NMC : NMC का बड़ा फैसला: विदेशी मेडिकल छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई के बदले लेनी होगी 'ऑनसाइट' ट्रेनिंग
NMC :जिन छात्रों ने विदेश में अपने मेडिकल कोर्स के दौरान थ्योरी या प्रैक्टिकल की पढ़ाई ऑनलाइन की थी, उन्हें अब एक निर्धारित समय अवधि के लिए भारत के मेडिकल कॉलेजों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर पढ़ाई पूरी करनी होगी।

NMC : विदेश से मेडिकल की पढ़ाई (MBBS) करने वाले भारतीय छात्रों के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने एक महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया है। यह फैसला उन छात्रों को ध्यान में रखकर लिया गया है जिन्होंने कोरोना महामारी या युद्ध जैसी विषम परिस्थितियों के कारण अपनी पढ़ाई का कुछ हिस्सा ऑनलाइन माध्यम से पूरा किया था। एनएमसी ने साफ कर दिया है कि ऑनलाइन ली गई कक्षाओं की भरपाई के लिए छात्रों को भारत में फिजिकल यानी ऑनसाइट क्लास और क्लिनिकल ट्रेनिंग लेनी अनिवार्य होगी।
एनएमसी का यह कदम चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए है कि भविष्य के डॉक्टरों के पास पूरा प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस हो। कमीशन ने उन फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स (FMGs) के लिए नियमों को और अधिक स्पष्ट किया है जो भारत में प्रैक्टिस करने के लिए अनिवार्य मेडिकल रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में हैं।
क्या है एनएमसी का नया आदेश?
कमीशन द्वारा जारी सर्कुलर के मुताबिक, जिन छात्रों ने विदेश में अपने मेडिकल कोर्स के दौरान थ्योरी या प्रैक्टिकल की पढ़ाई ऑनलाइन की थी, उन्हें अब एक निर्धारित समय अवधि के लिए भारत के मेडिकल कॉलेजों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर पढ़ाई पूरी करनी होगी। छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई की अवधि के बराबर या कमीशन द्वारा तय की गई अवधि तक फिजिकल क्लास लेनी होगी। चिकित्सा एक ऐसा क्षेत्र है जहां केवल किताबों से काम नहीं चलता। इसलिए, एनएमसी ने क्लिनिकल रोटेशन और अस्पतालों में व्यावहारिक प्रशिक्षण को सबसे अधिक महत्व दिया है।
किन छात्रों पर लागू होगा यह नियम?
यह नियम मुख्य रूप से उन छात्रों के लिए है जो यूक्रेन युद्ध या कोविड-19 लॉकडाउन की वजह से अपने विदेशी कॉलेजों को छोड़कर भारत वापस आ गए थे और वहां से ऑनलाइन क्लासेस ले रहे थे। एनएमसी ने पहले ही इन छात्रों को दो साल की अनिवार्य इंटर्नशिप (CRMI) करने की छूट दी थी, बशर्ते उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली हो। अब इस नए स्पष्टीकरण से उन छात्रों के डाउट्स दूर हो गए हैं जिनकी ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर रजिस्ट्रेशन में दिक्कत आ रही थी।
गुणवत्ता से समझौता नहीं
एनएमसी का मानना है कि मेडिकल प्रैक्टिस में फिजिकल ट्रेनिंग और अनुभव की आवश्यकता होती है। ऑनलाइन माध्यम से सीखी गई चीजें क्लिनिकल डायग्नोसिस (रोग की पहचान) और सर्जरी जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में पर्याप्त नहीं हो सकतीं। इसीलिए, ऑनसाइट क्लासेस के माध्यम से छात्रों के कौशल को फिर से परखा और सुधारा जाएगा।
छात्रों के लिए आगे की राह
विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स को अब अपने संबंधित राज्य चिकित्सा परिषदों (State Medical Councils) के माध्यम से उन कॉलेजों की लिस्ट देखनी होगी जहां वे इन ऑनसाइट क्लासेस के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उन्हें भारत में डॉक्टर के रूप में रजिस्ट्रेशन मिल पाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि इससे छात्रों का समय थोड़ा अधिक लग सकता है, लेकिन लंबी अवधि में यह उनके करियर और मरीजों की सुरक्षा के लिए एक बेहतर कदम साबित होगा।




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