न टॉयलेट, न छुट्टी, काम के लंबे घंटे, 25 साल के NIT इंजीनियर ने ठुकराई 19 लाख रुपये की सरकारी नौकरी
एनआईटी इंजीनियर सौरभ मित्तल ने करीब 19 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली BPCL की नौकरी वर्क-लाइफ बैलेंस और खराब कार्य परिस्थितियों के कारण छोड़ दी। मित्तल का दावा है कि कार्यस्थल पर टॉयलेट, पीने के पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी थी।

भारतीय समाज में सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पीएसयू) में नौकरी पाना काफी बड़ी उपलब्धि माना जाता है। यहां मिलने वाली अच्छी सैलरी, नौकरी की सुरक्षा, और इन पदों से जुड़ा सामाजिक सम्मान इन्हें बहुत ज्यादा आकर्षक बनाते हैं। लेकिन इन सबके उलट सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसे शख्स की कहानी वायरल हो रही है जिसने वर्क लाइफ बैलेंस के लिए सरकारी कंपनी की नौकरी को ठुकरा दिया। लोग इस युवा इंजीनियर के फैसले की तारीफ कर रहे हैं। एनआईटी कुरुक्षेत्र के 25 साल के इंजीनियर सौरभ मित्तल की कहानी ने लोगों का ध्यान खींचा है। करीब 19 लाख रुपये सालाना के सैलरी पैकेज वाली बीपीसीएल (BPCL) की नौकरी मिलने के बावजूद मित्तल ने यह नौकरी छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि उन्हें ऑफिस में काफी मुश्किल हालात और लगातार दबाव का सामना करना पड़ा।
आपको बता दें कि बीपीसीएल यानी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड ऑयल एंड गैस सेक्टर की महारत्न पीएसयू कंपनी है। इस सरकारी कंपनी में जॉब पाना देश के लाखों युवाओं का सपना होता है, खासतौर उनका जो कि गवर्नमेंट जॉब की तैयारी करते हैं।
न तो प्रॉपर टॉयलेट था, न ही पीने का पानी
सौरभ मित्तल ने 22 साल की उम्र में BPCL कंपनी को जॉइन किया था। भारत में कई इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स की तरह उन्होंने भी पीएसयू की नौकरी को अपने करियर का एक बड़ा पड़ाव माना था। हालांकि उनके मुताबिक नौकरी शुरू करने के बाद का अनुभव उनकी कल्पना से बिल्कुल अलग था। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने एक ऐसे गोदाम में काम किया, जहां बुनियादी सुविधाओं की कमी थी। मित्तल के अनुसार, वहां न तो प्रॉपर टॉयलेट था, न ही पीने का पानी, और काम की जगह पर कई सुविधाएं खराब थीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन मुद्दों के बारे में की गई शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया। मित्तल ने यह भी बताया कि हालात इतने मुश्किल हो गए थे कि उन्हें ऑफिस के समय में अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए अपने घर का इस्तेमाल करना पड़ता था।
सीनियर चिल्लाते थे, पर्सनल काम करवाते थे
सोशल मीडिया पर पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा कि वहां का वर्क कल्चर भी काफी पुराना और तनावपूर्ण था। उनके मुताबिक सीनियर अक्सर कर्मचारियों पर चिल्लाते थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनसे सीनियर अधिकारियों के निजी काम करवाए जाते थे, जिनमें एयरपोर्ट से लाना-ले जाना और होटल की बुकिंग करना शामिल था।
छुट्टी के दिन भी काम, तरक्की धीमा
मित्तल ने आगे कहा कि ऑफिस का समय खत्म होने के बाद भी काम का दबाव कम नहीं होता था। कथित तौर पर देर रात तक और यहां तक कि वीकेंड पर भी फोन आते रहते थे। छुट्टी मिलना मुश्किल था, जबकि प्रमोशन और सैलरी में बढ़ोतरी बहुत धीमी गति से होती थी।
अपने फैसले के बारे में बताते हुए मित्तल ने कहा, 'मैं अपनी पूरी जिंदगी इस तरह बिताने की कल्पना भी नहीं कर सकता था।'
सहकर्मी बड़ी उम्र के
उन्होंने यह भी बताया कि उनके आस-पास ज्यादातर कर्मचारी उनसे काफी अधिक उम्र के थे, जिससे उन्हें लगा कि आगे बढ़ने और कुछ नया सीखने के मौके बहुत कम हैं।
परिवार की मिली-जुली भावनाएं
मित्तल के लिए PSU की नौकरी छोड़ना कोई आसान फैसला नहीं था, खासकर इसलिए क्योंकि कई भारतीय घरों में ऐसी नौकरियों को बहुत ज्यादा अहमियत दी जाती है। उन्होंने बताया कि उनके पिता उनके इस फैसले से नाराज थे, क्योंकि सरकारी नौकरी में बहुत इज्जत और सुरक्षा होती है। हालांकि उनकी मां ने उनका साथ दिया, क्योंकि उन्होंने देखा कि सौरभ कितना तनाव झेल रहे थे।
सोशल मीडिया यूजर्स का मिला समर्थन
जैसे-जैसे उनकी कहानी ऑनलाइन जगत में वायरल हुई, उस पर तेजी से प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कई लोगों ने उनके समर्थन में प्रतिक्रियाएं दीं और उनके अनुभव से खुद को जोड़कर देखा। एक व्यक्ति ने लिखा, 'वाकई, यह एक अच्छा और सोच-समझकर लिया गया फैसला है, जो हममें से कई लोगों ने किया है और अपने लिए बेहतर रास्ते बनाए हैं। आपको भी शुभकामनाएं।'
एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, 'मैं इससे खुद को जोड़कर देख सकता हूं, क्योंकि मैं भी 16 साल पहले इसी दौर से गुजरा था। आपके सभी प्रयासों के लिए शुभकामनाएं!'
डिस्क्लेमर : यह लेख कथित तौर पर सौरभ मित्तल द्वारा शेयर किए गए बोस्ट और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं पर आधारित है। लाइव हिन्दुस्तान ने इस लेख में बताए गए काम करने की जगहों की स्थितियों, अनुभवों या घटनाओं से जुड़े दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है।




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