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NEET में 67 टॉपर, 2024 में क्या हुआ था बवाल, 2 साल पहले बदनाम हुआ राजस्थान का सीकर फिर चर्चा में क्यों

नीट यूजी परीक्षा 2026 रद्द कर दी गई है। इस विवाद ने साल 2024 के नीट पेपर लीक विवाद की यादें ताजा कर दी हैं। दो साल पहले पेपर लीक, ग्रेस मार्क्स, असामान्य रिजल्ट और परीक्षा की पारदर्शिता को नीट यूजी परीक्षा बुरी तरह विवादों से घिर गई थी। सीकर भी फिर चर्चा में आ गया है।

Tue, 12 May 2026 04:48 PMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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NEET में 67 टॉपर, 2024 में क्या हुआ था बवाल, 2 साल पहले बदनाम हुआ राजस्थान का सीकर फिर चर्चा में क्यों

पेपर लीक के संदेह में 3 मई को हुई नीट यूजी परीक्षा 2026 रद्द कर दी गई है। इस विवाद ने साल 2024 के नीट पेपर लीक विवाद की यादें ताजा कर दी हैं। दो साल पहले पेपर लीक, ग्रेस मार्क्स, असामान्य रिजल्ट और परीक्षा की पारदर्शिता को नीट यूजी परीक्षा बुरी तरह विवादों से घिर गई थी। पेपर रद्द करने की मांग को लेकर खूब धरना प्रदर्शन किए गए थे। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था और कई बार सुनवाइयां चली थीं। बताया गया कि 2024 की नीट परीक्षा में कई छात्रों को परीक्षा से पहले ही पेपर मिल गया था। बिहार पुलिस और बाद में CBI ने जांच शुरू की और कई गिरफ्तारियां हुईं। कुछ छात्रों ने कथित तौर पर 30–50 लाख रुपये देकर पेपर खरीदा था। रिजल्ट आया तो इसमें 67 छात्रों ने टॉप किया। सबकी ऑल इंडिया रैंक 1 आई। ऐसा नीट के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था। 1404 परीक्षा केंद्रों से 2321 छात्रों को 700 से अधिक अंक मिले। इससे छात्रों को शक हुआ कि परीक्षा में गड़बड़ी हुई है।

कई छात्रों के 718 और 719 जैसे असंभव अंक भी आए जो कि सामान्य तरीके से आना संभव नहीं थे। NTA ने सफाई में बताया था कि कुछ छात्रों को “ग्रेस मार्क्स” दिए गए थे क्योंकि उनके परीक्षा केंद्रों पर समय बर्बाद हुआ था। भारी विरोध के बाद इन ग्रेस मार्क्स को हटाया गया और उन छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा कराई गई। बाद में ग्रेस मार्क्स हटने और री-एग्जाम के बाद 720 में से 720 पाने वाले छात्रों की संख्या घटकर 17 रह गई थी। लेकिन नीट 2024 में नंबर भर भर कर आने के चलते मार्क्स का इनफ्लेशन हो गया था। अच्छे अंक लाने वाले विद्यार्थी सरकारी मेडिकल कॉलेज पाने से चूक गए थे। एमबीबीएस पाने की कटऑफ काफी ऊपर चली गई थी।

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सीकर फिर क्यों चर्चा में

राजस्थान के कोचिंग के गढ़ कोटा के बाद सीकर जिला पिछले कुछ सालों से नई कोचिंग फैक्ट्री के तौर पर उभर रहा है। कोटा कोचिंग को यह जबरदस्त चुनौती दे रहा है। नीट यूजी और जेईई दोनों में यहां के कोचिंग इंस्टीट्यूट्स के बच्चों का रिजल्ट शानदार रहता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक नीट यूजी में यहां की सफलता की रेट नेशनल एवरेज से पांच से छह गुना ज्यादा है। लेकिन 2024 नीट पेपर लीक विवाद और नीट यूजी 2026 दोनों मामले में इस जिले का नाम बदनाम हुआ है।

2024 में सीकर में क्या हुआ था

वर्ष 2024 में सीकर के कई छात्रों ने बहुत ऊंचे अंक हासिल किए थे। यहां के छात्रों ने कोटा कोचिंग को टक्कर दी थी। 2024 नीट पेपर लीक विवाद की सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट नरेंद्र हुड्डा ने सवाल उठाया था कि देश में औसत एक सेंटर पर नीट के लिए सिलेक्शन 0.6 फीसदी है, लेकिन अकेले सीकर में यह करीब 25 फीसदी हो गया। NEET 2024 में 500 से ज्यादा नंबर प्राप्त करने वाले छात्र जिन टॉप 100 परीक्षा केंद्रों के थे, उनमें से 71 राजस्थान के थे। इन 71 में से अकेले सीकर के 46 सेंटर थे। सीनियर एडवोकेट नरेंद्र हुड्डा के मुताबिक सीकर में 700 से ऊपर 8 कैंडिडेट्स, 650 से ऊपर 69 कैंडिडेट्स, 600 से ऊपर 115 कैंडिडेट्स, 550 से ऊपर स्कोर करने वाले 241 कैंडिडेट्स थे। उन्होंने दावा किया था कि सिटी कोऑर्डिनेटर ही इन स्कूलों के ओनर हैं। ये प्राइवेट स्कूल है। इनविजिलेटर इन स्कूलों के कर्मचारी है। इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि ये टीचर्स कोटा और सीकर के कोचिंग सेंटरों से मिले हुए हैं।नेशनल लेवल पर 1000 में से 6 लोगों ने एवरेज 650 अंक से ऊपर स्कोर किया था। वहीं सीकर में हर चार में से एक कैंडिडेट ने 650 से ज्यादा स्कोर किया था। नीट 2024 में 650 अंक पाने वाले 2037 परीक्षार्थी अकेले सीकर से थे। तब 23.22 लाख स्टूडेंट्स में से 30,204 को 650 अंक मिले थे।

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2026 के नीट विवाद में भी सीकर पेपर लीक के केंद्र में

राजस्थान पुलिस एसओजी यह पता लगाने में जुटी है कि नीट यूजी पेपर केरल से होता हुआ किन-किन राज्यों से कहां-कहां बिका। इस दौरान कितनी रकम का लेनदेन किया गया। जांच में पता चला है कि ‘लीक गेस पेपर’ का केंद्र सीकर रहा। सवालों के सीकर, झुंझुनूं, चूरू, नागौर और देहरादून तक जाने की पुष्टि हो चुकी है। सीकर के पीपराली रोड पर इसके कंसल्टेंसी चलाने वाला राकेश मंडावरिया मुख्य किरदार है। इसे अप्रैल में ही गेस पेपर (क्वेश्चन बैंक) मिल गया था। केरल से एमबीबीएस कर रहे चूरू के युवक को भी प्रश्नों की पीडीएफ सीकर से ही भेजी गई। एमबीबीएस छात्र के पिता सीकर में एक पीजी हॉस्टल चलाते हैं। उसके माध्यम से यह अन्य छात्रों और करियर काउंसलर्स तक पहुंचा और फिर छात्रों के बीच बंटता चला गया। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक परीक्षा के दिन कुछ छात्रों ने सीकर के उद्योग नगर थाने में शिकायत दी थी, लेकिन पेपर लीक की शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। बाद में छात्रों ने सबूतों के साथ NTA को ईमेल किया, जिसके बाद एजेंसियां सक्रिय हुईं। शुरुआती तौर पर एनटीए के स्थानीय को-ऑर्डिनेटर ने किसी भी गड़बड़ी या शिकायत से इनकार किया था।

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8 मई को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की टीम ने पहली बार सीकर और झुंझुनूं में जांच शुरू की थी। राजस्‍थान के सीकर और झुंझुनूं में कई स्‍टूडेंट्स के पास गैस पेपर मिला था। बताया जा रहा है कि 720 में से 600 नंबर के प्रश्न इस गैस पेपर में थे। करीब 120 से 140 प्रश्न हूबहू परीक्षा में आए थे। 720 में से 600 अंक का पेपर इसी गेस पेपर से था।

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