गदर की शूटिंग में वो VFX नहीं था, असली थी 50 हजार लोगों की भीड़, फेंकने लगे थे सचमुच के पत्थर
Gadar Movie Partition: सनी देओल की फिल्म गदर में भारत-पाकिस्तान बंटवारे वाला सीन काफी रियल लगता है। लेकिन क्या आपको पता है कि उस सीन में दिखाई गई भीड़ पूरी तरह असली थी, जिसे मैनेज करना भी उतना ही मुश्किल था।

सनी देओल और अमीशा पटेल की साल 2001 में आई फिल्म 'गदर - एक प्रेम कथा' ब्लॉकबस्टर हिट रही थी। इस फिल्म की दीवानगी का आलम यह था कि जब इसे री-रिलीज किया गया, तो भी इसे देखने के लिए लोगों ने थिएटर्स हाउसफुल कर दिए। अनिल शर्मा के निर्देशन में बनी इस फिल्म को शुरू में हर किसी ने खारिज किया था, लेकिन जनता ने इस फिल्म को बेशुमार प्यार देकर साबित कर दिया कि मुंबई में बैठे मुट्ठी भर लोगों की पसंद इस देश की आवाम की पसंद नहीं होती है।
कोई VFX नहीं, जमा किए गए 50 हजार लोग
फिल्म में जितने भी भीड़ वाले सीन आप देखते हैं जिनमें लोग दंगे कर रहे हैं या भीड़ हमला कर रहे हैं, लोग अपने सामान लेकर माइग्रेट कर रहे हैं, ये सभी सीन असली भीड़ के साथ शूट किए गए थे। फिल्म के डायरेक्टर अनिल शर्मा ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनमें से कोई भी सीन VFX नहीं था। असली लोग हैं, कुल 50 हजार लोगों की भीड़ इकट्ठा की गई थी और उन्हें मैनेज करना अपने आप में बड़ी चुनौती थी। अनिल शर्मा ने बताया कि शूटिंग के लिए इतनी भीड़ उन्होंने किस तरह इकट्ठा की थी।
कैसे इकट्ठा किए गए थे इतने सारे लोग?
अनिल शर्मा ने डिजिटल कमेंट्री के साथ बातचीत में बताया, "जब गदर में मैं पार्टीशन का सीन कर रहा था तो 50000 का क्राउड लाना आसान काम नहीं था। असली लोग थे, कोई भी इफेक्ट्स नहीं था। बहुत खर्चा था। प्रोडक्शन के लिए पॉसिबल नहीं है, तो मैं गया फिरोजपुर के MLA साहब से मिला। मैंने कहा सर अपने सारे पंचायत सरपंचों को मिलवाइए। मैंने कहा सर आपके यहां से मुझे दो-दो हजार लोग चाहिए। 1947 के पार्टीशन पर फिल्म बना रहे हैं। वो सभी लोग उत्साह और ऊर्जा से भर गए कि किसी ने तो हमारी कद्र की। सब आ गए।"
लोग फेंकने लगे थे सचमुच के पत्थर
अनिल शर्मा ने बताया कि जब उन्होंने पथराव वाले सीन शूट किए तो मुसीबत यह हो गई कि लोगों ने असली पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। उन्होंने बताया, "हर सरपंच 2 हजार आदमी लेकर आया और इस तरह कुल मिलाकर 50 से 60 हजार लोग इकट्ठे हो गए। पत्थर फेंकने वाली एक सीक्वेंस थी। तो हमने हजारों पत्थर बनाए थे डमी। वो पत्थर सब खत्म हो गए फेंकने में। ते उन्होंने रियल पत्थर उठा कर फेंकने शुरू कर दिए। अब उनको बेचारों को क्या मालूम। हम सभी ने अपने छाते खोली। भैया यह क्या हो रहा है।" अनिल शर्मा ने हंसते हुए कहा कि आप प्यास से लोगों को हैंडल करो, प्यार-प्यार को पहचानता है।
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