bada bhai ya papa bankar idhar kucch nhi hoga know how does Suryakumar yadav handle team players 'बड़ा भाई या पापा बनके इधर कुछ नहीं होगा'.., टीम के खिलाड़ियों को कैसे हैंडल करते हैं सूर्या?, Cricket Hindi News - Hindustan

'बड़ा भाई या पापा बनके इधर कुछ नहीं होगा'.., टीम के खिलाड़ियों को कैसे हैंडल करते हैं सूर्या?

टीम के खिलाड़ियों को कप्तान सूर्यकुमार यादव कैसे हैंडल करते हैं और उनका कप्तानी करने का अंदाज क्या है, उन्होंने प्रेस कॉन्फेंस में फाइनल मुकाबले से पहले खुद बताया है। जानिए क्या-क्या कहा।

Sat, 7 March 2026 10:36 PMVimlesh Kumar Bhurtiya लाइव हिन्दुस्तान
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'बड़ा भाई या पापा बनके इधर कुछ नहीं होगा'.., टीम के खिलाड़ियों को कैसे हैंडल करते हैं सूर्या?

टी-20 विश्व कप 2026 के फाइनल मुकाबले से पहले सूर्यकुमार यादव ने प्रेस कॉन्फेंस में अपनी कप्तानी शैली के बारे में बात की है। पीसी के दौरान उनसे पूछा गया कि आप टीम में सीनियर खिलाड़ी हैं, तो जूनियर्स को कैसे हैंडल करते हैं। इसके जवाब में सूर्यकुमार यादव ने बड़े ही शालीन अंदाज में बताया कि खिलाड़ियों के लिए टीम में पर्सनल फ्रीडम कितनी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि ड्रेसिंग रूप में यही लोग अपनी टर्म डिक्टेट करते हैं और मैं पीछे रहता हूं। मैं इन्हें पूरी आजादी देता हूं। उन्होंने कहा ऐसा नहीं है कि मैं खिलाड़ियों से कभी सख्त लहजे में बात नहीं करता, लेकिन मेरा मानना है कि उन्हें खुला छोड़ने से वे ज्यादा निखरकर सामने आते हैं।

सूर्यकुमार यादव ने स्पष्ट किया कि वे उन पर किसी तरह का सख्त नियंत्रण नहीं रखना चाहते। जब उनसे "बड़ा भाई" बनने की भूमिका के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने विस्तार से जवाब देते हुए कहा, "मुझे समझ में आ गया कि इधर बड़ा भाई या पापा बनके कुछ नहीं होगा इधर इनको छोड़ना होगा कानवान पकड़ के कुछ नहीं होगा इनका इधर इनको खुला छोड़ना होगा तभी इनसे बेस्ट मिल सकता है और वही मैं देखते आ रहा हूं।"

सूर्यकुमार यादव ने कहा कि मैंने जब कप्तानी संभाली थी उसके चार पांच महीने पहले ही समझ गया था कि इन लोगों को हैंडल करने के लिए सख्ती नहीं बरती जा सकती, बल्कि आप इन्हें फ्रीडम देकर सिर्फ टीममेट बनें रहें और सही समय पर सही गाइडेंस दे यही बहुत है।

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सूर्या का मानना है कि जब खिलाड़ियों को पूरी आजादी मिलती है, तभी उनका असली हुनर सामने आता है। उन्होंने कहा, "इन लोग ही डिक्टेट करते हैं अपने टर्म्स तो मैंने देखा है इनको सबको जब फ्रीडम मिलता है तो इन लोग अलग ही कैरेक्टर बन जाते हैं एकदम ग्राउंड पे।"

उन्होंने युवाओं को सलाह दी है कि वे उसी तरह खेलें जैसे वे घरेलू या फ्रेंचाइजी क्रिकेट में खेलते आए हैं। उनके शब्दों में, "मैंने यही बोला है सबको कि जैसे आप लोग खेलते हुए आ रहे हो वैसे ही खेलो स्टेट फ्रेंचाइज़ क्रिकेट इंटरनेशनल क्रिकेट... जो आपके लिए सफल रहा है बस उसे ही फॉलो करते रहो।" उन्होंने बताया कि हर खिलाड़ी की अपनी ताकत होती है और उन्हें खुला छोड़ने से सफलता की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने कहा, "हर प्लेयर का अलग-अलग स्किल और स्ट्रेंथ है... जिनको ऐसा लगता है कि जिनको छोड़ दिया वो परसेंटेज बढ़ते ही गया है स्टार्ट से लेके अभी तक।"

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सूर्यकुमार ने यह भी स्वीकार किया कि एक लीडर के रूप में फाइनल मैच के लिए उन पर दबाव और घबराहट जरूर है, लेकिन वे इसे एक सकारात्मक चुनौती के रूप में देखते हैं क्योंकि उनके अनुसार, "जहां दबाव नहीं, वहां मजा नहीं।

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