नादिन डी क्लर्क का हैरतअंगेज कारनामा, MI के मुंह से छीनी जीत; ऐसा था आखिरी ओवर का रोमांच
WPL 2026 का धमाकेदार आगाज हुआ। आरसीबी ने आखिरी गेंद पर मैच जीत हर किसी को चौंका दिया। मुंबई इंडियंस की टीम आखिरी ओवर में 18 रन डिफेंड नहीं कर पाई। इस मैच में नादिन डी क्लर्क ने महफिल लूटी।

WPL 2026 का आगाज धमाकेदार रहा। मुंबई इंडियंस और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच सीजन का पहला मैच नवी मुंबई के डी वाई पाटिल स्टेडियम में खेला गया। फैंस जिस तरह के रोमांचक मुकाबले की उम्मीद लेकर मैच देखने आए थे, उन्हें MI और RCB ने निराश नहीं किया। मुंबई ने पहले बैटिंग करते हुए 154 रन बोर्ड पर लगाए थे, इस स्कोर का पीछा करते हुए आरसीबी को आखिरी ओवर में 18 रनों की दरकार थी। 20वें ओवर की पहली दो गेंदों पर एक समय ऐसा लग रहा था कि मुंबई इस मैच को आसानी से जीत जाएगी, मगर फिर नादिन डी क्लर्क ने कुछ ऐसा किया जिसे देख हर कोई दंग रह गया। आईए एक नजर MI vs RCB के आखिरी ओवर के रोमांच पर डालते हैं-
MI vs RCB आखिरी ओवर में क्या-क्या हुआ?
155 रनों के टारगेट का पीछा करते हुए रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को आखिरी ओवर में 18 रनों की दरकार थी। नादिन डी क्लर्क 38 गेंदों पर 43 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद थीं। नॉन स्ट्राइकर एंड पर कोई धाकड़ बल्लेबाज ना होने की वजह से यह तो साफ हो गया था कि नादिन डी क्लर्क ही पूरी 6 गेंदें खेलने वाली है। नैट साइवर-ब्रंट जैसी अनुभवी बॉलर मुंबई के लिए आखिरी ओवर डाल रही थी।
पहली गेंद (कोई रन नहीं)- नैट साइवर-ब्रंट की पहली गेंद पर नादिन डी क्लर्क ने जगह बनाकर डीप स्क्वॉयर लेग की दिशा में शॉट लगाया, मगर उन्हें कोई बाउंड्री नहीं मिली। नादिन डी क्लर्क ने रन लेना ठीक नहीं समझा, जिस वजह से RCB को आखिरी 5 गेंदों पर 18 रनों की दरकार थी।
दूसरी गेंद (कोई रन नहीं)- नैट साइवर-ब्रंट ने दूसरी गेंद पर चतुराई दिखाई और गेंद काफी धीमी डाली। नादिन डी क्लर्क ने फिर बड़ा शॉट लगाने की कोशिश की और वह फिर चूक गईं। इस बार भी आरसीबी को कोई रन नहीं मिला। स्थिति यह हो गई थी कि आखिरी 4 गेंदों पर आरसीबी को 18 रनों की जरूरत थी।
तीसरी गेंद (छक्का)- नैट साइवर-ब्रंट विकेट की तलाश में तीसरी गेंद सीधा स्टंप पर डाल बैठी। नादिन डी क्लर्क ने इसका भरपूर फायदा उठाया। उन्होंने थोड़ी जगह बनाई और लॉन्ग ऑफ के ऊपर से छक्का जड़ दिया। इस छक्के ने नादिन डी क्लर्क और आरसीबी की उम्मीदों को बनाए रखा।
चौथी गेंद (चौका)- नैट साइवर-ब्रंट फिर धीमी गेंद की तरफ गई, मगर नादिन डी क्लर्क उनकी चाल को समझ गई थी। शॉर्ट लेंथ की गेंद जो लेग साइड की तरफ एंगल बनाते हुए आई उस पर डी क्लर्क ने जगह बनाई और उसे स्क्वायर के पीछे पुल किया, गेंद बस बाउंड्री के अंदर गिरी। डी क्लार्क ने इसी के साथ अपनी फिफ्टी भी पूरी की, मगर अभी काम खत्म नहीं हुआ था, आरसीबी को आखिरी 2 गेंदों पर 8 रनों की जरूरत थी।
पांचवीं गेंद (छक्का)- धीमी गेंद, पूरी तरह से हिटिंग लेंथ में नहीं थी, लेकिन डी क्लर्क पीछे हटकर उसे काउ कॉर्नर के ऊपर से मारने में कामयाब रहीं। यह पूरी तरह से पावर का कमाल था क्योंकि गेंद में बिल्कुल भी पेस नहीं थी। इस छक्के ने मुंबई को हक्का-बक्का कर दिया था। आखिरी गेंद और आरसीबी को चाहिए थे बस 2 रन।
छठी गेंद (चौका)- ऑफ स्टंप के बाहर एक फुल डिलीवरी, डी क्लर्क ने जगह बनाई और गेंद को सीधे मारा - यह उनका पसंदीदा स्कोरिंग जोन है - और गेंद वहीं जाकर रुकी, जिससे RCB को एक शानदार जीत मिली। आरसीबी ने आखिरी गेंद पर मुंबई के मुंह से जीत छीनी।
नादिन डी क्लर्क ने 44 गेंदों पर 7 चौकों और 2 छक्कों की मदद से 63 रनों की नाबाद पारी खेलीं। इससे पहले वह गेंदबाजी में भी 4 विकेट लेकर कमाल दिखा चुकी थीं। नादिन डी क्लर्क को इस ऑलराउंड परफॉर्मेंस के लिए प्लेयर ऑफ द मैच के अवॉर्ड से नवाजा गया।





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