खाड़ी क्षेत्र से होने वाले निर्यात की कीमतों में वृद्धि होना तय है। वर्तमान कूटनीतिक और सैन्य प्रयासों को देखते हुए यह सबसे संभावित परिदृश्य माना जा रहा है, हालांकि यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर उसकी रियायतों पर निर्भर करेगा।
दूसरा परिदृश्य: अमेरिकी जमीनी हस्तक्षेप
दूसरा संभावित परिदृश्य यह है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ हवाई और मिसाइल हमलों से आगे बढ़कर जमीनी सैन्य अभियान शुरू करे। खाड़ी क्षेत्र में करीब 5,000 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों की तैनाती के साथ कुल संख्या लगभग 50,000 तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे संकेत मिलता है कि अमेरिका इस विकल्प के लिए तैयार है।
ये भी अटकलें हैं कि क्या अमेरिका पहले खार्ग द्वीप पर कब्जा करेगा, जहां से ईरान के लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात होता है। यह द्वीप खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी जमीनी और समुद्री अभियानों के लिए एक आधार बन सकता है। हालांकि खार्ग द्वीप होर्मुज में स्थित नहीं है और इसे कब्जे में लेने से इसे तुरंत खोलने में कोई प्रत्यक्ष सैन्य लाभ नहीं मिलेगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए अमेरिका को बड़े पैमाने पर नौसैनिक बल तैनात करना होगा, ताकि पहले इसे समुद्री बारूदी सुरंगों जैसे खतरों से सुरक्षित किया जा सके और फिर वाणिज्यिक जहाजों को दोनों दिशाओं में सुरक्षित मार्ग प्रदान किया जा सके। हाल के बयानों से संकेत मिलता है कि ट्रंप अपने सहयोगी देशों के समर्थन के बिना यह कदम उठाने के इच्छुक नहीं हैं। अभी तक ऐसा समर्थन तो नहीं मिला है, बल्कि कुछ मामलों में इसका विरोध भी हुआ है। ऐसे में, भले ही अमेरिका अपने अभियान को और तेज करने में सक्षम हो, लेकिन इससे जुड़े सैन्य और राजनीतिक जोखिमों के कारण इस विकल्प की संभावना फिलहाल कम दिखाई देती है।
तीसरा परिदृश्य: युद्ध खत्म, लेकिन मार्ग बंद
तीसरा परिदृश्य यह है कि अमेरिका युद्ध समाप्त कर दे, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षित आवाजाही बहाल नहीं हो पाए। इस समस्या के समाधान के लिए समान विचारधारा वाले देशों के गठबंधन की संभावना बढ़ रही है। 11 मार्च को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव 2817 पारित किया, जिसमें खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज में नौवहन की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया। एक नया प्रस्ताव पारित कर संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को सामूहिक कार्रवाई की अनुमति दी जा सकती है, जिससे इस रास्ते को सुरक्षित किया जा सके और अंतरराष्ट्रीय नौवहन को फिर से बहाल किया जा सके। यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र के अधिदेश के तहत एक नौसैनिक गठबंधन द्वारा की जा सकती है, जो ईरानी हमलों से अपनी रक्षा करने में सक्षम हो।
इस बीच ब्रिटेन ने दो अप्रैल को अपने सहयोगी देशों के साथ इस दिशा में एक बैठक भी बुलाई थी। हालांकि ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और अन्य यूरोपीय तथा एशियाई देश, जैसे चीन, इस तरह के किसी संयुक्त अभियान में सक्रिय संघर्ष के दौरान शामिल नहीं होना चाहेंगे। वे तब कदम उठाना अधिक सुरक्षित समझेंगे जब अमेरिका अपनी सेनाएं हटा ले और प्रमुख पक्षों के बीच शत्रुता समाप्त हो जाए। अगर ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा गतिरोध बना रहता है और ट्रंप विजय की घोषणा कर अमेरिकी सेना को वापस बुला लेते हैं, तो यह विकल्प अंतिम उपाय के रूप में सामने आ सकता है।
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