When Anurag Kashyap was made Escape Goat to Face Gulzar Sahab for this Reason जब अनुराग कश्यप को बनाया गया बलि का बकरा, गुलजार साहब से डर रहे थे राम गोपाल वर्मा, Bollywood Hindi News - Hindustan
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जब अनुराग कश्यप को बनाया गया बलि का बकरा, गुलजार साहब से डर रहे थे राम गोपाल वर्मा

Anurag Kashyap: अनुराग कश्यप ने एक इवेंट के दौरान बताया था कि कैसे जब गुलजार साहब से गाने की एक लाइन बदलवानी थी तो विशाल भारद्वाज और राम गोपाल वर्मा ने अनुराग कश्यप को बलि का बकरा बनाया था।

Mon, 23 Feb 2026 05:50 PMPuneet Parashar लाइव हिन्दुस्तान
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जब अनुराग कश्यप को बनाया गया बलि का बकरा, गुलजार साहब से डर रहे थे राम गोपाल वर्मा

साल 1998 में आई फिल्म 'सत्या' उस दौर की आइकॉनिक हिट थी। राम गोपाल वर्मा के निर्देशन में बनी इस फिल्म का गाना 'गोली मार भेजे में' आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में जगह बनाए हुए है, लेकिन क्या आपको पता है कि इस मूवी और गाने की शूटिंग के दौरान एक बड़ा मजेदार किस्सा हुआ था। फिल्म 'गोली मार भेजे में' के बोल लिखे थे उस दौर के दिग्गज लिरिक्स राइटर गुलजार साहब ने। शूटिंग के दौरान पहले गुलजार साहब ने अलग बोल सुझाए थे, लेकिन फिर बाद में इन्हें बदल दिया। हुआ यह कि दिग्गज फिल्म डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा और विशाल भारद्वाज को पिछले वाले बोल ज्यादा पसंद आ रहे थे, जो गुलजार साहब ने पहले सुझाए थे।

जब अनुराग को बनाया गया बलि का बकरा

अब दिक्कत यह थी कि जाकर गुलजार साहब से यह कहना था कि वो इन नए बोल की जगह पुराने वाले बोल ही रखें। मगर राम गोपाल वर्मा और विशाल भारद्वाज, दोनों को ही जाकर गुलजार साहब से यह कहने में डर लग रहा था। फाइनली राम गोपाल वर्मा और विशाल भारद्वाज ने मिलकर अनुराग कश्यप को बलि का बकरा बनाने का फैसला किया। पहले इस गाने की लाइनें थीं- गोली मार भेजे में, गम के नीचे बम लगाके गम उड़ा दे। अनुराग कश्यप ने खुद एक इवेंट में यह किस्सा सुनाया था कि कैसे राम गोपाल वर्मा और विशाल भारद्वाज ने तब लाइन बदलवाने के लिए उन्हें आगे कर दिया था, लेकिन नतीजा क्या हुआ? चलिए जानते हैं।

ऐसा था गुलजार साहब का रिएक्शन

अनुराग कश्यप ने बताया, 'पहले लाइनें अलग थी। गोली मार भेजे में.. पहले लाइनें थी कि गम के नीचे बम लगा के गम उड़ा दे। और फिर गुलजार साहब ने कहा ये लाइन मैं बदलना चाहता हूं। उन्होंने कहा 'गोली मार भेजें में'। अब ना विशाल जी कह सके गुलजार साहब से कि सर ये लाइन बदल दीजिए। ना रामगोपाल वर्मा कह सके। उन्होंने कहा ये अनुराग मुंहफट हैं। इसको आगे करते हैं। तो मैं गुलजार साहब के सामने पहुंच गया। मैं 22 साल का था। तो मैंने कहा नहीं गुलजार साहब वो जो पहले वाली लाइन है ना बड़ी अच्छी है, वो गम के नीचे बम लगा के गम उड़ा दे। उन्होंने मुझे देखा उन्होंने कहा गम नहीं ग़म। वहां जाकर बैठो बाहर और काली चाय पीओ।'

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गाना रिलीज हुआ तो हो गया कमाल

फाइनली अनुराग कश्यप को आगे करने वाला आइडिया भी काम नहीं आया और मेकर्स को गुलजार साहब की बात मानते हुए वही लाइनें फिल्म के गाने में रखनी पड़ी। लेकिन जादू तो तब हुआ जब यह गाना रिलीज हुआ। फिल्म का यह गाना सुपरहिट हो गया और आज तक इसकी लाइनें लोगों के जेहन में बनी हुई हैं। वर्क फ्रंट की बात करें तो अनुराग कश्यप की पिछली फिल्म निशान्ची थी। इसके बाद वह फिल्म बैड गर्ल और बंदर को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं।

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