Inauguration of Martyrs Memorial for 76 Security Personnel Killed in 2010 Naxal Attack in Chhattisgarh छत्तीसगढ़: नक्सली हमले में शहीद 76 जवानों के सम्मान में स्मारक का निर्माण , Delhi Hindi News - Hindustan
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छत्तीसगढ़: नक्सली हमले में शहीद 76 जवानों के सम्मान में स्मारक का निर्माण

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के ताड़मेटला इलाके में 2010 में नक्सली हमले में जान गंवाने वाले 76 सुरक्षाकर्मियों के लिए एक शहीद स्मारक का उद्घाटन किया गया। यह स्मारक गडगडमेटा गांव में सीआरपीएफ शिविर के नजदीक बनाया गया है। शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी गई और इसे जनता को समर्पित किया गया।

Mon, 6 April 2026 06:49 PMNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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छत्तीसगढ़: नक्सली हमले में शहीद 76 जवानों के सम्मान में स्मारक का निर्माण

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के ताड़मेटला इलाके में 2010 में नक्सली हमले में जान गंवाने वाले 76 सुरक्षाकर्मियों को समर्पित एक शहीद स्मारक का उद्घाटन सोमवार को किया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।इस शहीद स्मारक का लोकार्पण छत्तीसगढ़ को सशस्त्र नक्सलियों से मुक्त घोषित किए जाने के लगभग एक सप्ताह बाद किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि यह स्मारक हमले वाली जगह के करीब, गडगडमेटा गांव में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) शिविर के नजदीक बनाया गया है। उन्होंने बताया कि सीआरपीएफ के महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, राज्य के अतिरिक्त महानिदेशक (नक्सल विरोधी अभियान) विवेकानंद सिन्हा, पुलिस महानिरीक्षक (बस्तर क्षेत्र) सुंदरराज पट्टिलिंगम और सीआरपीएफ, राज्य पुलिस तथा जिला प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने हमले की बरसी पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी और औपचारिक रूप से इस स्मारक को जनता को समर्पित किया।सबसे

घातक सुरक्षा हमलों में से एक06 अप्रैल 2010 को तत्कालीन दंतेवाड़ा जिले (यह इलाका अब सुकमा जिले में आता है) के गडगडमेटा और ताड़मेटला गांवों के मध्य जंगलों में हुए एक नक्सली हमले में 76 सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई थी। इनमें सीआरपीएफ की 62वीं बटालियन के 75 जवान और राज्य पुलिस का एक हवलदार शामिल था। यह देश में सुरक्षा बलों पर हुए सबसे घातक हमलों में से एक था। सुंदरराज ने बताया कि जिला प्रशासन, राज्य पुलिस और सीआरपीएफ ने मिलकर इस स्मारक का निर्माण किया है। उन्होंने बताया कि सुकमा सहित सात जिलों वाले बस्तर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास के लिए स्थानीय पुलिस, सीआरपीएफ, अन्य केंद्रीय सशस्त्र बलों और स्थानीय निवासियों ने सर्वोच्च बलिदान दिए हैं। छत्तीसगढ़ को विशेष रूप से चार दशकों से भी अधिक समय से वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) से जूझ रहे बस्तर क्षेत्र को 31 मार्च को सशस्त्र माओवादियों से मुक्त घोषित कर दिया गया।

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