ईरान पढ़ने गए भारतीय छात्रों पर मुश्किलें, युद्ध-तनाव के बीच कैसे होगी पढ़ाई; सुरक्षा को लेकर भी टेंशन
ईरान में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्र युद्ध जैसे हालात के कारण डर और अनिश्चितता में हैं। सुरक्षा, परीक्षा और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
डॉक्टर बनने का सपना लेकर विदेश जाने वाले कई भारतीय छात्रों के लिए इस समय हालात बेहद मुश्किल हो गए हैं। जो छात्र बेहतर और सस्ती मेडिकल शिक्षा के लिए ईरान गए थे वे अब वहां बढ़ते तनाव और संघर्ष की वजह से डर, अनिश्चितता और पढ़ाई रुकने की चिंता से जूझ रहे हैं। जहां कभी उन्हें कम खर्च में अच्छी पढ़ाई का मौका दिखा था, वहीं अब वही जगह उनके लिए सबसे बड़ी चिंता बन गई है।
क्यों भारतीय छात्र ईरान का करते हैं रुख
भारत में मेडिकल की पढ़ाई करना कई छात्रों के लिए बेहद महंगा और कठिन हो जाता है। निजी कॉलेजों की फीस बहुत ज्यादा होती है और सरकारी कॉलेजों में सीटें सीमित होने के कारण कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।
ऐसे में ईरान कई भारतीय छात्रों के लिए एक विकल्प बनकर उभरा। यहां मेडिकल और अन्य कोर्स की फीस भारत के मुकाबले काफी कम है। रहने खाने का खर्च भी अपेक्षाकृत सस्ता पड़ता है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह संभव हो पाता है।
पढ़ाई की सुविधाएं भी थीं आकर्षण का कारण
ईरान के कई विश्वविद्यालय अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई कराते हैं, जिससे भारतीय छात्रों को भाषा की ज्यादा परेशानी नहीं होती। यहां की डिग्रियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता भी मिलती है।
मेडिकल शिक्षा का ढांचा मजबूत माना जाता है और एडमिशन प्रक्रिया भारत की तुलना में आसान रहती है। इसी वजह से खासकर जम्मू कश्मीर जैसे इलाकों से बड़ी संख्या में छात्र वहां पढ़ने जाते रहे हैं। सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव भी एक कारण रहा है, जिससे परिवारों को यह देश अपनेपन वाला लगता था। संघर्ष शुरू होने से पहले अनुमान था कि करीब 1500 से 2000 भारतीय छात्र वहां मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे।
अब युद्ध जैसे हालात ने बढ़ाई मुश्किलें
हालिया तनाव, जिसमें इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ टकराव की स्थिति बनी हुई है, ने छात्रों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में असुरक्षा का माहौल है। छात्रों का कहना है कि वे डर के साए में रह रहे हैं। आवाजाही सीमित हो गई है और कई जगह धमाकों और झड़पों की खबरें मिल रही हैं।
परीक्षा और पढ़ाई पर भी असर
सबसे बड़ी चिंता यह है कि कई छात्र अपने सेमेस्टर एग्जाम या मेडिकल क्वालिफाइंग टेस्ट नहीं दे पा रहे हैं। परीक्षाएं तय समय पर होंगी या टलेंगी, इस पर विश्वविद्यालयों की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। छात्रों को डर है कि अगर वे परीक्षा नहीं दे पाए तो उनका पूरा साल बर्बाद हो सकता है। कई छात्र इस दुविधा में हैं कि पढ़ाई जारी रखें या सुरक्षित रहने के लिए भारत लौट जाएं।
भारत सरकार ने दी सावधानी की सलाह
स्थिति को देखते हुए विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों, खासकर छात्रों, को सावधानी बरतने और संभव हो तो देश छोड़ने की सलाह दी है। सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर सहायता देने की बात भी कही गई है।
गौरतलब है कि जो छात्र कम खर्च में डॉक्टर बनने का सपना लेकर ईरान पहुंचे थे, वे अब सुरक्षा, पढ़ाई और भविष्य तीनों को लेकर चिंतित हैं। परिवार भारत में बैठे हर दिन खबरों का इंतजार कर रहे हैं, जबकि छात्र वहां यह तय नहीं कर पा रहे कि अगला कदम क्या हो।




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