Supreme Court refuses plea to conduct NEET-UG re-test in online cbt mode NEET को ऑनलाइन कराने से सुप्रीम कोर्ट का साफ इनकार, 21 जून को ऑफलाइन मोड में ही होगी परीक्षा, Career Hindi News - Hindustan
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NEET को ऑनलाइन कराने से सुप्रीम कोर्ट का साफ इनकार, 21 जून को ऑफलाइन मोड में ही होगी परीक्षा

NEET UG 2026: सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) यानी ऑनलाइन मोड में दोबारा आयोजित कराने की मांग वाली याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

Mon, 1 June 2026 08:28 PMPrachi लाइव हिन्दुस्तान
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NEET को ऑनलाइन कराने से सुप्रीम कोर्ट का साफ इनकार, 21 जून को ऑफलाइन मोड में ही होगी परीक्षा

NEET Paper Leak Case: देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा, नीट-यूजी (NEET-UG 2026) को लेकर सुप्रीम कोर्ट से एक बहुत ही महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला आया है। सर्वोच्च अदालत ने नीट-यूजी परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) यानी ऑनलाइन मोड में दोबारा आयोजित कराने की मांग वाली याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

क्यों दायर की गई थी याचिका और क्या थी मांग?

यह याचिका नीट परीक्षा की तैयारी करने वाले कुछ गंभीर उम्मीदवारों द्वारा दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क यह था कि हाल के वर्षों में ऑफलाइन नीट परीक्षा के दौरान देश के कई हिस्सों से पेपर लीक, डमी उम्मीदवार बैठने, ओएमआर शीट में हेरफेर और कई प्रकार की प्रशासनिक गड़बड़ियों की खबरें सामने आई हैं।

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याचिकाकर्ताओं ने अदालत से गुहार लगाई थी कि इन सभी सुरक्षा चूकों और धांधलियों को रोकने का एकमात्र प्रभावी उपाय यही है कि परीक्षा को पूरी तरह से डिजिटल कर दिया जाए। उन्होंने मांग की थी कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को निर्देश दिए जाएं कि वह भविष्य में मेडिकल प्रवेश परीक्षा का आयोजन केवल कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में ही कराए, जैसे कि जेईई मेन (JEE Main) की परीक्षा कराई जाती है। छात्रों का मानना था कि ऑनलाइन मोड अधिक सुरक्षित और पारदर्शी होगा।

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सुप्रीम कोर्ट ने क्यों किया इनकार?

प्रधान न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस याचिका पर विचार करने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नीतिगत मामलों में हस्तक्षेप करना अदालत का काम नहीं है। परीक्षा का मोड क्या होना चाहिए—ऑनलाइन या ऑफलाइन—यह पूरी तरह से विशेषज्ञों और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था (NTA) के अधिकार क्षेत्र में आता है।

अदालत ने यह भी संकेत दिया कि भारत में बुनियादी ढांचे और देश के ग्रामीण व दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लाखों गरीब छात्रों की स्थिति को देखते हुए, अचानक पूरी परीक्षा को ऑनलाइन मोड में स्थानांतरित करना प्रैक्टिकली नहीं हो सकता है। पेन-पेपर मोड ग्रामीण छात्रों के लिए अधिक सुलभ माना जाता है, जिनके पास कंप्यूटर और ऑनलाइन मॉक टेस्ट के पर्याप्त साधन नहीं होते हैं।

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छात्रों के लिए अब आगे की राह

सुप्रीम कोर्ट के इस अंतिम फैसले के बाद अब छात्रों के बीच चल रही सभी तरह की अटकलों पर विराम लग गया है। नीट-यूजी के एस्पिरेंट्स के लिए अब संदेश बिल्कुल साफ है—उन्हें अपनी तैयारी के पहले के तरीकों को ही मजबूत करना होगा। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे डिजिटल स्क्रीन के बजाय पेन और ओएमआर शीट पर ही अपने मॉक टेस्ट की प्रैक्टिस जारी रखें। क्योंकि 180 मिनट में 200 प्रश्न पढ़ना और ओएमआर के गोलों को बिना गलती के सटीक रूप से भरना एक अलग प्रकार की कुशलता की मांग करता है, जो केवल ऑफलाइन अभ्यास से ही संभव है।

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