'तो पंडित को पुजारी कर दो...' 'घूसखोर पंडत' विवाद में में कूदे अनूप जलोटा, मेकर्स को दे डाली ऐसी सलाह
भाजपा ने ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स को फिल्म 'घुसखोर पंडत' का टीजर और बाकी प्रमोशनल कंटेंट को सोशल मीडिया से हटाने के लिए कहा है। इन सब विवादों के बीच भजन और गजल सिंगर अनूप जलोटा भी कूद पड़े हैं।

बॉलीवुड एक्टर मनोज बाजपेयी इन दिनों अपनी फिल्म 'घूसखोर पंडत' को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। बीते दिनों मनोज की फिल्म 'घूसखोर पंडत' के टाइटल को लेकर काफी विवाद छिड़ा हुआ है। भाजपा ने ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स को फिल्म 'घुसखोर पंडत' का टीजर और बाकी प्रमोशनल कंटेंट को सोशल मीडिया से हटाने के लिए कहा है। इन सब विवादों के बीच भजन और गजल सिंगर अनूप जलोटा भी कूद पड़े हैं। उन्होंने फिल्म के टाइटल को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। आइए जानते हैं उन्होंने कहा?
पुजारी मैं भी हो सकता हूं, हमारा ड्राइवर भी...
दरअसल, अनूप जलोटा ने मनोज बाजपेयी की फिल्म 'घूसखोर पंडत' के टाइटल पर न सिर्फ आपत्ति जताई है, बल्कि मेकर्स को नया नाम सुझा दिया है। अनूप जलोटा ने कहा, 'विवाद है फिल्म 'घूसखोर पंडत' के टाइटल पर, तो इस पर विवाद होना ही है। पंडितों को अच्छा नहीं लगेगा सुनके। मेरा ख्याल से इसमें अगर छोटा सा एक चेंज हो जाए, तो सही रहेगा क्योंकि पंडित तो धर्म है, जाति है। किसी जाति को कैसे कह सकते हैं कि घूसखोर है? इसमें छोटा सा एक चेंज आ जाए कि 'घूसखोर पुजारी' कर दो टाइटल। अब अगर 'घूसखोर पुजारी' हो गया, तो पुजारी तो कोई भी हो सकता है। पुजारी मैं भी हो सकता हूं, हमारा ड्राइवर भी पूजा कर रहा है तो वो पुजारी हो सकता है। आप या कोई और।' उन्होंने आगे कहा कि पुजारी कोई एक समुदाय नहीं है, बल्कि जो भी पूजा करता है वही पुजारी कहलाता है। ऐसे में टाइटल बदलने से कई लोगों की नाराजगी खत्म हो सकती है और फिल्म को लेकर बनी मुश्किलें भी आसान हो जाएंगी।
कोई जाति नहीं है, कोई धर्म नहीं है...
अनूप जलोटा ने आगे कहा, 'तो पुजारी कोई एक व्यक्ति नहीं है, कोई जाति नहीं है, कोई धर्म नहीं है...जो पूजा कर रहा है वो पुजारी है, खत्म बात। तो अगर छोटा सा टाइटल में परिवर्तन हो जाए 'घूसखोर पुजारी', तो कई लोगों की मुश्किलें आसान हो जाएंगी। उनकी मुश्किलें हल हो जाएंगी।'
एफआईआर हुई दर्ज
बता दें कि टीजर रिलीज के बाद से कई सामाजिक और सामुदायिक संगठनों ने भी फिल्म पर आपत्ति जताई है। दरअसल, जब से फिल्म की अनाउंसमेंट हुई है तब से इसका विरोध करके कहा जा रहा था कि ये टाइटल काफी जातिवादी और ऑफेंसिव है। इस विवाद के चलते लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में एफआईआर भी दर्ज की गई है। वहीं नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (एनएचआरसी) ने एक शिकायत के बाद मिनिस्ट्री ऑफ इन्फॉर्मेशन और ब्रोडकास्टिंग को नोटिस जारी किया है।
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