NEET UG : MBBS Seats in india big increase NMC Government 3 Changes new Medical Colleges rules mbbs cap limit NEET UG : बड़ी खुशखबरी, MBBS सीटों की होगी बारिश, सरकार ने मेडिकल कॉलेजों को लेकर किए 3 बड़े बदलाव, Career Hindi News - Hindustan
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NEET UG : बड़ी खुशखबरी, MBBS सीटों की होगी बारिश, सरकार ने मेडिकल कॉलेजों को लेकर किए 3 बड़े बदलाव

NEET UG MBBS Seats : इन संशोधित नियमों से नए मेडिकल संस्थान खोलने में आसानी होगी और मौजूदा कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकेगी। अधिकतम 150 एमबीबीएस सीटों की सीमा भी हटा दी गई है। आबादी के आधार पर सीटों की कैपिंग भी खत्म हो गई है।

Wed, 29 April 2026 06:46 AMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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NEET UG : बड़ी खुशखबरी, MBBS सीटों की होगी बारिश, सरकार ने मेडिकल कॉलेजों को लेकर किए 3 बड़े बदलाव

NEET UG MBBS Seats : सरकार के नेशनल मेडिकल कमीशन ने देश में एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ाने और नए मेडिकल कॉलेज खोलने की राह को आसान बनाने के मकसद से नियमों में कई बड़े बदलाव किए हैं। इससे भविष्य में एमबीबीएस सीटों की संख्या में भारी इजाफा होने की संभावना है। नए नियमों के तहत अब प्रति 10 लाख की जनसंख्या पर 100 एमबीबीएस सीटों की सीमा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है और नए कॉलेज खोलने की प्रक्रिया को भी काफी सरल बना दिया गया है। इसके अलावा अधिकतम 150 एमबीबीएस सीटों की सीमा भी हटा दी गई है। तीसरे बदलाव के तहत मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के बीच की दूरी के नियम में भी तब्दीली की गई है। पहले नियम यह था कि मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के बीच का ट्रैवल टाइम अधिकतम 30 मिनट का होना चाहिए। अब सरकार ने मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के बीच की दूरी को 10 किलोमीटर तक रखने की अनुमति दे दी है। इसके तहत मैदानी क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल 10 और पहाड़ी क्षेत्रों (पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्य) में 15 किलोमीटर दूर तक स्थापित हो सकते हैं।

मालूम हो कि किसी भी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए एक अस्पताल की जरूरत होती है। सालों पहले मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का एक साथ होना जरूरी था। मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए करीब 25 एकड़ जमीन की जरूरत होती है और शहरों के आसपास इतनी जमीन एक साथ नहीं मिलती है। कई बार जमीन के बीच में सड़क आ जाती है। कुछ साल पूर्व सरकार ने नियमों में ढील देते हुए प्रावधान किया था कि ऐसी स्थिति में जमीन को एक भूमिगत मार्ग से जोड़ दिया जाए, फिर भी चुनौती बढ़ती गई। ऐसे में 2023 में सरकार ने नियम बनाया कि मेडिकल कॉलेज और अस्पताल अलग-अलग खोले जा सकते हैं और शर्त रखी गई कि उनके बीच की दूरी 30 मिनट से ज्यादा की नहीं हो। समस्या का समाधान इससे भी नहीं हुआ, क्योंकि आजकल जाम लगने पर कई बार पांच किलोमीटर की दूरी तय करने में 30 मिनट से ज्यादा लग जाते हैं।

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आबादी के अनुसार एमबीबीएस सीटों का प्रावधान भी हटा

दूरी निर्धारित करने के अलावा सरकार ने प्रति 10 लाख की आबादी पर 100 एमबीबीएस सीटों के प्रावधान को भी हटा दिया है। पूर्व में यह नियम इसलिए बनाया गया था कि ताकि जिन राज्यों में कम मेडिकल कॉलेज हैं, वहां नये खुल सकें और जहां ज्यादा मेडिकल कॉलेज हैं, वहां अब और नए नहीं खुलें, लेकिन दक्षिणी राज्यों की मांग पर यह नियम भी खत्म कर दिया है।

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अधिकतम 150 एमबीबीएस सीटों की सीमा भी हटाई

मेडिकल कॉलेजों के लिए 150 MBBS सीटों की सीमा तय करने के तीन साल बाद, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने मंगलवार को यह सीमा हटा दी है और पुरानी व्यवस्था पर लौट आया है। जारी एक नोटिफिकेशन में, मेडिकल शिक्षा के सर्वोच्च नियामक ने 'अंडरग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशंस, 2023' (UG-MSR 2023) में कई अहम बदलाव किए हैं। सबसे महत्वपूर्ण संशोधन उस पिछली पाबंदी को हटाने से जुड़ा है, जिसमें शैक्षणिक सत्र 2024-25 से हर कॉलेज में MBBS सीटों की संख्या 150 तक सीमित कर दी गई थी। 2023 तक कोई भी नया UG मेडिकल कॉलेज 100 से 150 MBBS छात्रों को दाखिला दे सकता था और बाद में इस संख्या को बढ़ाकर 250 तक कर सकता था। लेकिन 2023 में, NMC ने नए नियम जारी किए, जिनमें कहा गया था, '2024 से नए अंडरग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा कॉलेज खोलने के लिए आवेदन केवल 50/100/150 सीटों के लिए ही स्वीकार किए जाएंगे। जो कॉलेज सीटों की संख्या बढ़ाना चाहते हैं, वे 2024-25 से कुल 150 MBBS छात्रों की सीमा से आगे नहीं बढ़ सकते।' एनमएसी ने 150 सीटों की यह सीमा हटा दी है और नोटिफिकेशन में सीटों की ऊपरी सीमा का कोई जिक्र नहीं किया गया है।

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बताया जा रहा है कि संभवतः पिछली 250 सीटों की सीमा को ही फिर से लागू कर दिया गया है। 150 MBBS सीटों की सीमा हटने के बाद मेडिकल कॉलेजों को अपनी दाखिला क्षमता बढ़ाने में ज्यादा आजादी मिलेगी, बशर्ते वे अन्य सभी नियामक शर्तों को पूरा करते हों। अब नए कॉलेज सीधे 200 या 250 सीटों की अप्रूवल के साथ भी खोले जा सकेंगे। इस शर्त के हटने से सीटों की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया आसान हो जाएगी और मेडिकल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की कोशिश कर रहे राज्यों पर से नियामक पाबंदियां कम हो जाएंगी।

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