NCERT Class 9: 9वीं के छात्र अब स्कूल में बनेंगे कलाकार, संगीत से लेकर थिएटर तक की होगी पढ़ाई
NCERT Class 9: एनसीईआरटी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत, शैक्षिक सत्र 2026-27 से कक्षा नौवीं के विद्यार्थियों के लिए कला शिक्षा का एक नया सिलेबस जारी किया गया है।

NCERT Class 9: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने स्कूली शिक्षा के ढांचे में एक बड़ा बदलाव की नींव रखी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत, शैक्षिक सत्र 2026-27 से कक्षा नौवीं के विद्यार्थियों के लिए कला शिक्षा का एक नया सिलेबस जारी किया गया है। अब छात्र केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि स्कूल के भीतर ही थिएटर, मूर्ति कला, शास्त्रीय संगीत और नृत्य की बारीकियां भी सीखेंगे।
इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य स्कूली स्तर पर ही कला के प्रति विद्यार्थियों का रुझान बढ़ाना और उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है।
नाट्य कला: खुद की बनाएंगे 'नाटक मंडली'
कोर्स की सबसे रोमांचक बात यह है कि छात्र अब केवल नाटक देखेंगे नहीं, बल्कि खुद की नाटक मंडली बनाएंगे।
पटकथा से निर्देशन तक: छात्र पटकथा लेखन, निर्देशन और अभिनय की बारीकियां सीखेंगे।
पर्दे के पीछे का हुनर: नाटक में लाइटिंग (रोशनी), साउंड इफेक्ट्स (आवाज) और बैकस्टेज मैनेजमेंट का काम भी सिखाया जाएगा।
रंगकर्मियों से जुड़ाव: छात्र स्थानीय रंगकर्मियों से बातचीत करेंगे और सर्वेक्षण जैसी गतिविधियों के जरिए रंगमंच की दुनिया को गहराई से समझेंगे।
संगीत और लोककला: तीनताल और लोकगीतों की गूंज
संगीत के क्षेत्र में छात्रों को शास्त्रीय और लोक संगीत दोनों का ज्ञान दिया जाएगा।
लोक संगीत: छात्र अपनी स्थानीय लोककलाओं और लोक संगीत के बोलों के पीछे छिपे विषयों को समझेंगे।
ताल का ज्ञान: विद्यार्थियों को संगीत के तकनीकी पक्षों जैसे 'तीनताल' आदि के बारे में विस्तार से पढ़ाया जाएगा।
दृश्य कला और शिल्प: रंगों और मिट्टी का जादू
दृश्य कला के तहत छात्रों को किताबी ज्ञान के बजाय ‘करके सीखने’ पर जोर दिया गया है।
शिल्प कला: छात्र मिट्टी, बांस और कपड़े जैसी प्राकृतिक चीजों से सुंदर कलाकृतियां बनाना सीखेंगे।
कला डायरी: साल भर छात्र एक 'आर्ट डायरी' रखेंगे, जिसमें वे अपनी बनाई पेंटिंग्स और कला के अनुभवों को दर्ज करेंगे।
आर्ट गैलरी भ्रमण: छात्रों को स्थानीय कलाकारों से मिलवाने और आर्ट गैलरी का भ्रमण कराने की योजना भी शामिल है।
नृत्य: शारीरिक संतुलन और मुद्राओं की समझ
नृत्य के कोर्स में शरीर के संतुलन और विभिन्न मुद्राओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
विश्लेषण: छात्र फिल्मों में दिखाए जाने वाले नृत्य को देखेंगे और उनकी शैलियों का विश्लेषण करेंगे।
क्षेत्रीय रंग: कोर्स में स्थानीय और क्षेत्रीय नृत्य शैलियों को विशेष स्थान दिया गया है ताकि छात्र अपनी विरासत पर गर्व कर सकें।
परीक्षा और मूल्यांकन: प्रैक्टिकल पर होगा जोर
एनसीईआरटी की कला एवं सौंदर्य शिक्षा विभाग की प्रमुख डॉ. ज्योत्सना तिवारी ने बताया कि इस कोर्स में मधुबनी पेंटिंग, भागलपुर के बांस शिल्प और भोजपुरी लोकगीत जैसी लोक विधाओं को प्रमुखता दी गई है।
प्रशिक्षण: स्कूलों में स्थानीय कलाकारों को बुलाकर छात्रों को सीधे प्रशिक्षण दिलाया जा सकेगा।
वार्षिक परीक्षा: साल के अंत में एक प्रैक्टिकल परीक्षा होगी। साथ ही, कला के इतिहास और बुनियादी सिद्धांतों से जुड़े सैद्धांतिक सवाल भी पूछे जाएंगे।




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