प्रकाश राज ने मां के अंतिम संस्कार पर ट्रोल करने वाले को दिया जवाब, हां मैं भगवान को नहीं मानता लेकिन…
एक्टर प्रकाश खुद को नास्तिक बताते हैं। मां का अंतिम संस्कार क्रिश्चन पद्धति से किया तो लोगों ने ट्रोल करना शुरू कर दिया। अब उन्होंने लोगों को जवाब दिया है और ऐसा करने की वजह बताई है।

एक्टर प्रकाश राज की मां बीते दिनों इस दुनिया में नहीं रहीं। अब उनके अंतिम संस्कार पर कुछ ट्रोल तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। X पर एक यूजर ने लिखा है कि प्रकाश राज खुद को नास्तिक कहते हैं फिर भी मां को अंतिम विदाई क्रिश्चन रीति-रिवाज से दी। इस पर प्रकाश राज ने जवाब दिया है। उन्होंने ऐसा करने की वजह बताई है। उनके जवाब पर लोगों ने कई तरह के सवाल उठा रहे हैं।
प्रकाश राज ने दिया ये जवाब
प्रकाश राज ने किया ये ट्वीट, 'हां, मैं भगवान को नहीं मानता... पर मेरी मां अपने ईश्वर पर भरोसा करती थी। मैं उसको उसकी आस्था के हिसाब से दफनाए जाने के अधिकार को कैसे नकार सकता हूं। ये तो बेसिक रिस्पेक्ट है जो हम एक-दूसरे को देते हैं। क्या नफरत फैलाने वाले राक्षस ये समझेंगे?'
क्या था मामला
एक्टर प्रकाश राज अक्सर खुद ईश्वर में आस्था ना रखने वाला बताते हैं। 29 मार्च को उनकी 86 साल की मां सुवर्णलता का निधन हो गया। 30 मार्च को उन्होंने अपनी मां का अंतिम संस्कार क्रिश्चन पद्धति से किया। अब एक ट्विटर हैंडल से प्रकाश राज का पुराना इंटरव्यू और मां के अंतिम संस्कार का वीडियो पोस्ट किया गया। इसके साथ लिखा है, प्रकाश राज खुद को नास्तिक कहते हैं और बोलते हैं कि वह ईश्वर पर यकीन नहीं रखते। फिर भी अपनी मां की अंतिम क्रिया क्रिश्चन पद्धति से की।
पुराने इंटरव्यू में ये बोले थे प्रकाश राज
साथ में जो पुराना इंटरव्यू पोस्ट किया है, उसमें प्रकाश राज बोल रहे हैं, 'मैं भगवान पर भरोसा नहीं करता। मेरे पास टाइम नहीं है। किसी ने मुझे पूछा, मैंने कहा टाइम नहीं है। क्योंकि भगवान है, यह भरोसा करने के लिए आस्था ही पर्याप्त है। ना कहने के लिए मुझे बहुत सारे नॉलेज की जरूरत होती है। मेरे पास वक्त नहीं है, मैं इस दुनिया में रहता हूं। मैं बस इंसानों के साथ रहता हूं।'
लोगों ने दिया रिएक्शन
प्रकाश राज के इस बयान पर भी कई लोगों ने आपत्ति जताई है। एक ने लिखा है, अच्छा बात है प्रकाश। आप ईश्वर पर यकीन नहीं करते लेकिन अपनी मां को खुशी से क्रिश्चन रीति-रिवाज से दफना दिया क्योंकि वह अपने भगवान पर यकीन करती थी। आपका कहना है कि ये बेसिक रिस्पेक्ट है। फिर आप इतने साल से हिंदू भगवान, मंदिर, त्योहार और सनातन प्रथाओं को अंधविश्वास बताकर क्यों मजाक उड़ा रहे हैं। 1.4 बिलियन हिंदुओं को ये सम्मान क्यों नहीं दिया? एक और ने लिखा है, सौ प्रतिशत सहमत हूं। सबके पास अपनी आस्था पर यकीन करने का अधिकार है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप दूसरे की आस्था का मजाक उड़ाओ।
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