प्रियांश आर्या की मानसिक मजबूती के पीछे उनके कोच भारद्वाज का बड़ा हाथ, कहा- वह अलग ही मिट्टी का बना है
रिकी पोंटिंग उनके खेल की तकनीकी खामियों को सुधारने में मदद के लिए मौजूद हैं, लेकिन प्रियांश आर्य के लिए उनके बचपन के कोच और मार्गदर्शक संजय भारद्वाज की भूमिका उन्हें इंडियन प्रीमियर लीग के दूसरे सत्र की चुनौतियों से पार पाने के लिए मानसिक रूप से तैयार करने की रही है।

रिकी पोंटिंग उनके खेल की तकनीकी खामियों को सुधारने में मदद के लिए मौजूद हैं, लेकिन प्रियांश आर्य के लिए उनके बचपन के कोच और मार्गदर्शक संजय भारद्वाज की भूमिका उन्हें इंडियन प्रीमियर लीग के दूसरे सत्र की चुनौतियों से पार पाने के लिए मानसिक रूप से तैयार करने की रही है।
अलग ही मिट्टी के बने हैं प्रियांश आर्या
दिल्ली के आक्रामक बाएं हाथ के बल्लेबाज प्रियांश ने पिछले साल पंजाब किंग्स के लिए अपने पदार्पण सत्र में 475 रन बनाकर तुरंत स्टारडम हासिल कर लिया था। इस सत्र में उनके सामने और भी बड़ी चुनौती थी-यह साबित करना कि उनका पहला सत्र महज एक इत्तेफाक नहीं था। आईपीएल में एक सत्र में चमक बिखेरने के बाद गुम हो जाने वाले पॉल वल्थाटी और स्वप्निल अस्नोदकर जैसे कई उदाहरण मौजूद हैं, लेकिन गौतम गंभीर को कोचिंग देने वाले भारद्वाज को हमेशा से पता था कि प्रियांश अलग मिट्टी के बने हैं। मौजूदा सत्र में 11 गेंदों पर 39, 20 गेंदों पर 57 और 37 गेंदों पर 93 रन की पारियों के बाद इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने साबित कर दिया है कि वह क्षणिक चमक नहीं हैं और एक अच्छे सत्र के बाद उनके सिर पर सफलता का खुमार नहीं चढ़ा है।
जब तुम मैदान पर उतरते हो…, कोच ने दी खास सीख
भारद्वाज ने सोमवार को पीटीआई से कहा, ''इस साल मैं उसे लगातार यही समझाने और उसके दिमाग में बैठाने की कोशिश कर रहा हूं कि जब तुम मैदान में उतरते हो, तो तुम्हें 'अतीत के प्रदर्शन की यादों' को लेकर नहीं चलना है और यह महसूस नहीं करना है कि तुमने कुछ हासिल कर लिया है या पिछले साल के प्रदर्शन के बाद तुम्हारी सामाजिक स्थिति बदल गई है।'' उन्होंने कहा, ''मैंने उससे कहा कि अपना 'सोशल स्टेटस' स्टेडियम के बाहर ही छोड़कर आओ। जो रन तुमने बनाए हैं, वे तुम्हारी मेहनत और भगवान की कृपा का परिणाम हैं।" दिल्ली के मशहूर एलबी शास्त्री क्लब की आत्मा माने जाने वाले भारद्वाज ने पिछले तीन दशकों में सैकड़ों बच्चों को कोचिंग दी है और वे इस बात को भली-भांति जानते हैं कि आईपीएल के साथ अचानक आने वाला स्टारडम किसी भी युवा खिलाड़ी पर क्या असर डाल सकता है।
उन्होंने कहा, ''आमतौर पर जिन बच्चों को आईपीएल के एक सत्र के बाद अचानक सफलता और पैसा मिलता है, वे बहुत सारा बोझ अपने साथ लेकर चलते हैं। मैदान पर अपेक्षाओं का दबाव होता है और मन के भीतर उस स्टारडम को बनाए रखने की बेचैनी भी रहती है।'' प्रियांश के साथ उनका रिश्ता 'गुरु-शिष्य' जैसा है, और उनकी सबसे खास बात यह है कि वह हर सलाह को ध्यान से सुनते हैं और उसके सार को आत्मसात करते हैं। उन्होंने कहा, ''गौतम गंभीर की तरह मैं भी प्रियांश का मेंटर हूं। गौतम अपने शुरुआती दिनों से ही सलाह के लिए मेरे पास आते थे, और यही बात प्रियांश के साथ भी है। वह समझता है कि 'अगर मेरे गुरु कुछ कह रहे हैं, तो वह मेरे भले के लिए ही होगा'।''
भारद्वाज ने प्रियांश के माता-पिता (दोनों स्कूल शिक्षक हैं) को भी उनके आईपीएल के शानदार शुरुआती सत्र के बाद उन्हें जमीन से जुड़े रखने का श्रेय देते हुए कहा, ''उनके माता-पिता ने भी बड़ी भूमिका निभाई। दोनों सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। उन्होंने प्रियांश से कहा कि हम पूरी तरह व्यवस्थित हैं, तुम्हें हमारी चिंता करने की जरूरत नहीं है। तुम अपने खेल पर ध्यान दो।' लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ रविवार रात को आक्रामक पारी खेलने के बाद प्रियांश ने अपने इस कोच को फोन किया था। भारद्वाज ने कहा, ''वह रात करीब एक बजे होटल पहुंचने के बाद फोन पर बात कर रहा था। आज सुबह उसने हमारे यहां प्रशिक्षण ले रहे खिलाड़ियों को वीडियो कॉल भी किया। युवा खिलाड़ी भी अपने प्रियांश भैया को देखकर काफी उत्साहित हो जाते हैं, जब वह उन्हें प्रेरित करते हैं।''
अन्य कोचों के विपरीत भारद्वाज इस बात को लेकर काफी व्यावहारिक हैं कि एक कोच अपने शिष्य की कितनी और किस तरह मदद कर सकता है। उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा, "कोच का काम क्या है। उन्होंने कहा, ''कोच खिलाड़ी नहीं बनाते। कोच माहौल बनाता है और उस माहौल का कौन सा बच्चा कितना उपयोग करेगा, यह उस पर निर्भर करता है। अगर कोच खिलाड़ी बनाता, तो मेरे हर खिलाड़ी गौतम गंभीर या प्रियांश आर्य बनते।''
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