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बदला मोहनजोदड़ो की डांसिंग गर्ल का लुक, NCERT की 9वीं क्लास की किताब में छपी तस्वीर पर बवाल

NCERT की 9वीं क्लास की आर्ट्स बुक में हड़प्पा काल की डांसिंग गर्ल की मूर्ति को शेडिंग के जरिए कपड़े पहनाने जैसा दिखाने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

Mon, 15 June 2026 04:56 PMHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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बदला मोहनजोदड़ो की डांसिंग गर्ल का लुक, NCERT की 9वीं क्लास की किताब में छपी तस्वीर पर बवाल

हड़प्पा सभ्यता की वो मशहूर 'डांसिंग गर्ल' जिसके बारे में पढ़कर और जिसकी तस्वीरें देखकर कई पीढ़ियां बड़ी हुई हैं, अचानक एक नए विवाद का केंद्र बन गई है। हजारों साल पुरानी इस ऐतिहासिक मूर्ति के साथ कुछ ऐसा हुआ है, जिसने शिक्षा जगत से लेकर सियासी गलियारों तक में तेज हलचल पैदा कर दी है। दरअसल मामला NCERT की 9वीं क्लास की आर्ट्स की नई किताब 'मधुरिमा' से जुड़ा है। इस किताब में मूर्ति की एक ऐसी तस्वीर छापी गई है, जिसमें उसे कंधों के नीचे काले रंग से शेड करके दिखाया गया है। पहली नजर में देखने पर ऐसा लगता है जैसे इस ऐतिहासिक मूर्ति को कपड़े पहना दिए गए हों या उसके शारीरिक बनावट को जानबूझकर छिपाने की कोशिश की गई हो। बस इसी शेडिंग ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। तर्क देने वालों का कहना है कि क्या भारत की सबसे मशहूर पुरातात्विक खोजों में से एक के असली स्वरूप के साथ छेड़छाड़ करना सही है?

क्या है पूरा विवाद?

गौरतलब है कि मोहनजोदड़ो से खुदाई में मिली यह कांसे की मूर्ति सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे खास और पहचानी जाने वाली ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। दुनिया भर में इसका असली डिजाइन अपने साधारण और बेबाक अंदाज के लिए जाना जाता है। किताब के पहले चैप्टर 'हिस्ट्री ऑफ आर्ट' में इसका जिक्र विस्तार से किया गया है। टेक्स्ट में बकायदा मूर्ति की तारीफ की गई है कि कैसे इसे वेस्ट बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ में मशहूर 'लॉस्ट-वैक्स' तकनीक से बनाया गया था। इसमें बताया गया है कि मूर्ति का एक घुटना मुड़ा है, एक हाथ कमर पर रखा है और ठुड्डी थोड़ी ऊपर की तरफ उठी हुई है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जब पढ़ने वाले की नजर उसके साथ छपी तस्वीर पर जाती है, तो कहानी कुछ और ही नजर आती है। आलोचकों का कहना है कि मूर्ति के शरीर पर जो शेड दिया गया है, वो इसके असली रूप से बिल्कुल अलग है और इतिहास को एक अलग नजरिए से परोसने की कोशिश है।

NCERT की ही दो किताबों में अलग-अलग तस्वीरें

इस मामले में सबसे दिलचस्प मोड़ यह है कि NCERT की ही कुछ दूसरी किताबों में इस मूर्ति की तस्वीर बिल्कुल अपने असली रूप में छपी है। मिसाल के तौर पर, छठी क्लास की सोशल साइंस की किताब के छठे चैप्टर 'भारतीय सभ्यता की शुरुआत' में डांसिंग गर्ल की जो फोटो लगाई गई है, उसमें किसी भी तरह की कोई शेडिंग या छेड़छाड़ नहीं है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर 9वीं की आर्ट्स की किताब में ही इसे क्यों बदल दिया गया? एक ही संस्था की दो अलग-अलग किताबों में एक ही ऐतिहासिक धरोहर की अलग-अलग तस्वीरें क्यों छापी गई हैं?

शुरू हुई सियासी बयानबाजी

जैसे ही यह मामला सोशल मीडिया और खबरों में उछला इस पर सियासत भी गरमा गई। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. शमा मोहम्मद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस तस्वीर को लेकर तीखी आलोचना की। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि मोहनजोदड़ो की इस मशहूर मूर्ति का धड़ 9वीं क्लास की किताब में ढका हुआ दिखाया जा रहा है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ देश में नीट पेपर लीक और सीबीएसई की व्यवस्थाओं से जुड़ी कमियों जैसे बड़े और गंभीर मुद्दे सामने मुंह बाए खड़े हैं, और दूसरी तरफ सरकार का पूरा ध्यान किताबों में इस तरह के अनावश्यक बदलाव करने पर लगा हुआ है। अपनी पोस्ट में उन्होंने सीधे तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी निशाना साधा।

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NCERT का रुख

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जब बवाल काफी बढ़ गया तो NCERT के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। सूत्रों के मुताबिक, मामले को संबंधित विभाग के पास भेज दिया गया है और अंदरूनी स्तर पर इसकी जांच की जा रही है। लेकिन इस पूरे विवाद में सबसे अहम और चौंकाने वाला बयान शिक्षाविद् और लेखक मिशेल डैनिनो का आया है। डैनिनो उस टेक्स्टबुक डेवलपमेंट कमेटी के हेड थे, जिसने छठी क्लास की नई सोशल साइंस की किताब तैयार की थी। उन्होंने बताया कि छठी क्लास की किताब में मूर्ति की असली तस्वीर ही रखी गई है, लेकिन इसके लिए भी काफी माथापच्ची और बहस हुई थी।

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डैनिनो ने खुलासा करते हुए कहा, “मुझसे कहा गया था कि इस तस्वीर को चैप्टर के पहले पेज पर न रखूं, जहां मैंने इसे शुरुआत में रखा था। काफी लंबी चर्चा और दबाव के बाद, मुझे इस डांसिंग गर्ल को चैप्टर के अंदर के पन्नों पर शिफ्ट करना पड़ा। हालांकि वहां फोटो बिना किसी बदलाव के मौजूद है।”

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जब उनसे पूछा गया कि ऐसा क्यों हुआ, तो उनका मानना था कि शायद इस मूर्ति को उम्र के हिसाब से सही नहीं माना जा रहा था। उनका सीधा इशारा इस बात की तरफ था कि शायद नग्नता को लेकर कुछ लोगों को आपत्तियां थीं। हालांकि, डैनिनो ने यह बात बिल्कुल साफ कर दी कि 9वीं क्लास की आर्ट्स की किताब से उनका कोई लेना-देना नहीं था और न ही उन्हें उस किताब में की गई शेडिंग वाले फैसले की कोई जानकारी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या NCERT आने वाले समय में इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक सफाई पेश करता है?

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