18 की उम्र में खोई आंखों की रोशनी, मां ने लिखा UPSC का पेपर, बेटा AIR 7 लाकर बना IAS
IAS Samyak Jain: आज हम आपको एक ऐसे योद्धा की कहानी बताने जा रहे हैं जिन्होंने दृष्टिबाधित होने के बावजूद यूपीएससी में ऑल इंडिया रैंक 7 हासिल कर इतिहास रच दिया। यह कहानी है सम्यक जैन की।

IAS Samyak Jain: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए न केवल कड़ी मेहनत, बल्कि धैर्य और अटूट इच्छाशक्ति की भी आवश्यकता होती है। आज हम आपको एक ऐसे योद्धा की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने शारीरिक बाधाओं को मात देकर यह साबित कर दिया कि अगर हौसले बुलंद हों, तो मंजिल कदम चूमती है। यह कहानी है सम्यक जैन की, जिन्होंने दृष्टिबाधित होने के बावजूद यूपीएससी में ऑल इंडिया रैंक 7 हासिल कर इतिहास रच दिया।
जब आंखों के सामने छा गया अंधेरा
दिल्ली के रहने वाले सम्यक जैन का जीवन सामान्य चल रहा था, लेकिन जब वे लगभग 18 साल के थे, तो उन्हें पता चला कि उनकी आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम हो रही है। डॉक्टर्स ने बताया कि उन्हें एक दुर्लभ आंखों की बीमारी है। 20-21 साल की उम्र तक आते-आते उन्होंने अपनी देखने की क्षमता पूरी तरह खो दी। एक युवा छात्र के लिए यह किसी गहरे सदमे से कम नहीं था, लेकिन सम्यक ने इसे अपनी कमजोरी बनाने के बजाय अपनी ताकत बनाने का फैसला किया।
मां ने लिखें सम्यक के UPSC पेपर
सम्यक की इस असाधारण सफलता के पीछे उनकी मां, वंदना जैन का सबसे बड़ा योगदान रहा है। सम्यक देख नहीं सकते थे, इसलिए वे अपनी पढ़ाई के लिए ऑडियो बुक्स और स्क्रीन-रीडिंग सॉफ्टवेयर पर निर्भर थे। लेकिन परीक्षा के दौरान सबसे बड़ी चुनौती लिखने की थी।
यूपीएससी की मुख्य परीक्षा में, उनकी मां ने उनकी 'राइटर' (लेखक) के रूप में मदद की। सम्यक उत्तर बोलते जाते थे और उनकी मां उन शब्दों को पेपर पर उतारती थीं। मां-बेटे की इस जुगलबंदी ने शब्दों के माध्यम से सफलता की एक ऐसी इबारत लिखी, जिसने सम्यक को सीधे प्रशासनिक सेवा (IAS) के शिखर पर पहुंचा दिया।
कठिन परिश्रम और रणनीति
सम्यक ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली से पूरी की और उसके बाद जेएनयू (JNU) से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एमए किया। यूपीएससी की तैयारी के दौरान उन्होंने कभी भी अपनी दिव्यांगता को बहाना नहीं बनाया। वे रोजाना कई घंटों तक ऑडियो नोट्स सुनते थे और करेंट अफेयर्स के लिए अखबारों के डिजिटल वर्जन का उपयोग करते थे। सम्यक के अनुसार, डिजिटल तकनीक ने उनकी तैयारी को आसान बनाने में बहुत मदद की। 2021 में यह उनका दूसरा प्रयास था, जिसमें उन्होंने सातवीं रैंक हासिल कर सबको चौंका दिया।
युवाओं के लिए संदेश
सम्यक जैन की सफलता आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो छोटी-छोटी बाधाओं से घबराकर अपने सपनों को छोड़ देते हैं। सम्यक कहते हैं, "अगर आप में कुछ कर गुजरने की चाहत है, तो दुनिया की कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती। बस आपको खुद पर और अपनी मेहनत पर भरोसा होना चाहिए।"




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