TET CTET: Teachers 20 years teaching experience should be exempted from the mandatory TET requirement BJP MP TET : 20-25 साल से पढ़ा रहे शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से मिले छूट, संसद में BJP सांसद ने उठाई मांग, Career Hindi News - Hindustan
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TET : 20-25 साल से पढ़ा रहे शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से मिले छूट, संसद में BJP सांसद ने उठाई मांग

संसद में बीजेपी के एक सदस्य ने 'टीईटी' प्रावधान अनिवार्य किए जाने से वरिष्ठ शिक्षकों को हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया और उन्हें इससे छूट देने का केंद्र सरकार से आग्रह किया।

Sat, 14 March 2026 09:47 AMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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TET : 20-25 साल से पढ़ा रहे शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से मिले छूट, संसद में BJP सांसद ने उठाई मांग

राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक सदस्य ने 'टीईटी' प्रावधान अनिवार्य किए जाने से वरिष्ठ शिक्षकों को हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया और उन्हें इससे छूट देने का केंद्र सरकार से आग्रह किया। भाजपा सदस्य धनंजय भीमराव महादिक ने उच्च सदन में विशेष उल्लेख के जरिए यह मुद्दा उठाया और कहा कि यह लाखों शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून 2009 के तहत कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) प्रावधान अनिवार्य किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रावधान का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना है जो एक सराहनीय कदम है लेकिन वास्तविक समस्या उन वरिष्ठ और अनुभवी शिक्षकों के सामने पैदा हो रही है जो पिछले 20-25 वर्षों से निरंतर अध्यापन कार्य कर रहे हैं।

वरिष्ठ शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट दी जाए

भाजपा सदस्य ने कहा कि इस प्रावधान के कारण वरिष्ठ शिक्षकों में मानसिक दबाव बढ़ रहा है, उनमें असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है और सेवा सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक दशकों से अध्यापन कार्य कर रहे हैं, उनके अनुभव और सेवा को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि 20 से 25 वर्ष तक की सेवा पूर्ण कर चुके वरिष्ठ शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से छूट दी जाए ताकि लाखों शिक्षकों को राहत मिल सके।

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एमपीलैड में वृद्धि किए जाने की मांग

विशेष उल्लेख के जरिए ही भाजपा सदस्य लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने छावनी क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं से जुड़ा मुद्दा उठाया वहीं उनकी ही पार्टी की माया नारोलिया ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की चुनौतियों का जिक्र किया। तेदेपा के मस्थान राव यादव वीधा ने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (एमपीलैड) में वृद्धि किए जाने की मांग की वहीं भाजपा के भीम सिंह ने राष्ट्रीय दिव्यांग आयोग का गठन किए जाने की मांग की।

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कोचिंग संस्थानों की ऊंची फीस का मुद्दा भी गूंजा

आम आदमी पार्टी (आप) संदीप कुमार पाठक ने कोचिंग संस्थानों की ऊंची फीस का मुद्दा उठाया जबकि कांग्रेस के अखिलेश प्रसाद सिंह ने बिहार की राजधानी पटना के पास फुलवारीशरीफ में एक रेलवे क्रॉंसिंग को बंद कर देने से लोगों को हो रही परेशानी का जिक्र किया। सिंह ने रेलवे क्रॉंसिंग के पास जल्द से जल्द अंडरपास का निर्माण पूरा कराने की मांग की। बीजू जनता दल (बीजद) के निरंजन बिशी ने ओडिशा में एम्स अस्पताल स्थापित किए जाने की मांग की वहीं मनोनीत सदस्य सतनाम सिंह संधू ने डेयरी उद्योग से जुड़ा मुद्दा उठाया।

भाजपा के दोरजी त्सेरिंग लेपचा, मयंक कुमार नायक, रायगा कृष्णैया और वाईएसआर कांग्रेस के सुभाषचंद्र बोस पिल्लै ने भी विशेष उल्लेख के जरिए अपने-अपने मुद्दे उठाए।

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