बहुत गर्व है; LSG से जीता हुआ मैच हारने पर अजिंक्य रहाणे का अटपटा बयान, मुकुल चौधरी को लेकर कही ये बात
लखनऊ सुपर जाएंट्स से जीता हुआ मैच हारने के बावजूद अजिंक्य रहाणे ने कहा कि उन्हें गर्व है जिस तरह उनके खिलाड़ी खेले। केकेआर ने एक समय पर लखनऊ के 7 विकेट 128 के स्कोर पर गंवा दिए थे। इसके बाद वह मुकुल चौधरी की आंधी को नहीं रोक पाए।

अजिंक्य रहाणे की अगुवाई वाली कोलकाता नाइट राइडर्स को आईपीएल 2026 की तीसरी हार का सामना गुरुवार, 9 अप्रैल को लखनऊ सुपर जाएंट्स के हाथों करना पड़ा। केकेआर की यह 4 मैचों में तीसरी हार है, वहीं पंजाब किंग्स के खिलाफ उनका मैच बारिश की भेंट चढ़ा था। 182 रनों को डिफेंड करते हुए एक समय पर कोलकाता ने लखनऊ के 7 विकेट 128 के स्कोर पर चटका दिए थे, इसके बावजूद वह जीत दर्ज नहीं कर पाए। लखनऊ सुपर जाएंट्स के लिए मुकुल चौधरी ने 27 गेंदों पर 54 रनों की नाबाद पारी खेली, उनका जवाब किसी केकेआर के गेंदबाज के पास नहीं था। लखनऊ ने यह मैच 3 विकेट से जीता। इस जीते हुए मैच को हारने के बावजूद अजिंक्य रहाणे ने कहा कि उन्हें अपने खिलाड़ियों पर गर्व है, जिस तरह वह खेले।
अजिंक्य रहाणे ने मैच के बाद कहा, “यह हार पचाना मुश्किल है। लड़कों पर सच में गर्व है, जिस तरह से हमने खेला। मुझे लगा कि मुकुल (चौधरी) की पारी निर्णायक थी। जिस तरह से उसने अपने शॉट्स खेले, वह बहुत बहादुर था। लेकिन फिर से, ऐसे मैचों में, आप बहुत ज्यादा कमियां नहीं निकालना चाहते। मुझे लगा कि 18 ओवर तक, हम बहुत अच्छा खेल रहे थे। आखिरी दो ओवरों में, थोड़ी-बहुत चूक हो सकती है। लेकिन इसका श्रेय मुकुल और उस साझेदारी को जाता है।
LSG के पास खोने के लिए कुछ नहीं था
उनके (LSG) लिए, खोने के लिए कुछ नहीं था। दो ओवर, जीतने के लिए 30 रन। हर गेंद पर वे जोरदार शॉट लगाने की कोशिश कर रहे थे। और मुझे लगा, जैसा कि मैंने कहा, उन शॉट्स को खेलने के लिए वह सच में बहुत बहादुर था। उसने कुछ शानदार शॉट्स खेले। मुझे लगा कि हमने कुछ शानदार गेंदें भी डालीं, लेकिन जिस तरह से उसने बल्लेबाजी की, वह कमाल की थी। कुछ खास नहीं, मेरा मतलब है, शायद फील्डिंग में, मैं कहूंगा कि एक-दो बार फील्डिंग में चूक हुई, लेकिन उसके अलावा, मुझे लगा कि हमारे गेंदबाजों ने शानदार काम किया।
अजिंक्य रहाणे इस मैच को किस नजर से देखते हैं
देखिए, जब आप कोई मैच हारते हैं, तो आप आसानी से उन चीजों के बारे में सोच सकते हैं जो हम बेहतर कर सकते थे। लेकिन जैसा कि मैंने कहा, बल्लेबाजी के लिहाज से, अंकी (रघुवंशी) और मेरे बीच जो साझेदारी हुई, और फिर रोवमैन पॉवेल और (कैमरन) ग्रीनी के बीच, मुझे लगा कि इस विकेट पर 180-185 का स्कोर बहुत अच्छा था। बड़े शॉट्स खेलना आसान नहीं था। धीमी गेंदें रुककर आ रही थीं, उन्हें मारना मुश्किल था। लेकिन आखिर में, मुझे लगा कि बल्लेबाज को श्रेय देना चाहिए, जिस तरह से उसने (मुकुल ने) बल्लेबाजी की।
क्या आखिरी ओवर की पहली गेंद पर आवेश को घेरने का कोई विचार था?
इरादा आवेश (खान) को स्ट्राइक पर रखने का था। लेकिन फिर से, फील्डिंग पर लगी पाबंदियों और समय की कमी के कारण हमें पांच फील्डर अंदर रखने पड़े। इसलिए गेंदबाजों के लिए भी यह मुश्किल होता है। जब आपके पांच फील्डर सर्कल के अंदर होते हैं, खासकर आखिरी ओवर में गेंदबाजी करते समय, तो यह मुश्किल होता है।”





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