Bollywood Kissa Guru Dutt wanted to change end of Saheb Bibi Aur Ghulam after the premiere set was rebuilt 1962 superhit ट्रेजेडी नहीं कॉमेडी होता इस क्लासिक फिल्म का अंत, रिलीज के बाद क्लाइमेक्स बदलना चाहते थे गुरु दत्त, Bollywood Hindi News - Hindustan
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ट्रेजेडी नहीं कॉमेडी होता इस क्लासिक फिल्म का अंत, रिलीज के बाद क्लाइमेक्स बदलना चाहते थे गुरु दत्त

साल 1962 में गुरु दत्त की एक फिल्म रिलीज हुई थी। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी। हालांकि, इस फिल्म के प्रीमियर के बाद गुरु दत्त फिल्म के अंत को बदलना चाहते थे। उन्होंने राइटर से फिल्म का नया अंत लिखने को भी कह दिया था। 

Wed, 14 Jan 2026 07:45 PMHarshita Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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ट्रेजेडी नहीं कॉमेडी होता इस क्लासिक फिल्म का अंत, रिलीज के बाद क्लाइमेक्स बदलना चाहते थे गुरु दत्त

अगर आप भारतीय सिनेमा में दिलचस्पी रखते हैं तो गुरु दत्त के काम से जरूर वाकिफ होंगे। गुरु दत्त एक शानदार एक्टर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर थे। आज हम आपको गुरु दत्त की एक ऐसी सुपरहिट फिल्म के बारे में बता रहे हैं जिसके प्रीमियर के बाद गुरु दत्त ने फिल्म के अंत को बदलने का फैसला लिया था। हालांकि, बाद में सोचने के बाद उन्होंने अंत बदलने वाले का फैसला रोक दिया।

क्या है उस फिल्म का नाम?

हम जिस फिल्म की बात कर रहे हैं उसका नाम है साहेब बीबी और गुलाम। इस फिल्म में गुरु दत्त, मीना कुमारी और रहमान खान नजर आए थे। साहेब बीबी और गुलाम उस वक्त की सुपरहिट फिल्म थी और आज इस फिल्म को क्लासिक फिल्म का दर्जा हासिल है।

फिल्म के अंत को बदलना चाहते थे गुरु दत्त

साहेब बीबी और गुलाम बिमल मित्र द्वारा लिखी गई एक बंगाली उपन्यास पर आधारित फिल्म थी। फिल्म में एक्टिंग के साथ-साथ गुरु दत्त ने फिल्म को प्रोड्यूस भी किया था। इस फिल्म के कहानी लिखने से लेकर फिल्म की शूटिंग और फिर फिल्म के प्रीमियर पर बिमल मित्र गुरु दत्त के साथ मौजूद थे। उन्होंने अपनी किताब ‘बिछड़े सभी बारी-बारी’ में गुरु दत्त और उनकी इस फिल्म के दौरान घटी घटनाओं का जिक्र किया है। उन्होंने अपनी किताब में बताया है कि जब फिल्म का प्रीमियर हुआ था उसके बाद गुरु दत्त ने क्यों फिल्म के अंत को बदलने का फैसला लिया था।

साहिब बीबी और गुलाम

के आसिफ को पसंद नहीं आया था फिल्म का अंत

बिमल ने किताब में बताया है कि प्रीमियर के बाद गुरु दत्त अपनी पत्नी गीता और बिमल मित्र के साथ डायरेक्टर के आसिफ (मुगल ए आजम के डायरेक्टर) के घर पहुंचे। वहां, पर पहले से ही महफिल सजी थी। फिल्मी दुनिया के लोग वहां मौजूद थे और गुरु दत्त के वहां पहुंचने पर साहेब बीबी और गुलाम की चर्चा होने लगी। तब के आसिफ ने गुरु दत्त से कहा- गुरु तुम्हारी फिल्म का अंत अच्छा नहीं लगा। गुरु ने उनसे पूछा कि क्यों? तब के आसिफ ने कहा कि फिल्म का अंत अगर ट्रेजेडी से न करके कॉमेडी से करते तो यह फिल्म तुम्हें पैसा देती।

ट्रेजेडी की जगह कॉमेडी हो जाता फिल्म का अंत

गुरु ने उस वक्त अपने फिल्म के अंत को लेकर तर्क किया। फिर सुबह चार बजे के करीब गुरु दत्त वहां से बिमल के साथ वापस आए। अगले दिन सुबह गुरु दत्त के पास फिल्म को लेकर फोन आ रहे थे, लेकिन गुरु के मन में ये बात थी कि शायद लोगों को फिल्म का वो अंत पसंद नहीं आ रहा है। इसके बाद, उसी रात के गुरु बिमल को लेकर एक बार फिर के आसिफ के घर पहुंचे। वहां, उन्होंने के आसिफ से पूछा कि फिल्म के अंत को कॉमेडी कैसे किया जा सकता है।

के आसिफ चाहते थे कैसा अंत?

के आसिफ ने सुझाव दिया कि ऐसा दिखाओ कि छोटी बहू ने दारू पीना छोड़ दिया है। मियां-बीवी का मेल हो गया है और उनका परिवार खुशी से जी रहा है।

साहेब बीबी और गुलाम

गुरु दत्त ने लिया अंत बदलने का फैसला

इसके बाद गुरु दत्त और बिमल देर रात गुरु के घर वापस लौट आए। वो दिल्ली, मुंबई और पंजाब के सभी सिनेमाहाउस में फोन करके रिपोर्ट ले रहे थे। गुरु को बताया गया कि रिपोर्ट बुरी है, टीकट खरीदी को लेकर वैसी हुड़क नहीं है। गुरु सोच में पड़ गए। अगले दिन शनिवार को गुरु ने फिल्म के डायरेक्टर अबरार आल्वी को घर पर बुलाया और उन्हें कहा कि फिल्म का अंत बदलना होगा। इसे कॉमेडी करना होगा। अबरार इस बात पर गंभीर हो गए, लेकिन फिर सबको पता था कि गुरु ने कहा है तो फिल्म का अंत बदला जाएगा।

दोबारा शुरू हुआ सेट बनाने का काम

बिमल बताते हैं कि वो फिल्म का नया अंत लिखने में लग गए थे। मीना कुमारी को भी जानकारी दी गई कि फिल्म का अंत दोबारा शूट किया जाएगा। फिल्म का सेट जो तोड़ा जा चुका था, उसे दोबारा बनाने का काम शुरू हुआ। ये सब काम चल ही रहा था कि तभी गुरु वापस आए और उन्होंने बिमल से कहा कि उन्होंने बहुत सोचा है और वो फिल्म का अंत नहीं बदलेंगे। उन्होंने कहा था कि के आसिफ चाहे जो भी कहें, लेकिन वो भी एक डायरेक्टर हैं और वो नहीं चाहते हैं कि फिल्म का अंत बदला जाए।

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साहेब बीबी और गुलाम उस साल की सुपरहिट फिल्म थी। बिछड़े सभी बारी बारी में बताया गया है कि फिल्म को उस वक्त के मीडिया कवरेज में बहुत ही पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला था।

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