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UPSC क्लियर करने के बाद क्या? जानिए मसूरी के LBSNAA में कैसी होती है एक IAS की जिंदगी

UPSC परीक्षा पास करने के बाद LBSNAA में ट्रेनिंग कैसे होती है? जानिए IAS, IPS और IFS अफसरों का डेली रूटीन, फाउंडेशन कोर्स, भारत दर्शन और ट्रेनिंग स्टाइपेंड की पूरी जानकारी।

Sat, 7 March 2026 11:36 AMHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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UPSC क्लियर करने के बाद क्या? जानिए मसूरी के LBSNAA में कैसी होती है एक IAS की जिंदगी

हर साल लाखों युवा अपनी आंखों में UPSC क्लियर करके देश का अफसर बनने का एक सपना बड़ा सपना सजाते हैं । सालों की कड़ी मेहनत, रातों की नींद की कुर्बानी और किताबों के बीच गुज़ारे गए अनगिनत घंटों के बाद, जब फाइनल रिजल्ट में नाम चमकता है, तो जिंदगी अचानक एक नया मोड़ ले लेती है। एस्पिरेंट कहलाने वाला युवा अचानक रातों-रात "ऑफिसर ट्रेनी" (Officer Trainee - OT) बन जाता है। लेकिन असली सफर तो इसके बाद शुरू होता है। यह सफर शुरू होता है पहाड़ों की रानी मसूरी की ठंडी वादियों में, जहां लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) स्थित है। हैप्पी वैली की उन सर्द हवाओं के बीच, यह सिर्फ एक ट्रेनिंग सेंटर नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रयोगशाला है जहां देश का भविष्य गढ़ा जाता है। आइए, तफसील से जानते हैं कि इस प्रतिष्ठित अकादमी में एक ट्रेनी अफसर की जिंदगी कैसी होती है और उनकी ट्रेनिंग का पूरा प्रोसेस क्या है।

फाउंडेशन कोर्स: जहां से होती है असली शुरुआत

LBSNAA में कदम रखते ही सबसे पहला और सबसे खास पड़ाव होता है 15 हफ्तों का "फाउंडेशन कोर्स"। यह वो वक्त होता है जब IAS, IPS, IFS और IRS जैसी सभी केंद्रीय सेवाओं के लिए चुने गए अफसर एक साथ ट्रेनिंग लेते हैं। इसका सबसे बड़ा मकसद है उनके बीच आपसी तालमेल और ताउम्र रहने वाली दोस्ती कायम करना। क्लासरूम में इन्हें देश के कानून, अर्थशास्त्र, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और भारत के समृद्ध इतिहास की तालीम दी जाती है। यहां अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और संस्कृतियों से आए युवा एक छत के नीचे रहते हैं, जिससे उन्हें भारत की विशाल विविधता को करीब से समझने का बेहतरीन मौका मिलता है।

स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग: जब रास्ते होते हैं जुदा

फाउंडेशन कोर्स मुकम्मल होने के बाद, इन अफसरों के रास्ते अलग-अलग हो जाते हैं। जो उम्मीदवार अन्य सेवाओं के लिए चुने जाते हैं, वो अपनी-अपनी स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग के लिए दूसरी अकादमियों की तरफ रुख कर लेते हैं:

IPS (इंडियन पुलिस सर्विस): पुलिस अफसरों को आगे की कड़क ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद की 'सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस अकादमी' (SVPNPA) भेजा जाता है।

IFS (इंडियन फॉरेन सर्विस): विदेशों में देश की नुमाइंदगी करने वाले IFS अफसरों का सफर दिल्ली के 'सुषमा स्वराज फॉरेन सर्विस इंस्टीट्यूट' की तरफ मुड़ जाता है।

IRS (इंडियन रेवेन्यू सर्विस): टैक्स और रेवेन्यू का जिम्मा संभालने वाले अफसरों को 'नेशनल एकेडमी ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस', नागपुर भेज दिया जाता है।

इन सबके बीच, सिर्फ IAS अफसर ही ऐसे होते हैं जो अगले दो सालों तक LBSNAA में ही रहकर अपने काम की बारीकियों को सीखते हैं।

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डेली रूटीन: अनुशासन और मेहनत का कॉकटेल

अगर आपको लगता है कि अफसर बनने के बाद जिंदगी आराम से कटती है, तो आपको अपनी राय बदल लेनी चाहिए। LBSNAA का डेली रूटीन बेहद सख्त और अनुशासित होता है।

सुबह 6:00 बजे: अलार्म बेल के साथ दिन शुरू होता है, जहां ग्राउंड पर पीटी (PT) या योगा सेशन में हिस्सा लेना सभी के लिए लाजमी है।

सुबह 9:00 से शाम 4:00 बजे तक: क्लासरूम लेक्चर्स और मुश्किल केस स्टडीज पर माथापच्ची होती है।

शाम 5:00 बजे के बाद: यह वक्त थोड़ा सुकून भरा होता है, जहां ये ट्रेनी अफसर स्पोर्ट्स, घुड़सवारी (Horse riding), स्विमिंग और दूसरी एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में हिस्सा लेते हैं।

डिनर: अकादमी का रात का खाना भी कोई आम खाना नहीं होता; यह एक फॉर्मल इवेंट होता है जहां अफसरों को डाइनिंग एटिकेट्स (Dining Etiquettes) सिखाए जाते हैं।

भारत दर्शन और हिमालयन ट्रेक: देश को करीब से जानने का मौका

क्लासरूम की पढ़ाई के अलावा ट्रेनिंग का सबसे रोमांचक हिस्सा "भारत दर्शन" होता है। यह पूरे देश का एक ऐसा टूर है, जो अफसरों को जमीनी हकीकत, अलग-अलग राज्यों की संस्कृति और वहां की असल प्रशासनिक चुनौतियों से रूबरू कराता है। इसके साथ ही, हिमालयन ट्रेकिंग भी उनके शेड्यूल का एक अहम हिस्सा है। ऊंचे और दुर्गम पहाड़ों पर चढ़ने का मकसद सिर्फ सैर-सपाटा नहीं है, बल्कि यह उनकी शारीरिक और मानसिक मजबूती का एक कड़ा इम्तिहान होता है।

डिस्ट्रिक्ट ट्रेनिंग: फील्ड का असली तजुर्बा

LBSNAA में थ्योरी और बेसिक ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, IAS ट्रेनीज को एक साल की फील्ड ट्रेनिंग के लिए उनके अलॉट किए गए कैडर (राज्य) में भेज दिया जाता है। असली प्रैक्टिकल नॉलेज यहीं मैदान में मिलती है। यहां वो एक SDM के तौर पर काम सीखते हैं, सिस्टम की अंदरूनी बारीकियों को समझते हैं, सरकारी फाइलें कैसे पास होती हैं और आवाम की असल परेशानियों को कैसे सुलझाया जाता है, इसका सीधा तजुर्बा हासिल करते हैं।

स्टाइपेंड: ट्रेनिंग के दौरान कितने पैसे मिलते हैं?

अब बात करते हैं उस सवाल की जो हर UPSC एस्पिरेंट के जहन में कभी न कभी जरूर आता है कि "ट्रेनिंग के दौरान पैसे कितने मिलते हैं?" आपको बता दें कि इस दौरान बाकायदा सैलरी नहीं, बल्कि स्टाइपेंड (Stipend) दिया जाता है। सातवें वेतन आयोग (Seventh Pay Commission) के लेवल 10 के मुताबिक यह स्टाइपेंड करीब 56,100 रुपये होता है। लेकिन यह पूरा पैसा हाथ में नहीं आता। इसमें से मेस (खाने का खर्च), यूनिफॉर्म और रहने (Accommodation) का किराया काट लिया जाता है। सारे डिडक्शन के बाद एक अफसर के हाथ में करीब 35,000 से 40,000 रुपये टेक-होम अमाउंट के तौर पर आते हैं।

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