'सुबह 4 बजे तक शूटिंग करते थे धर्मेंद्र', अगस्त्य नंदा ने बताया साथ काम करने का अनुभव
Dharmendra: फिल्म 'इक्कीस' में धर्मेंद्र आखिरी बार पर्दे पर काम करते नजर आएंगे। फिल्म के लिए काफी तगड़ा क्रेज बना हुआ है, लेकिन क्या आपको पता है कि इस फिल्म के लिए धर्मेंद्र सुबह के 4 बजे तक काम कर रहे थे।

दिवंगत बॉलीवुड एक्टर 'धर्मेंद्र' की आखिरी फिल्म 'इक्कीस' सिनेमाघरों में 1 जनवरी को रिलीज होने जा रही है। फिल्म को लेकर अच्छा खासा बज बना हुआ है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस फिल्म के लिए धर्मेंद्र ने कड़ी मेहनत की थी। वह रात भर जागकर सुबह 4 बजे तक शूटिंग किया करते थे। एक हालिया इंटरव्यू में कोरियोग्राफर विजय गांगुली ने लीजेंडरी एक्टर धर्मेंद्र के साथ काम करने का अपना तजुर्बा बताया।
शूटिंग के लिए 4 बजे तक जागते थे
श्रीराम राघवन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में धर्मेंद्र के साथ काम करने को लेकर विजय गांगुली ने कहा कि यह उनके लिए फक्र का पल था और धर्मेंद्र को वह हमेशा एक जिंदादिल शख्स के तौर पर याद करेंगे। विजय गांगुली ने मिड-डे के साथ बातचीत में बताया, "धर्मेंद्र के साथ शूटिंग करना अद्भुत था क्योंकि वह एनर्जेटिक और जिंदादिल इंसान थे। गाना पूरा होने तक वो सुबह 4 बजे तक वे जागते रहे।"
अनिल गांगुली के साथ किया काम
विजय गांगुली ने बताया कि यह हम दोनों के लिए पुरानी यादों से भरा पल था। धरमजी ने इससे पहले मेरे पिता (फिल्ममेकर अनिल गांगुली) के साथ 'दुश्मन देवता' नाम की एक फिल्म की थी। शूटिंग के दौरान, उन्होंने मेरे पिता को याद किया। उन्होंने मुझसे कहा कि मेरे पापा एक नेकदिल इंसान थे और उनके साथ काम करने में उन्हें बहुत मजा आया था।
'जितना भी वक्त साथ में बिताया...'
फिल्म 'इक्कीस' में काम कर रहे अगस्त्य नंदा ने भी धर्मेंद्र को याद करते हुए कहा, "हमारे साथ में ज्यादा सीन नहीं थे, लेकिन जितना वक्त हमने साथ बिताया, वो कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।" यंग एक्टर ने धर्मेंद्र से अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए कहा कि हालांकि शूटिंग के दौरान वह खुद काफी घबराए हुए थे, लेकिन धर्मेंद्र बहुत शालीन स्वभाव से उनसे मिले। अगस्त्य ने कहा, "उन्होंने कभी मुझे यह महसूस नहीं कराया कि वो मुझसे सीनियर हैं।
दोस्त की तरह बात करते थे धर्मेंद्र
अगस्त्य ने बताया कि वो आपसे एक दोस्त की तरह बात करते थे। बता दें कि नेशनल अवॉर्ड विनर फिल्ममेकर श्रीराम राघवन के निर्देशन फिल्म 'इक्कीस' में द्वितीय लेफ्टिनेंट अरुण खेतरपाल की सच्ची कहानी दिखाई गई है, जो परम वीर चक्र से सम्मानित होने वाले भारत के सबसे युवा व्यक्ति हैं। बसंतर की लड़ाई में खेतरपाल ने दुश्मन का डटकर सामना किया और अपनी जान गंवाकर भी 10 पाकिस्तानी टैंकों को खत्म कर दिया।
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