NEET UG : नीट यूजी परीक्षा साल में 2 या 3 बार कराने पर विचार, अगले साल बड़े बदलाव की तैयारी
संसद की समिति ने छात्रों पर दबाव कम करने और परीक्षा गड़बड़ियों से शैक्षणिक नुकसान रोकने के लिए नीट यूजी को वर्ष में एक से अधिक बार आयोजित करने की सिफारिश की है। सरकारी अधिकारियों ने पैनल को बताया कि इस सुझाव पर विचार किया जाएगा।

संसद की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी स्थायी समिति ने बुधवार को सुझाव दिया कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) वर्ष में एक से अधिक बार आयोजित की जानी चाहिए। इससे छात्रों पर दबाव कम होगा और किसी अन्य की गलती के कारण उनका शैक्षणिक वर्ष बर्बाद नहीं होगा। सूत्रों के अनुसार, समिति की बैठक में हालिया नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक विवाद पर चर्चा हुई। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के अधिकारियों ने समिति को मामले की जांच और कथित सुरक्षा चूक के बाद उठाए गए कदमों की जानकारी दी।
एनटीए और एनएमसी के अधिकारियों ने बैठक में छात्रों की आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई और प्रभावित परिवारों की मदद के लिए सुझाव दिए। अधिकारियों ने समिति को आश्वस्त किया कि 21 जून को नीट-यूजी पुनर्परीक्षा निष्पक्ष तरीके से कराई जाएगी। समिति ने एनटीए और एनएमसी के शीर्ष अधिकारियों को भी तलब किया था। NTA के डायरेक्टर जनरल अभिषेक सिंह, हायर एजुकेशन सेक्रेटरी विनीत जोशी और NMC के चेयरमैन अभिजात सी. सेठ उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने कमेटी के सामने अपनी बात रखी। समिति के सदस्यों ने अधिकारियों से प्रवेश परीक्षाओं को निष्पक्ष, पारदर्शी और गड़बड़ी-मुक्त बनाने के लिए पूरी तरह भरोसेमंद एवं त्रुटिरहित व्यवस्था अपनाने को कहा। समिति के प्रमुख समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव हैं।
चीन, अमेरिका से लें सीख
समिति के सदस्यों ने अधिकारियों से कहा कि चीन, अमेरिका और अन्य देशों में भी इसी प्रकार की प्रवेश परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं, लेकिन वहां प्रश्नपत्र लीक होने या अन्य अनियमितताओं की घटनाएं सामने नहीं आतीं। सदस्यों ने अधिकारियों को दूसरे देशों के सर्वोत्तम तौर तरीकों और प्रक्रियाओं से सीख लेने तथा उन्हें अपनाने की सलाह दी, ताकि देश की परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाया जा सके। समिति ने परीक्षा एजेंसी का हौसला बढ़ाने के साथ एनएमसी और एनटीए के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
नीट-यूजी प्रश्नपत्र विवाद के बाद यह तीसरी संसदीय समिति थी, जिसके समक्ष स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रालयों, एनटीए तथा एनएमसी के शीर्ष अधिकारियों ने पेश होकर अपना पक्ष रखा। NEET-UG, भारत की सबसे बड़ी मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा है, जो अभी साल में एक बार एक ही सिटिंग में होती है। इस साल 3 मई को हुई परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दी गई थी।
सूत्रों के मुताबिक, सांसदों ने ऐसी घटनाओं के बार-बार होने पर चिंता जताई। सदस्यों ने बताया कि 2024 और फिर 2026 में भी ऐसे ही विवाद सामने आए थे, जिससे जवाबदेही पर सवाल उठे हैं। यह भी सवाल उठाया गया कि क्या भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए मौजूदा सजा के नियम काफी हैं।
परीक्षा दो या तीन बार कराने पर सरकारी करेगी विचार
सूत्रों ने कहा, 'सदस्यों ने सुझाव दिया कि साल भर में कई बार नीट यूजी परीक्षा होनी चाहिए, कम से कम दो या तीन, क्योंकि जब किसी छात्र का पूरा साल किसी और की गलती की वजह से बर्बाद हो जाता है, तो छात्रों पर इसका बहुत गहरा असर पड़ता है।' पता चला है कि सरकारी अधिकारियों ने पैनल को बताया कि इस सुझाव पर विचार किया जाएगा।
छात्र समूहों की ओर से NEET को साल में कई बार आयोजित करने की मांग बार-बार उठाई जाती रही है। जुलाई 2018 में, तत्कालीन केंद्रीय HRD मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने घोषणा की थी कि NTA साल में दो बार JEE Main और NEET-UG आयोजित करेगा। हालांकि इसे कभी लागू नहीं किया गया। हालांकि नेशनल मेडिकल कमीशन ने 2023 में कहा था कि साल में दो बार NEET-UG आयोजित करना संभव नहीं होगा क्योंकि सभी MBBS सीटें एक ही काउंसलिंग प्रक्रिया के ज़रिए भरी जाती हैं।
अगले साल से सीबीटी में होगा नीट
अधिकारियों ने पैनल को यह भी बताया कि सरकार अगले परीक्षा चक्र से नीट के लिए कंप्यूटर-बेस्ड टेस्टिंग (CBT) शुरू करने पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, हालांकि सांसदों ने खास तौर पर ग्रामीण इलाकों के छात्रों के लिए आसानी से बदलाव करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने डिजिटल एक्सेस, इंफ्रास्ट्रक्चर और क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा के पेपर उपलब्ध कराने की जरूरतों जैसे मुद्दों का जिक्र किया।




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