संजू के शतक लगाने से टीम को क्या नुकसान होता? कप्तान सूर्या ने बताया, कहा- फिर दुबे ऐसा नहीं कर पाते
संजू सैसमन शतक के पीछे धीमी रफ्तार से नहीं भागे बल्कि बड़ा शॉट खेलकर आउट हो गए इस मानसिकता से कप्तान सूर्यकुमार यादव काफी खुश नजर आए। उन्होंने बताया कि अगर संजू 10 गेंदे और लेकर अपना शतक पूरा करते तो वह टीम के लिए नुकसानदायक होता और फिर दुबे ऐसा नहीं कर पाते।

टी20 विश्व कप 2026 जीतने वाले कप्तान सूर्यकुमार यादव ने खुलासा किया कि न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज के बाद उन्होंने खराब फॉर्म से जूझ रहे संजू सैमसन से क्या कहा था, जिससे उन्हें आत्मविश्वास वापस पाने और फॉर्म में लौटने में मदद मिली। भारत की जीत के बाद कप्तान सूर्या ने बताया कि उन्होंने टी20 विश्व कप से पहले सैमसन से क्या कहा था और कैसे सैमसन ने पूरे टूर्नामेंट में निस्वार्थ भाव से खेला।
हमें वही संजू सैमसन चाहिए
इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में सूर्यकुमार ने बताया कि न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज के बाद संजू ने उनसे संपर्क किया और पूछा कि टी20 विश्व कप में टीम उनसे क्या उम्मीद करती है। कप्तान ने बताया कि जवाब में उन्हें कहा गया कि टीम को वही सैमसन चाहिए जो अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से विपक्षी टीम को ध्वस्त कर देता है। सूर्या ने यह भी खुलासा किया कि जब संजू सैमसन बेंच पर बैठे थे, तब उन्होंने उन्हें कैसे प्रेरित रखा।
सूर्या ने कहा “संजू कई खूबियों के साथ टीम में आए थे। एक विकेटकीपर जो शीर्ष क्रम पर बल्लेबाजी कर सकते हैं। मुझे याद है एक बार वो मेरे पास आए और मुझसे पूछा, “बस मुझे बताइए कि आप इस टीम में मुझसे क्या चाहते हैं?” हमने कहा- हमें वही संजू सैमसन चाहिए जो हमने पहले विरोधी टीमों की धज्जियां उड़ाते हुए देखा है। फिर उन्होंने पूरी टीम से कहा – हम अपनी इच्छा से पहले टीम की इच्छा के अनुसार खेलेंगे। तभी हम कुछ खास हासिल कर पाएंगे। जब वो नहीं खेल रहे थे, मैंने उनसे कहा- ये मुश्किल दौर है, लेकिन इसे सहजता से स्वीकारना होगा। अगर भगवान ने तुम्हारे लिए कुछ लिखा है, तो तुम्हें वो जरूर मिलेगा। वो खुद को तैयार कर रहे थे। अगर मौका मिले, तो उसे लपक लेना और पूरी दुनिया इसे देखेगी।"
पहले दो मुकाबले रहे औसत फिर आया तूफान
अमेरिका के खिलाफ टी20 विश्व कप के पहले मैच में टीम से बाहर किए जाने के बाद सैमसन को यह अंदाजा नहीं था कि उन्हें इतनी अहम भूमिका निभानी पड़ेगी। नामीबिया और जिम्बाब्वे के खिलाफ मैचों में उनका प्रदर्शन औसत रहा और उन्होंने क्रमशः 22 और 24 रन बनाए। हालांकि, नॉकआउट चरण और अहम मैचों में सैमसन ने अपनी काबिलियत साबित की। वेस्टइंडीज (सुपर 8 में), इंग्लैंड (सेमीफाइनल में) और न्यूजीलैंड (फाइनल में) के खिलाफ उनकी 97*, 89 और 89 रनों की मैच-विनिंग पारियों ने उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज का खिताब दिलाया। उन्होंने 5 पारियों में 321 रन बनाए। इस दौरान उनका औसत 80.25 और स्ट्राइक रेट 199.37 रहा।
संजू शतक के पीछे भागते तो दुबे को मौका नहीं मिलता
सूर्यकुमार यादव ने स्वीकार किया कि सैमसन की तीन मैच जिताने वाली पारियों ने भारत के लिए टूर्नामेंट का रुख बदल दिया। उन्होंने संजू की जमकर प्रशंसा करते हुए कहा कि वह एक टीम खिलाड़ी हैं और शतक बनाने के चक्कर में व्यक्तिगत उपलब्धियों के पीछे नहीं भागते। सूर्या ने कहा, "बिल्कुल। उन्होंने बड़े मैचों में 97, 89 और 89 रन बनाए। अगर वह चाहते तो तीनों मैचों में आसानी से शतक बना सकते थे, वह इतनी तेज बल्लेबाजी कर रहे थे। लेकिन अगर आप 89 से 100 रन बनाने में 10 गेंदें लेते हैं, जबकि आप इसे तीन या चार गेंदों में कर सकते थे, तो आप दूसरे बल्लेबाज से छह गेंदें छीन रहे हैं। दुबे ने छह गेंदों में 26 रन और आठ गेंदों में 28 रन बनाए। यह सिर्फ इसलिए संभव हुआ क्योंकि संजू ने शतक का पीछा नहीं किया।"





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