खिलाड़ियों की 'मनमानी' पर भड़के सुनील गावस्कर, IPL टीमों को दिया टूर्नामेंट से बाहर करने का सुझाव
गावस्कर का कहना है कि पहले जब टीम बन रही होती है तो ये खिलाड़ी अपनी उपलब्धता पर पूरी सफाई नहीं देते और जब टूर्नामेंट नजदीक होता है तो तरह-तरह के बहाने बनाने लगते हैं, जिससे टीम की योजनाओं पर असर पड़ता है।

IPL 2026 का आगाज होने में कुछ ही दिनों का समय रह गया है, मगर कई विदेशी खिलाड़ियों की उपलब्धता पर अभी भी सवाल खड़ा है। पैट कमिंस, जोश हेजलवुड जैसे खिलाड़ी चोट के चलते टूर्नामेंट के शुरुआती कुछ मैचों में हिस्सा नहीं ले पाएंगे, वहीं कुछ खिलाड़ी निजी कारणों के चलते शुरुआती कुछ मैच नहीं खेलेंगे। विदेशी खिलाड़ियों की इस मनमानी पर सुनील गावस्कर ने अपना गुस्सा जाहिर किया है और आईपीएल फ्रेंचाइजियों को उनके खिलाफ सख्त कार्रावाई करने को कहा है। गावस्कर का कहना है कि पहले जब टीम बन रही होती है तो ये खिलाड़ी अपनी उपलब्धता पर पूरी सफाई नहीं देते और जब टूर्नामेंट नजदीक होता है तो तरह-तरह के बहाने बनाने लगते हैं, जिससे टीम की योजनाओं पर असर पड़ता है।
सुनील गावस्कर ने 'स्पोर्टस्टार' के लिए अपने कॉलम में लिखा, "कुछ विदेशी खिलाड़ियों के साथ एक आम समस्या यह भी है कि वे अपनी फ्रेंचाइजी को हल्के में ले लेते हैं; ये खिलाड़ी चोट या निजी कारणों से टीम के लिए उपलब्ध नहीं हो पाते। फ्रेंचाइजी के मालिक अपने खिलाड़ियों की सुविधा का पूरा ध्यान रखते हैं, अक्सर वे खिलाड़ियों के परिवारों को भी अपने खर्च पर बुलाते हैं ताकि वे खिलाड़ियों के साथ समय बिता सकें; और ध्यान रहे, इन करोड़पति खिलाड़ियों को इसके लिए कोई पैसा खर्च नहीं करना पड़ता। यह भारत की मेहमाननवाजी का एक तरीका है, जिसे कुछ लोग अक्सर अपना 'अधिकार' समझ लेते हैं और फिर इस स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।"
उन्होंने आगे लिखा, “हमें पहले से ही कुछ ऐसे खिलाड़ियों के बारे में सुनने को मिल रहा है जो अलग-अलग कारणों से उपलब्ध नहीं होंगे; इनमें से किसी भी कारण के बारे में फ्रेंचाइजी द्वारा चुने जाने से पहले कोई जानकारी नहीं दी गई थी। जब तक फ्रेंचाइजी के मालिक सख्त रवैया अपनाकर इन खिलाड़ियों को टीम से बाहर नहीं कर देते, तब तक उन्हें खिताब जीतने की अपनी कोशिशों में रुकावटों का सामना करना पड़ता रहेगा। टीम बनाने के लिए की गई सारी योजनाएं, जिनके बारे में उन्हें लगता है कि वे उन्हें जीत दिलाने में मददगार होंगी, तब धरी की धरी रह जाती हैं, जब खिलाड़ी अपनी मर्जी से कभी भी टीम में शामिल होने का फैसला कर लेते हैं।”





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