BTech छात्रों से ऑफर वापस लिए, IIM से स्टाइपेंड घटाने को कहा, युद्ध के चलते कंपनियों ने भर्ती प्रक्रिया बदली
रिपोर्ट के मुताबिक, सॉफ्टवेयर टेस्टिंग प्लेटफॉर्म ब्राउजर स्टैक ने 2026 बैच के इंजीनियरिंग छात्रों को दिए गए ऑफर रद्द कर दिए हैं। कॉलेजों ने नए भर्ती छात्रों को आगाह किया कि उनकी ऑनबोर्डिंग में देरी हो सकती है।

मध्य-पूर्व जंग का असर इस साल कॉलेज छात्रों की नौकरियां पर दिखने लगा है। पहले एआई और अब पश्चिमी एशिया युद्ध से कंपनियां भर्ती योजनाओं में बदलाव कर रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सॉफ्टवेयर टेस्टिंग प्लेटफॉर्म ब्राउजर स्टैक ने 2026 बैच के इंजीनियरिंग छात्रों को दिए गए ऑफर रद्द कर दिए हैं। कॉलेजों ने नए भर्ती छात्रों को आगाह किया कि उनकी ऑनबोर्डिंग में देरी हो सकती है। कंपनियां भारत के प्रमुख बी-स्कूलों और इंजीनियरिंग कॉलेजों में 2027 बैच के छात्रों के लिए इंटर्नशिप की शर्तों में बदलाव कर रही हैं।
ब्राउजर स्टैक में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और पीपल फंक्शन के प्रमुख रोहित मुंजाल ने एक ईमेल जवाब में बताया, कुछ इंजीनियरिंग छात्रों को दिए गए ऑफर रद्द करने का फैसला कठिन था। मुंजाल ने इंजीनियरिंग छात्रों की संख्या का खुलासा नहीं किया, लेकिन कंपनी ने कहा कि वह 15 से ज्यादा एमबीए स्नातकों को ऑनबोर्ड करने की योजना पर सही रास्ते पर है। वहीं मिंट को मिली जानकारी के अनुसार, प्रभावित छात्रों की संख्या भर्ती किए जा रहे बी-स्कूल स्नातकों की संख्या से कहीं ज्यादा है।
ऑनबोर्डिंग में देरी चुनौती
आईआईएम इंदौर के निदेशक हिमांशु राय ने कहा कि संस्थान के सामने मुख्य चुनौती ऑनबोर्डिंग में देरी का जोखिम है। क्योंकि कंपनियां नए प्रोजेक्ट शुरू करने के मामले में अधिक सतर्क रवैया अपनाती हैं। बी स्कूल ने कहा कि बैच को किसी भी बाजार में आए बदलाव से सुरक्षा मिले, इसके लिए कॉरपोरेट एचआर पार्टनर्स के साथ सक्रिय हैं।
वजीफा घटाने का अनुरोध
इंटर्नशिप की भूमिका अहम
बी-स्कूलों में प्लेसमेंट साइकिल तब शुरू होता है, जब रिक्रूटर सितंबर-अक्तूबर में आईआईएम कैंपस में आते हैं ताकि अगले साल अप्रैल-मई में होने वाली इंटर्नशिप के लिए छात्रों को हायर कर सकें। इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी पैटर्न अपनाया जाता है। आईआईटी खड़गपुर, बॉम्बे, मद्रास, रुड़की, कानपुर और दिल्ली अपना प्लेसमेंट 1 दिसंबर को शुरू करते हैं। कई नए आईआईटी, एनआईटी और जाने-माने प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज प्लेसमेंट सितंबर और अक्तूबर में शुरू कर देते हैं।
जहां एक ओर विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियां एआई के कारण छंटनी की घोषणा कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने नौकरियों के लिए संकट पैदा कर दिया है। इसका असर भारत के टॉप बी-स्कूल के 2025-2027 बैच के छात्रों पर पड़ेगा, जो अभी इंटर्नशिप कर रहे हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद (आईआईएमए) में प्लेसमेंट के चेयरपर्सन विश्वनाथ पिंगली ने कहा कि युद्ध का अब तक हायरिंग पर अधिक असर नहीं पड़ा है।
मिंट को पता चला कि एक प्रमुख कंसल्टिंग कंपनी ने आईआईएम से छात्रों के मासिक वजीफे को 2 हजार डॉलर से घटाकर 1400 डॉलर करने का अनुरोध किया है। आईआईएम कोझिकोड के निदेशक देबाशीष चटर्जी के अनुसार, युद्ध के कारण आर्थिक केंद्रों में बदलाव होगा और निवेशक सुरक्षित क्षेत्रों की तलाश करेंगे। इसका प्रभाव दो से तीन महीनों में नियुक्तियों के पैटर्न में बदलाव के रूप में दिखेगा।




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