Surrendered Maoist inducted to train security forces in Kanker jungle warfare school माओवादियों के मास्टरमाइंड अब सुरक्षाबलों के मददगार; छत्तीसगढ़ के जंगलों में बनेंगे जवानों का सुरक्षा कवच, Chhattisgarh Hindi News - Hindustan
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माओवादियों के मास्टरमाइंड अब सुरक्षाबलों के मददगार; छत्तीसगढ़ के जंगलों में बनेंगे जवानों का सुरक्षा कवच

कभी जंगलों में सुरक्षाबलों के खिलाफ IED बिछाने वाले 18 माओवादी जो कि अब आत्मसमर्पण कर चुके हैं, उन्हें कांकेर स्थित 'काउंटर टेररिज्म एंड जंगल वारफेयर' (CTJW) कॉलेज में प्रशिक्षक (ट्रेनर) के तौर पर नियुक्त किया गया है।

Tue, 7 April 2026 07:19 PMSourabh Jain हिन्दुस्तान टाइम्स, रितेश मिश्रा, रायपुर
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माओवादियों के मास्टरमाइंड अब सुरक्षाबलों के मददगार; छत्तीसगढ़ के जंगलों में बनेंगे जवानों का सुरक्षा कवच

छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों ने एक अनूठी रणनीति अपनाते हुए सरेंडर कर चुके नक्सलियों को ही पुलिस और सुरक्षाबलों को IED से निपटने का गुर सिखाने का जिम्मा सौंपने का निर्णय लिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सरेंडर करने वाले माओवादियों में ऐसे 18 लोगों की पहचान की गई है, जो कि नक्सलियों के गुरिल्ला दस्ते में थे और इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) को संभालने का काम करते थे। अब उन्हें छत्तीसगढ़ के कांकेर में स्थित काउंटर टेररिज्म एंड जंगल वॉरफेयर (CTJW) कॉलेज में सुरक्षाकर्मियों को ट्रेनिंग देने के लिए शामिल किया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षाबलों की इस पहल का मकसद सरेंडर कर चुके माओवादियों की तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करते हुए माओवाद-विरोधी अभियानों में लगे सुरक्षा बलों की ऑपरेशनल तैयारी और रणनीतिक क्षमता को बढ़ाना है। इस ट्रेनिंग में माओवादियों की रणनीतियों के बारे में प्रैक्टिकल जानकारी दी जाएगी, जैसे कि IED बनाने के तरीके, उन्हें लगाने की रणनीतियां, और जंगली इलाकों में उन्हें एक्टिवेट करने के तरीके।

कई जिलों से खोजकर भेजा गया कांकेर सेंटर

पुलिस द्वारा इस बारे में जारी की गई एक आधिकारिक सूचना में बताया गया कि इन 18 विशेषज्ञों की पहचान सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और नारायणपुर जैसे जिलों में की गई है, और उन्हें कांकेर स्थित ट्रेनिंग सेंटर भेजा गया है। साथ ही कहा गया कि चयन प्रक्रिया में तालमेल बिठाने, दस्तावेजों की देखरेख करने, और यह सुनिश्चित करने के लिए कि पहचाने गए लोग ट्रेनिंग सेंटर में रिपोर्ट करें, एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

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कई लोगों के पास था सिर्फ IED संभालने का काम

उधर बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) पी.सुंदरराज ने इस बारे में कहा कि इस काम के लिए बस्तर रेंज के सात जिलों से ऐसे कैडरों को चुना गया है, जो संगठन में रहने के दौरान अलग-अलग गतिविधियों में सक्रिय थे। उन्होंने कहा, ‘इनमें से कई लोग खास तौर पर IEDs को संभालने और उन्हें लगाने से जुड़े कामों में लगे हुए थे। इनमें से लगभग 15 कैडर पहले माओवादी संगठन में IED ट्रेनर के रूप में काम कर चुके हैं, जबकि 10 लोगों के पास नर्सिंग, मेडिकल या सिलाई-कढ़ाई से जुड़े कामों का हुनर ​​हैं।’

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'पहले निभाई गई भूमिकाओं की जानकारी मिलती है'

सुंदरराज ने कहा कि इस तरह की हुनर-आधारित प्रोफाइलिंग से इन कैडरों द्वारा पहले निभाई गई ऑपरेशनल भूमिकाओं के बारे में कीमती जानकारी मिलती है, और उनके पुनर्वास, निगरानी, ​​और हुनर ​​के आधार पर उन्हें मुख्यधारा में फिर से जोड़ने के लिए सही रणनीतियां बनाने में मदद मिलती है। सुंदरराज ने कहा, ‘इस कवायद से पुलिस और सुरक्षा बलों को इस इलाके में अपने ऑपरेशनल कामों में और अधिक असरदार बनने में मदद मिलेगी।’

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पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों के तकनीकी ज्ञान और उनके अनुभव का लाभ उठाना है। ये पूर्व माओवादी सुरक्षाबलों को नक्सलियों की उन रणनीतियों के बारे में बारीकी से बताएंगे, जिनका इस्तेमाल वे घने जंगलों में करते हैं।

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