होर्मुज पर किसका अधिकार? यहां टोल लगाने की तैयारी में ईरान, क्या कहता है इंटरनेशनल लॉ
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच ईरान ने होर्मुज से निकलने वाले जहाजों के ऊपर टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव की गंभीरता ऐसी है कि कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में ईरान ने एक तेल जहाज से 2 मिलियन डॉलर टैक्स की वसूली की है।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का आज 21वां दिन है। अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर हमला कर रहे हैं, तो वहीं, ईरान भी एक कदम आगे बढ़कर खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है। इसके साथ ही उसने विश्व के ऊर्जा निर्यात का 20 फीसदी परिवहन संभालने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को भी बंद कर दिया है। इसकी वजह से पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट पैदा होने की स्थिति बन गई है। इन सब बातों के बीच ईरान ने अब युद्ध के दौरान और फिर युद्ध के बाद भी होर्मुज पर प्रतिबंध लगाने का मन बना लिया है। ईरान के सांसदों ने सार्वजनिक रूप से संसद में एक प्रस्ताव रखा है, जिसके मुताबिक ईरान अब इस स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टैक्स वसूल करेगा। इस मामले की गंभीरता इस वजह से और बढ़ गई है, क्योंकि अभी हाल ही में सामने आईं कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने एक जहाज से 2 मिलियन डॉलर का टैक्स वसूला है, जबकि कई जहाजों से ऐसी बात चल रही है।
होर्मुज पर टोल बनाने का विचार ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स पिछले काफी समय से रखती आ रही है। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय कानून के दबाव में और दुनिया भर से बेहतर रिश्तों को बनाने के चक्कर में ईरान सरकार इससे दूर हटती रही है। लेकिन अब युद्ध की स्थिति में ईरानी सांसदों ने इस पर सहमति जता दी है। आईआरजीसी के लोग इस स्ट्रेट पर एक सुरक्षित रास्ता बनाने की तैयारियों में लगे हुए हैं। यह तैयारी उन जहाजों के लिए है, जो या तो तेहरान सरकार के करीबी हैं या फिर उन्हें टैक्स देकर जाएंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में गुजरने वाले कम से कम एक जहाज से 2 मिलियन डॉलर वसूले हैं, जबकि कई अन्य जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए इसी तरीके पर बात चल रही है।
युद्ध में होर्मुज का इस्तेमाल कर रहा ईरान
अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध में उलझे ईरान के लिए होर्मुज स्ट्रेट एक बड़ा फायदा है। यहां से गुजरने वाले किसी भी टैंकर पर हमला करने के लिए उसे बस कुछ हजार डॉलर के ड्रोन को खर्च करना रहता है, तेहरान ने इस क्षेत्र में समुद्री माइन्स भी बिछा रखी हैं, जो कि जहाजों के लिए एक बड़ा खतरा है। इसके अलावा आस पास मौजूद उसके प्रॉक्सी संगठन भी यह काम कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में ईरान इस टोल टैक्स व्यवस्था को सुरक्षा व्यवस्था के रूप में पेश कर रहा है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जो देश सीधे संघर्ष में शामिल नहीं हैं, उनके लिए “सुरक्षित मार्ग” पर बातचीत की जा सकती है, लेकिन ऐसे टोल का कानूनी आधार संदिग्ध है और इसकी प्रक्रिया अस्पष्ट बनी हुई है। यह सब अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त व्यवस्था के बजाय चल रही कूटनीतिक और नौसैनिक वार्ताओं के बीच हो रहा है।
होर्मुज किसका?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के 20 फीसदी ऊर्जा स्त्रोत परिवहन का मालिक है। यह संकरा रास्ता ओमान की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। चूंकि इसका उपयोग वैश्विक नौवहन के लिए होता है और दुनिया के तेल और गैस का बड़ा हिस्सा यहां से गुजरता है, इसलिए यह किसी एक देश के नियंत्रण में नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के अधीन आता है। इसका मतलब है कि यह किसी देश की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि एक साझा वैश्विक मार्ग की तरह काम करता है। लेकिन अब जबकि ईरान युद्ध में है, तो वह उन देशों के जहाजों पर हमला बोल सकता है, जो कैसे भी इस संघर्ष में शामिल हैं।
क्या ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर लगा सकता है टोल?
अंतर्राष्ट्रीय कानून के मुताबिक देखें, तो कोई भी देश से होर्मुज जैसे किसी रास्ते पर एकतरफा टैक्स नहीं लगा सकता है। इसका कानूनी आधार संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि है, जिसमें “ट्रांजिट पासेज” का सिद्धांत शामिल है। इसके तहत सभी देशों के जहाजों और विमानों को बिना किसी बाधा के इस मार्ग से गुजरने का अधिकार होता है। इस सिद्धांत के मुताबिक चाहे जहाज किसी भी देश का हो, उसका मालिक कोई भी हो या वह कुछ भी सामान ले जा रहा हो। उसे नहीं रोका जा सकता या उस पर टैक्स नहीं लगाया जा सकता है। आसपास मौजूद देश अपने समुद्र तट और तटीय जलक्षेत्र पर अधिकार रखते हैं, लेकिन वह पूरे होर्मुज जलडमरूमध्य पर टैक्स लगाने का अधिकार नहीं रखते।
लेकिन समस्या यह है कि यह एक अंतर्राष्ट्रीय कानून है। अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला करके कानून का उल्लंघन किया है। इस मामले में ईरान यह कह सकता है कि वह भी इस कानून को तोड़ सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक ईरान का यह प्रस्ताव आर्थिक प्रयासों से ज्यादा वैश्विक जमात के सामने एक राजनैतिक प्रस्ताव है। ईरान अन्य देशों के ऊपर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। यूरोप और एशिया के तमाम देश पश्चिम एशिया के इसी रास्ते के भरोसे हैं। ऐसे मे सभी देश इस स्ट्रेट को खोलने के लिए बेताब होंगे।
इजरायल और अमेरिका तो पहले से ही ईरान के खिलाफ युद्ध के मैदान में हैं। लेकिन ईरान के इस प्रस्ताव के बाद ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली नीदरलैंड, जापान और कनाडा जैसे नेताओं ने इस पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने संयुक्त रूप से बयान जारी कर ऐसे प्रस्ताव को खारिज करने की अपील की है।
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