'उनका पतन उनके कर्मों का फल है', मौसमी चटर्जी ने बताया राजेश खन्ना के स्टारडम का काला सच, कहा- सक्सेस के नशे में चूर थे…
मौसमी और राजेश खन्ना ने 'अनुराग', 'प्रेम बंधन' और 'भोला भाला' जैसी फिल्मों में स्क्रीन शेयर किया। ऐसे में अब मौसमी ने अपने हाल ही में एक बातचीत में एक्ट्रेस ने राजेश खन्ना के साथ काम करने के अनुभव के बारे में खुलकर बात की।

बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस मौसमी चटर्जी अपने जमाने में न सिर्फ अपनी खूबसूरती बल्कि अपनी एक्टिंग के लिए भी जानी जाती हैं। मौसमी ने अपने करियर में कई शानदार में फिल्में दी हैं। मौसमी की जोड़ी पर्दे पर सबसे ज्यादा राजेश खन्ना संग पसंद की जाती थी। मौसमी और राजेश खन्ना ने 'अनुराग', 'प्रेम बंधन' और 'भोला भाला' जैसी फिल्मों में स्क्रीन शेयर किया। मौसमी चटर्जी का चुलबुलापन और राजेश खन्ना की गंभीरता हर किरदार को खास बना देती थी। ऐसे में अब मौसमी ने अपने हाल ही में एक बातचीत में एक्ट्रेस ने राजेश खन्ना के साथ काम करने के अनुभव के बारे में खुलकर बात की। मौसमी ने राजेश खन्ना की पर्सनैलिटी और उनके सुपरस्टारडम के असर के बारे में बेबाकी से बात की।
'वह एक बिगड़ा हुआ बच्चा था'
मौसमी चटर्जी ने हाल ही में NDTV को अपना इंटरव्यू दिया। इस दौरान मौसमी ने राजेश खन्ना के करियर के शिखर पर उनकी जबरदस्त लोकप्रियता को याद करते हुए अपनी बातें शेयर कीं। मौसमी ने कहा, 'वह एक बिगड़ा हुआ बच्चा था। उसकी सफलता हमेशा उसके दिमाग पर हावी रहती थी।' जैसे-जैसे अमिताभ बच्चन का सितारा चमकने लगा और राजेश खन्ना का स्टारडम धीरे-धीरे ढलने लगा, उन्हें अक्सर अकेलेपन, निराशा और शराब की लत जैसी निजी मुश्किलों से जूझते हुए देखा गया।
'यह सब कर्म है'
मौसमी चटर्जी से पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी उनमें अकेलापन महसूस किया। इस पर एक्ट्रेस कहा, 'नहीं, यह सब कर्म है, जिस तरह से आप अपनी जिंदगी को संवारते हैं, जिस तरह से आप वह बनने का दिखावा करते हैं जो आप नहीं हैं, और जिस तरह से आप सभी रिश्तों पर प्रतिक्रिया देते हैं।'
आपको अपने अकेले समय का आनंद लेना आना चाहिए
एक्ट्रेस ने आगे अकेलेपन और इमोशनल खालीपन पर अपनी बात करते हुए कहा, 'अगर आप कहते हैं कि हर कोई अकेला है, तो आपको अपने अकेले समय का आनंद लेना आना चाहिए। अकेलापन महसूस न करें। मुझे अकेले रहना पसंद है और मैं उस तरह का खालीपन देखती हूं; हर कोई जिंदगी में इससे गुजरता है। किशोर कुमार, मधुबाला को ही ले लीजिए, वे सभी इससे गुजरे। जो कुछ भी हो रहा है, वह सब आपकी जिंदगी का ही एक हिस्सा है। यह आपकी पूरी जिंदगी नहीं है।' उन सालों में फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों के पावर और कल्चर को लेकर बात करते हुए मौसमी चटर्जी ने कहा, 'जो भी टॉप पर होता था, उसे लगता था कि उसकी हर बात माननी ही पड़ेगी। यह हमेशा से था। जो भी राज करता है, उसे लगता है कि वह हर चीज पर राज कर सकता है।'
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