टीईटी और पुरानी पेंशन पर फूटा शिक्षकों का गुस्सा, 22 जून को सचिवालय घेरने की तैयारी
टीईटी की बाध्यता खत्म करने और पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर उत्तराखंड के शिक्षकों ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। 22 जून को सचिवालय कूच और जुलाई से प्रदेशव्यापी ज्ञापन अभियान चलाया जाएगा।

टीईटी की बाध्यता और पुरानी पेंशन बहाली जैसे लंबे समय से लंबित मुद्दों पर अब शिक्षकों का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। सरकार की ओर से मांगों पर ठोस पहल न होने से नाराज शिक्षकों ने बड़े आंदोलन का रास्ता चुना है। राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने साफ संकेत दिया है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। गुरुवार को राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ की प्रांतीय कार्यकारिणी के नेतृत्व में विभिन्न जिलों के पदाधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में संगठन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई। पदाधिकारियों ने माना कि शिक्षक समुदाय की प्रमुख मांगों पर अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
22 जून को सचिवालय कूच का ऐलान
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 22 जून को देहरादून में सचिवालय कूच किया जाएगा। इस प्रदर्शन के जरिए शिक्षक अपनी मांगों को सरकार के सामने मजबूती से रखेंगे। सभी जिलों से आए प्रतिनिधियों ने भरोसा दिलाया कि आंदोलन को सफल बनाने के लिए हजारों शिक्षक इसमें शामिल होंगे। संगठन का दावा है कि यह प्रदर्शन हाल के वर्षों में शिक्षकों की सबसे बड़ी एकजुटता का उदाहरण बन सकता है।
कार्यक्रम संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई
देहरादून में होने वाले सभी कार्यक्रमों के सफल संचालन के लिए संघ के जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह रावत को कार्यक्रम संयोजक नियुक्त किया गया है। उन्हें आंदोलन की तैयारियों और विभिन्न जिलों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि कार्यक्रम व्यवस्थित तरीके से संचालित हो सके।
जुलाई से शुरू होगा प्रदेशव्यापी ज्ञापन अभियान
बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि एक जुलाई से पूरे प्रदेश में व्यापक ज्ञापन अभियान चलाया जाएगा। शिक्षक अपने-अपने क्षेत्रों के विधायक, सांसद, शिक्षामंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजेंगे। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य टीईटी की बाध्यता से शिक्षकों को मुक्त कराने की मांग को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना है।
मांगें नहीं मानी गईं तो और तेज होगा आंदोलन
शिक्षक संघ के नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि शिक्षक लंबे समय से अपनी समस्याओं के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन लगातार अनदेखी के कारण अब संघर्ष का रास्ता अपनाना मजबूरी बन गया है।
कई जिलों के पदाधिकारी रहे मौजूद
बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में पदाधिकारी शामिल हुए। इनमें टिहरी के जिलाध्यक्ष चंद्रवीर नेगी, उत्तरकाशी के जिला मंत्री जनक बिष्ट, अल्मोड़ा के जिलाध्यक्ष किशोर जोशी, जगदीश भंडारी, चमोली से दिगंबर नेगी और जिलामंत्री मुकेश नेगी, चंपावत के अध्यक्ष उत्तम सिंह फर्त्याल, मंत्री कीर्ति भट्ट, कोषाध्यक्ष कमल जोशी तथा बागेश्वर के अध्यक्ष दीपक रावत समेत कई अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने आंदोलन को सफल बनाने के लिए एकजुट होकर काम करने का संकल्प लिया।




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