छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में कर्मचारियों को 2 दिन वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन होगी सुनवाई
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने गर्मियों की छुट्टियों के दौरान कई उपाय लागू किए हैं। इनमें मामलों की वर्चुअल सुनवाई, कर्मचारियों के लिए 'वर्क-फ्रॉम-होम' और कारपूलिंग की व्यवस्था शामिल है।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने गर्मियों की छुट्टियों के दौरान संसाधनों की बचत के लिए कई महत्वपूर्ण उपाय लागू किए हैं। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा के निर्देशानुसार, 18 मई से 15 जून तक कोर्ट की सुनवाई मुख्य रूप से वर्चुअल यानी वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगी, हालांकि जरूरत पड़ने पर व्यक्तिगत रूप से आने की अनुमति भी रहेगी। इसके अलावा, कर्मचारियों को हफ्ते में दो दिन 'वर्क फ्रॉम होम' की सुविधा दी गई है। हालांकि दफ्तर में 50 फीसदी उपस्थिति जरूरी रहेगी। फ्यूल बचाने के लिए अधिकारियों को कारपूलिंग करने की सलाह दी गई है।
अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने गर्मियों की छुट्टियों के दौरान कुछ नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों में कोर्ट की सुनवाई ऑनलाइन करना, कर्मचारियों को घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) देना और कारपूलिंग शामिल है। इन उपायों का मकसद संसाधनों की बचत करना है। रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक, ये आदेश छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने दिए हैं। उन्होंने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की गर्मियों की छुट्टियों के लिए लागू नियमों को ध्यान में रखकर लिया है।
अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में गर्मियों की छुट्टियां 18 मई से शुरू हो कर 15 जून तक चलेंगी। सर्कुलर के मुताबिक, गर्मियों की छुट्टियों के दौरान हाई कोर्ट में मामलों की सुनवाई मुख्य रूप से वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की जाएगी। हालांकि जो वकील किसी वजह से वर्चुअल रूप से शामिल नहीं हो पाएंगे, उन्हें अदालत के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने की अनुमति दी जाएगी। सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर अदालतें किसी भी मामले में व्यक्तिगत सुनवाई का भी निर्देश दे सकती हैं।
हाई कोर्ट और जिला न्यायपालिका के सेक्शन इंचार्ज और कार्यालय प्रमुखों से अनुरोध किया गया है कि वे कर्मचारियों को हफ्ते में दो दिन 'वर्क-फ्रॉम-होम' करने का आदेश दें लेकिन ध्यान रखें कि आफिस में कम से कम 50 फीसदी कर्मचारी मौजूद हों। सर्कुलर के मुताबिक, जिन कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति होगी उनको फोन पर उपलब्ध रहना होगा और जरूरत पड़ने पर आफिस में रिपोर्ट करना होगा। फ्यूल बचाने के मकसद से हाई कोर्ट और जिला न्यायपालिका के न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों को कारपूलिंग भी करने की सलाह दी गई है।
सर्कुलर में रजिस्ट्रार (न्यायिक) और रजिस्ट्रार (कम्प्यूटरीकरण) को जरूरत पड़ने पर वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम ऐसे वक्त में उठाया गया है जब जब प्रधानमंत्री मोदी ने सरकारी खर्च कम करने की बात कही है। 16 मई को छत्तीसगढ़ सरकार ने भी खर्च कम करने के कई नियम लागू किए थे। इनमें मुख्यमंत्री के साथ सूबे के मंत्रियों और सरकारी अफसरों की गाड़ियों के काफिले को छोटा करना और सरकारी पैसे पर विदेश यात्राओं पर रोक लगाना शामिल है।
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