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3 साल की उम्र में कंप्यूटर चलाया, 17 की उम्र में CBSE के सिस्टम तक को हिलाया; कौन हैं सार्थक सिद्धांत?

महज 17 साल की उम्र में CBSE के OSM टेंडरिंग विवाद को उजागर करने वाले सार्थक सिद्धांत ने सिर्फ तीन साल की उम्र से ही कंप्यूटर चलाना सीख लिया था। उन्होंने इस विधा में काफी रूचि है।

Thu, 4 June 2026 06:00 PMHimanshu Tiwari हिन्दुस्तान टाइम्स, संजय मौर्य
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3 साल की उम्र में कंप्यूटर चलाया, 17 की उम्र में CBSE के सिस्टम तक को हिलाया; कौन हैं सार्थक सिद्धांत?

आज पूरे देश में सार्थक सिद्धांत का नाम CBSE की ऑन स्क्रीन मार्किंग यानी OSM सिस्टम की खामियों को सामने लाने की वजह से चर्चा में है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि तकनीक को लेकर उनकी समझ कोई अचानक पैदा हुई चीज नहीं है। इसके पीछे बचपन से चला आ रहा उनका लगाव और सीखने का सफर है। सार्थक ऐसे घर में बड़े हुए जहां कंप्यूटर हमेशा उनके आसपास मौजूद रहे। उनके माता-पिता का संबंध कंप्यूटर इंजीनियरिंग से रहा है, जबकि उनके पिता एक कंप्यूटर अकादमी भी चलाते थे। ऐसे माहौल में तकनीक से उनका परिचय बहुत छोटी उम्र में ही हो गया था। कहा जाता है कि जब दूसरे बच्चे खिलौनों से खेल रहे होते हैं, तब सार्थक ने महज तीन साल की उम्र में कंप्यूटर का माउस चलाना शुरू कर दिया था। बचपन से ही कंप्यूटरों के बीच रहने की वजह से उनकी तकनीक में दिलचस्पी बढ़ती गई और समय के साथ उन्होंने खुद नई-नई चीजें सीखकर अपनी समझ को और मजबूत किया। कंप्यूटर और तकनीक को लेकर सार्थक का अब तक का सफर कैसा रहा? आइए जानते हैं।

तकनीक से है खूब लगाव

हिन्दुस्तान टाइम्स से बातचीत में सार्थक का कहना है कि कंप्यूटरों के बीच रहने से उनके मन में यह जानने की उत्सुकता पैदा हुई कि आखिर तकनीक काम कैसे करती है। स्कूल की पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने खुद से सीखने का रास्ता चुना। कक्षा 6 और 7 के दौरान उन्होंने इंटरनेट और उपलब्ध संसाधनों की मदद से प्रोग्रामिंग सीखना शुरू किया। धीरे-धीरे उनकी रुचि कोडिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की ओर बढ़ती गई। बिना किसी ट्रेनिंग के उन्होंने तकनीकी विषयों को समझना शुरू किया और लगातार नए क्षेत्रों की खोज करते रहे।

कोडिंग से रोबोटिक्स तक के विषयों को समझा

सिर्फ कोडिंग तक सीमित रहने के बजाय सार्थक ने तकनीक के दूसरे क्षेत्रों में भी हाथ आजमाया। उन्होंने रोबोटिक्स से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम किया और इंटरनेट ऑफ थिंग्स के बारे में सीखना शुरू किया। समय के साथ उनकी दिलचस्पी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ओर भी बढ़ी। वर्ष 2023 के आसपास उन्होंने AI को गंभीरता से समझना शुरू किया। आज AI और डेटा साइंस उन क्षेत्रों में शामिल हैं जिनमें वे भविष्य बनाना चाहते हैं। तकनीक के अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी समझ केवल सैद्धांतिक नहीं रही, बल्कि उन्होंने लगातार प्रयोग और अध्ययन के जरिए अपने ज्ञान को मजबूत किया।

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पढ़ाई में भी दिखी खूब लगन

कक्षा 12 में सार्थक ने फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथेमेटिक्स, कंप्यूटर साइंस और अंग्रेजी जैसे विषय चुने। इन विषयों का चयन भी उनके तकनीकी झुकाव को दर्शाता है। उनकी पढ़ाई और सेल्फ स्टडी का असर उस समय भी देखने को मिला जब CBSE के OSM विवाद पर चर्चा हुई। इस दौरान उन्होंने स्कैनर, इमेज क्वालिटी, DPI सेटिंग्स और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली जैसे तकनीकी विषयों पर विस्तार से बात की। इससे यह स्पष्ट हुआ कि वर्षों की मेहनत ने उन्हें तकनीक की गहरी समझ दी है।

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कैसे राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना OSM विवाद

सार्थक सिद्धांत का नाम अचानक सुर्खियों में तब आया जब उन्होंने CBSE के OSM सिस्टम से जुड़े टेंडरिंग प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि टेंडर की शर्तों में अलग-अलग चरणों के दौरान ऐसे बदलाव किए गए, जिनसे एक विशेष कंपनी को लाभ मिला। इन आरोपों के बाद मामला तेजी से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। विवाद इतना बढ़ा कि संसदीय स्तर पर इसकी समीक्षा हुई, शिक्षा मंत्रालय ने जांच शुरू की और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। इस पूरे मामले ने सार्थक को एक युवा तकनीकी विश्लेषक और व्हिसलब्लोअर के रूप में पहचान दिलाई। हालांकि CBSE और शिक्षा मंत्रालय ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है। उनका कहना है कि OSM प्रणाली को मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और सटीक बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया था।

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आगे क्या करना चाहते हैं सार्थक?

CBSE विवाद के कारण चर्चा में आने के बावजूद सार्थक का फोकस अपने करियर और तकनीकी लक्ष्यों पर बना हुआ है। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने की इच्छा जताई है और फिलहाल प्रवेश परीक्षाओं के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। उनकी प्राथमिकता बेंगलुरु में किसी इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लेना है। उनका मानना है कि तकनीक के जरिए समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। सार्थक बताते हैं कि सिर्फ AI या डेटा साइंस ही महत्वपूर्ण नहीं हैं। बातचीत में सार्थक ने बताया कि वे सिविक टेक्नोलॉजी में भी विशेष रुचि रखते हैं। यह ऐसा क्षेत्र है जिसमें तकनीक का उपयोग सरकारी सेवाओं और सार्वजनिक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। उनका मानना है कि तकनीक का सबसे बड़ा प्रभाव तब दिखाई देता है जब वह आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाती है। यही वजह है कि वे भविष्य में AI, डेटा साइंस और सिविक टेक्नोलॉजी को जोड़कर वास्तविक समस्याओं पर काम करना चाहते हैं।

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