कोई तुक नहीं; टीम और बैटिंग में मनमाने प्रयोग से गौतम गंभीर पर भड़के रवि शास्त्री
कोच गौतम गंभीर के दौर में प्रयोगशाला की चकरघिन्नी में टीम इंडिया इस तरह पिसी है कि उनके अबतक के कार्यकाल में दूसरी बार घर में टेस्ट सीरीज हार निश्चित दिख रही है। पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ घर में एक अदद मैच में जीत को तरसते रहे और अब दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ।

भारतीय क्रिकेट टीम आजकल टीम कम प्रयोगों की प्रयोगशाला ज्यादा लग रही है। प्लेइंग इलेवन चुनने की रणनीति के क्या कहने। ऑलराउंडर रखना है लेकिन उससे बोलिंग करानी ही नहीं। गेंदबाज रखना है लेकिन वो गेंदबाजी नहीं करेगा। बल्लेबाजी क्रम तो जैसे म्यूजिकल चेयर हो। अच्छा चलो, इस पारी में पिछली बार के सातवें नंबर वाले को तीन नंबर पर भेजते हैं। फलां ने पिछली बार तीसरे नंबर पर खेला था, इस पर आठवें पर भेज देते हैं। ना, नौवां ठीक रहेगा। कोच गौतम गंभीर के दौर में प्रयोगशाला की चकरघिन्नी में टीम इंडिया इस तरह पिसी है कि उनके अबतक के कार्यकाल में दूसरी बार घर में टेस्ट सीरीज हार निश्चित दिख रही है। पहले न्यूजीलैंड और अब दक्षिण अफ्रीका की टीम क्लीन स्वीप करने जा रही है। इस हद से ज्यादा एक्सपेरिमेंट को लेकर टीम इंडिया के पूर्व कोच रवि शास्त्री ने कहा कि इसका कोई तुक ही नहीं बनता।
गुवाहाटी के जिस बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम में मेहमान टीम ने पहली पारी में 489 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया, वहां भारत की दूसरी पारी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। सिर्फ 201 रन बने। भारत की तरफ से सबसे ज्यादा 134 गेंदों का सामना कुलदीप यादव ने किया। 122 रन पर भारत का सातवां विकेट गिर चुका था। भारतीय बल्लेबाजी क्रम के धराशायी होने के बीच रवि शास्त्री ने कॉमेंट्री के दौरान कहा कि पिच ऐसी नहीं है कि स्कोर 7 विकेट के नुकसान पर 150 रन रहे।
शास्त्री ने कहा, 'नहीं, बिल्कुल नहीं। इसका कोई तुक नहीं है। क्या थॉट प्रॉसेस है, सोच है, मैं नहीं समझ पा रहा। मेरा मतलब है कि जब वे सीरीज की तरफ पीछे मुड़कर देखेंगे, कुछ सिलेक्शंस को देखेंगे...अभी भी थॉट प्रॉसेस समझने की कोशिश कर रहा। जैसे आप कोलकाता में 4 स्पिनरों को खेलाते हैं और उनमें से एक स्पिनर सिर्फ 1 ओवर फेंकता है। आदर्श तौर पर आपको एक स्पेशलिस्ट बैटर के साथ जाना चाहिए था। इसी तरह, यहां देखिए। वॉशिंगटन सुंदर को पिछले टेस्ट में 3 नंबर पर उतारा गया। उसे यहां आप आसानी से नंबर 4 पर उतार सकते थे क्योंकि अब आपके पास नंबर 3 है। वह (वॉशिंगटन सुंदर) नंबर 8 नहीं है। वह 8वें नंबर से बहुत बेहतर है।'
रवि शास्त्री ने इस दौरान किसी का नाम तो नहीं लिया लेकिन बैटिंग ऑर्डर, प्लेइंग इलेवन जैसे अहम फैसले तो मुख्य कोच और कप्तान ही करते हैं। म्यूजिकल चेयर और अलबेले प्रयोग तो आखिरकार गौतम गंभीर ही तय कर रहे हैं।
पूर्व क्रिकेटर से कॉमेंटेटर बने पार्थिव पटेल ने भी बल्लेबाजी क्रम में हो रहे बहुत ज्यादा प्रयोग पर सवाल उठाया। साथ में उन्होंने कहा कि टेस्ट क्रिकेट में एक्सपर्ट खिलाड़ी चाहिए। आपको विशुद्ध बल्लेबाज और गेंदबाज की जरूरत होती है। सीमित ओवरों के क्रिकेट से अलग है टेस्ट क्रिकेट।
वैसे भी राहुल द्रविड़ और चेतेश्वर पुजारा के बाद भारत का नंबर 3 म्यूजिकल चेयर के गेम जैसा हो गया है। गौतम गंभीर के हेड कोच बनने के बाद से तो बैटिंग ऑर्डर में लगातार प्रयोग के दौर ही चल रहे हैं। द्रविड़ और पुजारा जैसे खिलाड़ियों के क्रम को भरना आसान नहीं होता। उसके लिए खिलाड़ियों को आजमाने में कोई बुराई नहीं है लेकिन प्रयोग और मनमानेपन में फर्क होता है।
इंग्लांड दौरे पर 5 टेस्ट मैच के दौरान अलग-अलग मैचों में करुण नायर और साई सुदर्शन को तीसरे नंबर पर आजमाया गया। वेस्टइंडीज के खिलाफ होमसीरीज में साई सुदर्शन को तीसरे नंबर पर रखा गया लेकिन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ कोलकाता टेस्ट में उनकी जगह वॉशिंगटन सुंदर को तीसरे नंबर पर उतारा गया। अब गुवाहाटी में सुदर्शन को तीसरे नंबर पर उतारा गया और वॉशिंगटन सुंदर को 8वें नंबर पर भेजा गया।
गुवाहाटी टेस्ट के तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक दक्षिण अफ्रीका ने दूसरी पारी में बिना किसी नुकसान के 26 रन बना लिए हैं। भारत पर अब उसकी बढ़त 314 रन की हो चुकी है। इससे पहल सुबह भारत ने 9-0 से आगे अपनी पारी की शुरुआत की और पूरी टीम 201 रन सिमट गई। यशस्वी जायसवाल ने सबसे ज्यादा 58 रन और वॉशिंगटन सुंदर ने 48 रन बनाए। दक्षिण अफ्रीका ने भारत को फॉलोऑन देने के बजाय अपनी दूसरी पारी खेलने का फैसला किया।





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